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पड़ताल:जातियों में टटोल रहे विजय का गणित बागियों ने चुनाव काे बनाया दिलचस्प, 6 सीटों पर मजबूत दिख रहा महागठबंधन

आरा4 महीने पहले
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कुल्हड़िया रेलवे स्टेशन से सटी वनस्पति फैक्ट्री दो साल पहले बंद हो गई। स्थानीय मजदूरों और कर्मियों का काम-धंधा खत्म हो गया। क्षेत्र में लहलहाती धान की फसल किसानों को राहत दे रही है। भोजपुर में चुनावी शोर कम है। विकास के मुद्दे भी गौण हैं। चुनावी जीत का गणित जातियों से ही टटोला जा रहा है। विभिन्न गठबंधन और बागी प्रत्याशियों ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

भोजपुर जिले की 7 सीटों के चुनावी गणित में महागठबंधन मजबूत दिख रहा है। भाकपा माले और राजद के कार्यकर्ता एकजुट दिखते हैं। इसका लाभ भी मिलता दिख रहा है। जदयू की सीटों पर लोजपा के उम्मीदवार होने से एनडीए मतदाताओं में कंफ्यूजन भी है। जातीय वोट संबधित पार्टियों को मिलना लगभग तय है। टिकट नहीं मिलने से बागी उम्मीदवारों के मैदान में आने से संबंधित दलों के प्रत्याशियों की परेशानी बढ़ी हुई है।
संदेश : राजद और जदयू के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने जुटी लोजपा
राजद और जदयू के उम्मीदवार एक ही परिवार के हैं। एनडीए की ओर से जदयू के विजेंद्र कुमार यादव मैदान में हैं। राजद से विजेंद्र के छोटे भाई और निवर्तमान विधायक अरुण यादव की पत्नी किरण देवी चुनौती दे रही हैं। लोजपा ने भाजपा में सक्रिय रहीं श्वेता सिंह को उतारा है। विजेंद्र भी पहले विधायक रह चुके हैं। इस क्षेत्र में सबसे अधिक 65 हजार यादव मतदाता हैं।

दूसरे नंबर पर 55 हजार राजपूत हैं। 16 हजार भूमिहार हैं। 15 हजार कुशवाहा हैं। पासवान, रविदास और अन्य अति पिछड़ी जातियां भी हैं। यादव मतदाताओं के साथ माले के कैडर वोट का लाभ राजद को मिल रहा है। राजपूत वोटों में बिखराव है। मतदान के दिन तक यह स्थिति रही तो राजद को लाभ मिलेगा। यहां कुल 11 प्रत्याशी मैदान में हैं।
मुद्दा: जाति की बात हो रही है। लोगों की जुबां पर चर्चा है कि फलां जाति के लोग एनडीए के साथ हैं। सड़क और बिजली पर लोगों में संतोष है, तो नल जल योजना को आधा अधूरा बता रहे। रोजगार यहां कोई मुद्दा नहीं है।
बड़हरा : जातियों की जोड़-तोड़ व आशा की बगावत के बीच छिपा नतीजा
2015 के विस चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार रहीं आशा देवी की बगावत ने भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र प्रताप सिंह की परेशानी बढ़ा दी है। भाजपा का सीधा मुकाबला राजद से है। राजद से निवर्तमान विधायक सरोज यादव मैदान में हैं। क्षेत्र में जाति का शोर खूब है। अगड़ी और पिछड़ी जाति की चर्चा हो रही है। इस क्षेत्र में कुशवाहा वोट निर्णायक होगा। यहां सबसे अधिक 55 हजार यादव हैं।

इसके बाद 40 हजार कुशवाहा। राजपूत 35 हजार, भूमिहार 17 हजार, कुर्मी 10 हजार और पासवान 10 हजार मतदाता हैं। जातीय गणित के हिसाब से भाजपा जीत के प्रति आशावान हैं। लेकिन अगड़ा-पिछड़ा का जोर चला तो स्थितियां पलट सकती हैं। रालोसपा की सियामति देवी को कुशवाहा मतदाता का भरोसा है।
मुद्दा : बदलाव भी मुद्दा है। भाजपा और राजद दोनों के ही कार्यकर्ताओं में अपने प्रत्याशी के प्रति थोड़ी नाराजगी है। भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत है कि प्रत्याशी हमें पूछ नहीं रहे, जबकि पिछली बार प्रत्याशी लगातार संपर्क में हैं।
तरारी : माले और भाजपा की लड़ाई का तीसरा कोण हैं सुनील पांडेय
तरारी की त्रिकोणीय लड़ाई भाकपा माले के लिए थोड़ी इत्मीनान भरी है। उसे राजद के साथ का भी साफ लाभ मिल रहा है। भाजपा ने कौशल कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। कमिटमेंट के तहत भाजपा ने लोजपा के खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिया तो लोजपा छोड़ पूर्व विधायक सुनील पांडेय निर्दलीय मैदान में हैं। क्षेत्र में सुनील पांडेय को उनकी बेहतर पकड़ का लाभ मिल सकता है।

रालोसपा ने संतोष सिंह चंद्रवंशी को मैदान में उतारा है। कुल 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस क्षेत्र में सबसे अधिक 45 हजार भूमिहार मतदाता हैं। इसके बाद 40 हजार यादव मतदाता हैं। मुस्लिम 20 हजार, पासवान 15 हजार। यादव और मुस्लिम के साथ माले के कैडर वोट ही प्रत्याशी सुदामा प्रसाद की ताकत हैं।
मुद्दा: लोग रोजगार की बात कर रहे हैं। महागठबंधन की ओर से 10 लाख रोजगार देने की घोषणा से युवाओं को उम्मीद बंधा रही है। इसके बावजूद जाति और गठबंधन ही मुख्य मुद्दा है।
शाहपुर : वोटरों ने बढ़ाई शोभा की ‘शोभा’ तो मुश्किल में पड़ेंगी मुन्नी
ब्राह्मण बहुल इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। शाहपुर से 2005 और 2010 में भाजपा से विधायक रहीं मुन्नी देवी एक बार फिर भाजपा से मैदान में हैं। 2015 में भाजपा प्रत्याशी रहे विशेश्वर ओझा की पत्नी शोभा देवी निर्दलीय प्रत्याशी हैं। राजद नेता शिवानंद तिवारी के पुत्र राहुल तिवारी फिर से जीत के लिए राजद की ओर से मैदान में हैं।

ओझा केसमरिया गांव के श्रीराम ओझा और मुनि जी ओझा की मानें तो विशेश्वर ओझा की हत्या के कारण शोभा देवी के प्रति सहानुभूति है। यादव, मुस्लिम और भाकपा माले के कैडर वोट का राजद को तो एनडीए प्रत्याशी को राजपूत, भूमिहार, अति पिछड़ी और पासवान जाति के वोट पर अधिक भरोसा है।
मुद्दा: यहां मुद्दा भाजपा से टिकट किसे मिला यह है। भाजपा के एक कार्यकर्ता के अनुसार शोभा देवी को पार्टी का टिकट मिलता तो जीत सुनिश्चित थी। ब्राह्मण वोट में बिखराव की स्थिति में राजद को फायदा होने की भी चर्चा है।

शाहपुर : वोटरों ने बढ़ाई शोभा की ‘शोभा’ तो मुश्किल में पड़ेंगी मुन्नी
ब्राह्मण बहुल इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। शाहपुर से 2005 और 2010 में भाजपा से विधायक रहीं मुन्नी देवी एक बार फिर भाजपा से मैदान में हैं। 2015 में भाजपा प्रत्याशी रहे विशेश्वर ओझा की पत्नी शोभा देवी निर्दलीय प्रत्याशी हैं। राजद नेता शिवानंद तिवारी के पुत्र राहुल तिवारी फिर से जीत के लिए राजद की ओर से मैदान में हैं।

ओझा केसमरिया गांव के श्रीराम ओझा और मुनि जी ओझा की मानें तो विशेश्वर ओझा की हत्या के कारण शोभा देवी के प्रति सहानुभूति है। यादव, मुस्लिम और भाकपा माले के कैडर वोट का राजद को तो एनडीए प्रत्याशी को राजपूत, भूमिहार, अति पिछड़ी और पासवान जाति के वोट पर अधिक भरोसा है।
मुद्दा: यहां मुद्दा भाजपा से टिकट किसे मिला यह है। भाजपा के एक कार्यकर्ता के अनुसार शोभा देवी को पार्टी का टिकट मिलता तो जीत सुनिश्चित थी। ब्राह्मण वोट में बिखराव की स्थिति में राजद को फायदा होने की भी चर्चा है।

अगिआंव : जदयू व भाकपा माले के बीच इस बार कांटे की टक्कर
अगियांव में जदयू और भाकपा माले के बीच कांटे की टक्कर है। राजद के साथ का लाभ माले को मिलता दिख रहा है। जदयू से निवर्तमान विधायक प्रभुनाथ राम दोबारा जीत का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें भाकपा माले के मनोज मंजिल से कड़ी चुनौती मिल रही है। रविदास और यादव बहुल इस क्षेत्र में अति पिछड़ा वोट निर्णायक हो सकता है।

ब्राह्मण, भूमिहार, कुशवाहा, राजपूत और अन्य जातियां भी हैं। निवर्तमान विधायक से लोगों की शिकायत है कि कम मिलते हैं। भाकपा माले को लेकर भी कुछ पुरानी शंकाएं लोगों में है। रालोसपा ने मनु राम राठौर और लोजपा ने राजेश्वर पासवान को मैदान में उतारा है। कुल 10 प्रत्याशी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं।
मुद्दा: क्षेत्र में शांति का मुद्दा है। हत्या और अपराध देख चुके लोग शांति और सद्भाव से जीना चाहते हैं। किसान अपनी खेतों की रक्षा के साथ ही सिंचाई सुविधा की भी बात कर रहे हैं।
आरा : इस सीट पर कब्जा किसका ...अति पिछड़ी जातियां जिनके साथ उसका

आरा में भाजपा और भाकपा-माले के बीच सीधा मुकाबला है। चार बार विधायक रह चुके भाजपा नेता अमरेंद्र प्रताप सिंह को भाकपा माले प्रत्याशी क्यामुद्दीन अंसारी की चुनौती मिल रही है। माले को अपने कैडर वोट के साथ ही राजद के आधार वोट का भरोसा है। ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट से रालोसपा के प्रवीण सिंह भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। भाजपा से बगावत कर निर्दलीय हाकिम प्रसाद सहित कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। राजपूत और कुशवाहा बहुल इस क्षेत्र में अति पिछड़ा वोट निर्णायक होगा।
मुद्दा: आरा में लोग सड़क और बिजली की स्थिति से संतुष्ट तो दिख रहे लेकिन जल निकासी की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से नाराज भी हैं। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी आवश्यकता बता रहे हैं। लोग स्वास्थ सेवा से भी बहुत संतुष्ट नहीं हैं।

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