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कलाकार नाराज:भोजपुरी पेंटिंग के समर्थन में अब अधिवक्ता भी

आरा24 दिन पहले
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  • रेलवे स्टेशन पर भोजपुरी पेंटिंग को स्थापित करने के लिए 37 वें दिन भी आंदोलन जारी रहा

भोजपुरी कला संरक्षण मोर्चा के तत्वावधान में आरा रेलवे स्टेशन पर भोजपुरी पेंटिंग को स्थापित करने के लिए 37 वें दिन भी आंदोलन जारी रहा। इस आंदोलन को बिहार युवा अधिवक्ता कल्याण समिति, भोजपुर ने भी समर्थन दिया।अधिवक्ता अजित रंजन कुमार ने कहा कि भोजपुरी कला संरक्षण मोर्चा के सभी सदस्य वीर योद्धा की तरह अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इनकी मांगे पूरी होनी चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र शर्मा पुष्कर ने कहा कि रेलवे प्रशासन द्वारा भोजपुरी पेंटिंग की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। रेलवे पर किसी खास संस्कृति का नहीं, अपितु सभी संस्कृतियों का बराबर का हक है।

मंच संचालन करते सामाजिक कार्यकर्ता अनिल राज ने कहा कि सरकार द्वारा मोर्चा की मांगो पर त्वरित और सकारात्मक पहल करना चाहिए। रंगकर्मी डॉ अनिल सिंह ने कहा कि रेलवे के पदाधिकारियों के साथ तीन चरणों में हुई है। वार्ता के बाद भी सकारात्मक परिणाम नहीं आया। वरिष्ठ रंगकर्मी रवींद्र भारती ने कहा कि सब्र का फल मीठा होता है। हो सकता है कि रेलवे प्रशासन द्वारा मोर्चा के उम्मीद से ज्यादा सकारात्मक परिणाम आए। वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक मानव ने कहा कि हम सभी रेलवे के हर कदम को बहुत ही गंभीरता से देख रहे हैं। रंगकर्मी कृष्णेन्दु ने कहा कि विगत कई दशकों से भोजपुरी पेंटिंग के लिए चल रहा संघर्ष इस बार सफलता प्राप्त कर ही थमेगा। संयोजक भास्कर मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भोजपुरी पेंटिंग को सभी सरकारी भवनों पर जगह देनी चाहिए। इससे रोजगार के साथ साथ संस्कृति का बचाव भी होगा।

कोषाध्यक्ष कमलेश कुंदन ने कहा कि रेलवे प्रशासन को हमारी मांगों को स्वीकार करना चाहिए। रंगकर्मी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि अपनी संस्कृति की उपेक्षा हम कलाकार बर्दाश्त नहीं करेंगे। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए पल्लवी प्रियदर्शिनी ने कहा कि पारंपरिक लोककलाएं महिलाओं द्वारा संपादित होती हैं। भोजपुरी पेंटिंग को उसका उचित स्थान मिलने से महिलाओं की भावनाओं और क्षमता को सम्मान मिलेगा। इस अवसर पर उपसंयोजक विजय मेहता एवं कलाकार गुड़िया मौजूद थीं। इधर, जनता से संवाद कार्यक्रम में अभिनेता दिलीप कुमार के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

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