पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

ऑनलाइन आवेदन:भोजपुरी, लोकप्रशासन और दर्शनशास्त्र विषय में आवेदन के लिए खुलेगा पोर्टल

आराएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की ओर से प्रस्ताव पर हामी भरी गयी

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर सत्र, 2020-22 में भोजपुरी, लोकप्रशासन, प्राकृत-जैनिज़्म और दर्शनशास्त्र विषय में ऑनलाइन आवेदन लेने के लिए पोर्टल खोलने पर अपनी हामी भर दिया है। उपरोक्त चार विषयों में ऑनलाइन आवेदन स्नातकोत्तर में नहीं लिए जाने पर कई छात्रों ने इसका विरोध किया था। आंदोलन करने की भी चेतावनी दी थी। हालांकि विश्वविद्यालय ने पोर्टल खोलने को लेकर हामी भर दिया है कहां कि सोमवार तक पोर्टल खोल दिया जाएगा। छात्रों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि यह अपने जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि भोजपुर में ही भोजपुरी विषय को अनदेखा किया जा रहा है। स्नातकोत्तर में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं लिया जा रहा है। दिल्ली सरकार के कार्यकारिणी सदस्य रवि प्रकाश सूरज ने कहा कि भोजपुरी में उच्च शिक्षा को लेकर विवि प्रशासन गम्भीर नहीं है, सिर्फ सम्बद्ध महिला कॉलेजों में नाममात्र की स्नातक सीटें हैं। विवि को चाहिए कि लोकप्रशासन, भोजपुरी आदि विषयों के लिए अंगीभूत कॉलेजों में विभाग खुले और बहाली हो।

इस विवि के अलावा सिर्फ बीएचयू में भोजपुरी अध्ययन केंद्र है। वहा भी किसी संकाय का छात्र भोजपुरी में दाखिला ले सकता है। ऐसे में भोजपुर का ही विवि भोजपुरी को लेकर गम्भीर प्रतीत नहीं दिख रहा है। दूरदराज के छात्र विवि के निर्णय से परेशान हैं। गोरखपुर की आकृति दूबे, दिल्ली से विकास प्रसाद, नोएडा के अभिषेक प्रीतम आदि छात्र चाहते हुए भी भोजपुरी में नामांकन नहीं ले पा रहे हैं। आइसा से जुड़े छात्र रोशन कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने पिछली बार भी इसी आश्वासन पर भोजपुरी के लिए आवेदन किया पर बाद में उनका नामांकन नहीं हो पाया।

छात्र चक्कर काटने को बाध्य थे। छात्रों का यह भी कहना है कि विवि को इस सम्बंध में पारदर्शी पोर्टल बनाना चाहिए जहा सबको पहले आवेदन का मौका मिले। बाद में स्नातक विषय और अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट प्रकाशित किया जाए। मगर पोर्टल ही बन्द करना और सिर्फ आश्वासन देना बेतुका है। सिर्फ प्रतिष्ठा वाले छात्रों को ही पीजी में नामांकन देने का कोई नियम यूजीसी अथवा राजभवन द्वारा प्रकाश में नहीं आया है। भोजपुरी,

लोकप्रशासन आदि विषयों में इस विवि में स्नातक में पढ़ाई की कोई आधारभूत संरचना भी विकसित नहीं है ऐसे में इन विषयों के पीजी विभाग में सीटें खाली ही रह जाएंगी जबकि हर बार इन विषयों में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए किसी भी संकाय के छात्रों के लिए सीधे नामांकन की व्यवस्था थी। अभिषेक द्विवेदी और ओपी पांडेय ने कहा कि विवि द्वारा बार-बार भोजपुरी की पढ़ाई पर ग्रहण लगाने के प्रयास का विरोध होगा, अगर सोमवार को पोर्टल नहीं खुला तो आंदोलन तय है।

खबरें और भी हैं...