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संगोष्ठी:हिन्दी के प्रथम गद्यकार सदल मिश्र के व्यक्तित्व पर संगोष्ठी

आरा14 दिन पहले
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एस बी स्कूल में एक गोष्ठी हुआ। जिसका विषय हिन्दी के प्रथम गद्यकार सदल मिश्र पर प्रकाश डालना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपेंद्र नारायण पांडेय व मंच संचालन अधिवक्ता कृष्ण गोपाल मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि खड़ी हिन्दी को दुनिया के समक्ष लाने वाले सदल मिश्र को आज लोग भुल रहे हैं।

उनकी चर्चा बहुत कम पुस्तकों में है। यह विचारणीय है। पटना से आयी लेखिका व मुख्य अतिथि शकुंतला मिश्र ने कहा कि हमें बढ़चढ़ कर हिन्दी के साथ सदल मिश्र के नाम को भी बढ़ाना है। प्रबोध मिश्र ने इतिहास के पन्नों से निकालकर सदल मिश्र के बारे में बताया। बक्सर से आए शिक्षक धनंजय मिश्र ने सदल मिश्र के परिवार का वर्णन किया।

आयोजक चंद्र किशोर मिश्र ने बताया की पोर्ट विलियम कालेज कोलकाता में भाषा मुंशी के पद पर रहते हुए सदल मिश्र ने जार्ज गिलक्रिस्ट के कहने पर नसिकेतोपाख्यन व रामचरित लिखा। उन्होंने हिन्दी को खड़ी बोली बनाया जिसमें संस्कृत का प्रभाव काम था। श्रीभगवान पाण्डेय ने विषय परिचय में बताया की सदल मिश्र ने हिन्दी परसियन शब्दकोश भी बनाया।

इससे हिन्दी सबल हुई। सदल मिश्र के परिवार से आए मुकेश मिश्र ने कहा की वे हमारे पूर्वज हैं, पर उनपर शोध करने वाले भी दूर से कुछ भी लिख देते है। इस अवसर पर युवा कवि राजीव ने सबल मिश्र के जीवन परिचय को कविता माध्यम से प्रस्तुत किया।

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