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दो थानेदार पर विभागीय कार्रवाई का आदेश, बोले-एसपी सूचित करें:दिसंबर में आधा दर्जन से अधिक थानाध्यक्षों को भेजा गया था शो-कॉज नोटिस, चार को सशरीर उपस्थित होने का नोटिस

आरा16 दिन पहले
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सिविल कोर्ट, आरा की एडीजे 4 शैलेंद्र शर्मा की अदालत द्वारा अलग-अलग मामलों में चार थानाध्यक्षों को भोजपुर के एसपी के माध्यम से शो-कॉज जारी किया है। जिसमें पूछा गया है कि आप सशरीर उपस्थित होकर यह बताएं कि क्यों नआपके विरुद्ध विभागीय प्रोसीडिंग चलाने के लिए विभाग को लिखने के साथ ही कानूनी कार्रवाई की जाए? इसके साथ ही अदालत ने दो अन्य मामलों में उदवंतनगर के थानाध्यक्षतथा हसन बाजार के थानाध्यक्ष के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए विभाग को आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि विगत में न्यायिक कार्यों में पुलिस पदाधिकारियों की अरुचि के कारण बाधा उत्पन्न हुई।

इससे लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। न्यायालय ने दैनिक स्तर पर विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए भोजपुर जिले के कई थाना प्रभारियों को गवाह नहीं लाने अथवा न्यायालय आदेश समय पर अनुपालन नहीं करने के लिए एसपी के माध्यम से नोटिस जारी किया है। इसमें जिला के आधा दर्जन से अधिक थानाध्यक्ष के नाम शामिल हैं। इस संबंध में नए साल में भी कोर्ट की सख्ती जारी है। सेशन ट्रायल 107/2007 में गवाह के विरुद्ध गैर जमानती वारंट का निष्पादन नहीं करने पर हसनबाजार के थानाध्यक्ष को शो-कॉज किया गया है।

इसके अतिरिक्त पीरो के थानाध्यक्ष को सेशन ट्रायल 57/2016 में अभियुक्तों के विरुद्ध एनबीडब्ल्यू तथा 82 सीआरपीसी के तहत जारी नोटिस का तामिला नहीं कराया गया और न ही कार्रवाई रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त सेशन ट्रायल 276/2015 में हसनबाजार ओपी के थानाध्यक्ष तथा 174 /2015 में उदवंतनगर थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। हसनबाजार तथा उदवंतनगर के थानाध्यक्ष द्वारा पूर्व में कोर्ट के आदेश का तामिला नहीं करने एवं सशरीर उपस्थित होकर जवाब-दाखिल नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए विभागीय कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है। सभी पत्र एसपी के माध्यम से भेज दिए गए हैं तथा विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा के लिए भी एसपी के माध्यम से ही पत्र भेजा गया है।

न्यायालय के आदेश को गंभीरता से नहीं लेना पड़ गया भारी
भोजपुर के कई थानाध्यक्ष कोर्ट के आदेश के बाद सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन कुछ थानाध्यक्ष कोर्ट की सख्ती को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उदवंतनगर तथा हसन बाजार के थानाध्यक्षों को शरीर उपस्थित होकर न्यायालय में अपना कारण-पृच्छा के साथ ही कार्यवाही रिपोर्ट देना था। परंतु इनलोगों ने सशरीर उपस्थित होना मुनासिब नहीं समझा और ना कार्रवाई रिपोर्ट के बारे में न्यायालय को लिखित में अवगत करा सके। लिहाजा कोर्ट की सख्ती इन दो अधिकारियों पर हुई है। शुक्रवार का अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान विद्वान न्यायाधीश ने टिप्पणी किये, कि लोगों को न्याय दिलाने के लिए पुलिस अधिकारियों से अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। परंतु व्यवहार में ऐसा कम देखने को मिल रहा है, यह चिंता का विषय है।

कहते हैं कानूनविद, पुलिस को न्यायालय की गतिविधि से अपडेट रहने की जरुरत
सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार सिन्हा इस संबंध में कहते हैं कि पुलिस के अधिकारी काम वही करते हैं, जो उन्हें सौंपा गया है। कोई अधिकारी जान-बूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं करना चाहता और ऐसा संभव भी नहीं है। न्यायालय का आदेश प्रभावी तरीके से संपादित नहीं हो पा रहा है तो इसकी मुख्य वजह कार्यशैली है। कई नए थानेदारों को संबंधित प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर (अपर लोक अभियोजक) की जानकारी तक नहीं होती। जिनसे वह संपर्क कर न्यायालय में चल रही गतिविधियों से अपडेट रह सके।

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