मुखर्जी की 142वीं जयंती:आजादी दिलाने के लिए मर मिटे थे यतीन्द्रनाथ

आराएक महीने पहले
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आजादी के लिए लड़कर मरने वाले क्रांतिवीर यतीन्द्र नाथ मुखर्जी की 142वी जयंती लोक चेतना मंच के तत्वावधान में भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. बलिराज ठाकुर की अध्यक्षता में मनाई गई। उद्घाटन प्रो. बलिराज ठाकुर, डॉ. नंदजी दूबे, कवि जितेंद्र कुमार, प्रो. दिवाकर पांडेय, शिवदास सिंह, प्रो. अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने किया।

सम्बोधित करते हुए प्रो.ठाकुर ने कहा की आजादी की लड़ाई के महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यतीन्द्रनाथ मुखर्जी का जन्म 7 दिसंबर 1879 में बंगाल में हुआ था। अपनी बहादुरी से एक बाघ को मर देने के कारण उन्हें बाघा यतीन्द्र के नाम से भी जाना जाता था।

प्रो.ठाकुर ने आजादी की लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि वह क्रांतिकारियों के प्रमुख संगठन युगांतर पार्टी के मुख्य नेता थे। 9 सितंबर 1915 को अंग्रेजों के साथ हुई मुठभेड़ में बुरी तरह घायल हो गए थे और 10 सितंबर को अस्पताल में दम तोड़कर शहीद हो गये।डॉ. नंदजी दूबे ने कहा कि यतीन्द्रनाथ शायद देश के सबसे बलिष्ठ क्रांतिकारी थे।प्रो.दिवाकर पांडेय ने कहा कि उनका क्रांतिकारी जीवन देशभक्तों को सदा प्रेरित करता रहेगा।

शिवदास सिंह ने कहा कि वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कार्यकारी दार्शनिक क्रांतिकारी थे।डॉ.अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि जंगल के शेर से कम नहीं जितेंद्र जी नहीं थे। संबोधित करने वालों मेंडॉ. सत्यनारायण उपाध्याय, डॉ. आनंद बिहारी, डॉ. रवीन्द्रनाथ ठाकुर, सरफराज खान, शशिकांत तिवारी, वकील सिंह यादव, प्रो.हरेराम ठाकुर, सुभाष मिश्र, अतुल प्रकाश थे ।संचालन पंकज ठाकुर और धन्यवाद ज्ञापन अर्पिता राज ने किया।

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