जरा खतरे को भांपिए / कोरोना के 16 नए मरीज मिले, कुल संख्या 50; लाॅकडाउन-4 के छह दिनों में मिले 28

16 new corona patients found, totaling 50; 28 found in six days of lockdown-4
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16 new corona patients found, totaling 50; 28 found in six days of lockdown-4

  • लॉकडाउन-3 तक 56 दिनों में सिर्फ 22 मरीज

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

औरंगाबाद. जरा सावधान रहिए। क्योंकि औरंगाबाद में कोरोना विस्फोट कर चुका है। शनिवार को 16 प्रवासी कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इसके साथ ही लॉकडाउन 4 में कोरोना ने अपना अर्ध शतक पूरा कर लिया है। मरीजों की चेन 34 से सीधे 50 पर पहुंच चुकी है। इससे खतरे को आप भांप सकते हैं। लेकिन लोग अभी भी लारवाही दिखा रहे हैं। इससे कोरोना का आंकड़ा अभी और तेजी से बढ़ सकता है।

लेकिन यह पूरे समाज के लिए डरावना है। इससे न सिर्फ लोगों की जान जोखिम में है, बल्कि कारोबार, रोजगार सब बर्बाद हो रहा है। जो नए मरीज सामने आए हैं। उनमें औरंगाबाद सदर छह, मदनपुर के चार, नवीनगर, हसपुरा व बारूण के दो-दो मरीज शामिल हैं। सभी 16 मरीजों में 15 मरीज प्रवासी मजदूर बताए जा रहे हैं। जबकि एक मरीज संपर्क चेन का बताया जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने सभी 16 नए मरीजों को प्रवासी मजदूर बता रहा है। ये सभी कोरोना पॉजिटिव मरीज क्वॉरेंटाइन कैम्प में भर्ती हैं। ये राहत की बात है।
इन सभी 16 मरीजों के संपर्क चेन खंगालने में जुटा प्रशासन
जो 16 मरीज नए सामने आए हैं। उनका संपर्क चेन खंगालने में जिला प्रशासन जुट चुका है। सभी 16 मरीज क्वॉरेंटाइन कैम्प में भर्ती हैं। इसलिए इसका संपर्क चेन खंगालने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। लेकिन अब पॉजिटिव मरीजों के इमानदारी पर निर्भर करता है कि वे अपना असली ट्रैवल हिस्ट्री व संपर्क चेन के बारे में जानकारी प्रशासन को देते हैं या नहीं।

सूत्रों के अनुसार क्वाॅरेंटाइन कैम्प में भर्ती कई मरीज अपने परिजनों से मिलते हैं। घर भी जाते हैं। सोशल डिस्टेंस का भी पालन नहीं करते। उनके परिजन भी लॉकडाउन 4 के बाद कोरोना से अनजान हो चुके हैं। ऐसे में उनका संपर्क चेन खंगाल पाना प्रशासन के लिए इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि अगर वे ट्रैवल हिस्ट्री इमानदारी से बताते तो तेजी के साथ कोरोना के आंकड़ों में इजाफा नहीं होता। इनका संपर्क चेन बड़ा हाे सकता है।
लापरवाह हुए तो...लॉकडाउन-4 के छह दिनों में 28 मरीज मिले, अब खतरा बढ़ा
लॉकडाउन-4 के बाद घरों में कैद लोगों की मुश्किलों को देखते हुए और आर्थिक पहिया चलाने के लिए सरकार ने थोड़ी राहत भरी छूट दे दी। लेकिन इस छूट को जिले के लोगों ने मजाक समझ लिया। बाजार में लॉकडाउन से पहले का नजारा आम हो गया। सब्जी दुकान पर पहले जैसे भीड़। छूट वाले दुकानों पर भी पहले ही जैसी भीड़। बाइकों पर ट्रिपल लोड। कार में भी सीटिंग सवारी। कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन नहीं। पुलिस बेरकेडिंग पर भी जवान गायब। चेकपोस्ट का बेरियर भी उपर उठा दिया गया।

लिहाजा लोगों के दिलों दिमाग से कोरोना नाम का शब्द हल्का पड़ गया। लोग समझ लिए, अब कोरोना हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन कोरोना इसी लापरवाही का इंतेजार कर रहा था। प्रवासी मजदूरों का लॉकडाउन-4 में आने का सिलसिला जारी हुआ। मदद में लोग आए। कई स्वंयसेवी संगठन उनके लिए भगवान बनकर आए। आना भी चाहिए। लेकिन मददगार भगवान भी साेशल डिस्टेंस को मजाक बना दिए।
सावधान रहे तो...लॉकडाउन-3 तक 56 दिनों में महज 22 मरीज मिले
जनता कर्फ्यू पूरी तरह से जनता ने सफल बनाया। लॉकडाउन वन तक लोगों के दिलों में कोरोना का खौफ दिखा। 29 दिनों तक औरंगाबाद जिला ग्रीन जोन में शामिल रहा। माह के अंतिम दिन दो पॉजिटिव केस सामने आए थे। लॉकडाउन के दूसरे फेज में थोड़ी लापरवाही हुई। कोरोना ने औरंगाबाद में ही अपना चेन तैयार किया। लॉकडाउन-3 में थोड़ी लापरवाही के साथ सतकर्ता भी रही। लिहाजा लॉकडाउन वन से थ्री तक यानी 56 दिनों में महज 22 कोरोना पॉजिटिव केस ही सामने आए। सिस्टम से लेकर आम आदमी तक पूरा सतर्क रहा। जिसके कारण लॉकडाउन थ्री तक 22 में से 14 मरीज जल्द ही कोरोना से जंग जीतकर हेल्दी हो गई। ये राहत की बात रही। 
डीएम बोले-उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
डीएम सौरभ जोरवाल ने बताया कि लॉकडाउन-4 में राहत के लिए छूट दी गई है। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करना है। बिना काम के घर से निकलने पर कार्रवाई होगी। बाहर निकलने पर बताना होगा किस काम के लिए जा रहे हैं।
बड़ा सवाल: छूट का मतलब क्या सोशल डिस्टेसिंग से भी छूटकारा?
लॉकडाउन-4 में जिस तरीके से जनता से लेकर सिस्टम तक खुद को फ्री महसूस कर रहा है। उसी का नतीजा है कि कोरोना लॉकडाउन-4 के छह दिनों में 28 मरीजों के आंकड़ा तक पहुंच चुका है। पुलिस सुबह में गश्ती कर और शाम सात बजे दुकानों को हटवाकर लॉकडाउन-4 का पालन कराने का अपना कर्तव्य निभा रही है। अधिकारी क्वॉरेंटाइन कैम्पों का अौचक निरीक्षण और आंकड़ों काे सजाने में उलझे हुए हैं। वहीं राजनीतिक पार्टी से लेकर स्वंयसेवी संगठन तक सोशल डिस्टेंसिंग को मजाक बना दिए हैं। कोरोना के बहाने ही जिले में चुनावी रंग दिखने लगा है। क्या इसी का मतलब लॉकडाउन-4 है? क्या कोरोना के अर्धशतक लगने के बाद भी आप सोशल डिस्टेंस को यूं ही मजाक समझते रहेंगे। 

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