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भास्कर पड़ताल:सदर अस्पताल के 6 अग्निशमन सिलेंडर एक्सपायर्ड,अगर आग लगी तो कैसे बचेगी मरीजों की जान, सिस्टम बेपरवाह, लेबर रूम व चाइल्ड वार्ड में कोई व्यवस्था नहीं

औरंगाबाद13 दिन पहले
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अस्पताल में लगाया गया अग्निशमन सिलेंडर। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में लगाया गया अग्निशमन सिलेंडर।

जिले में लगातार अगलगी की घटनाएं हो रही है। जिसके मद्दे नजर डीएम ने फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट को हर सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में अग्निशमन सिलेंडर लगाने का आदेश जारी किया है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने बुधवार को औरंगाबाद सदर अस्पताल का पड़ताल किया और जाना की मरीज अगलगी में कितना महफूज हैं। जिसके बाद चौकाने वाला सच सामने आया। सदर अस्पताल में लगाए गए अग्निशमन सिलेंडर कई माह से एक्सपायर हैं। वहीं प्रसव वार्ड, चाइल्ड वार्ड व जेनेरल वार्ड में एक्स्पायरी सिलेंडर भी नहीं था। यानी अगलगी की हालत में मरीजों की जान मुश्किल में पड़ सकती है।

दमकल बचा लिया तो ठीक। वरना बचना नामुमकीन है। सदर अस्पताल में लगाए गए फायर सेफ्टी सिलेंडर 14 माह से एक्सपायर है, लेकिन सिस्टम बेपरवाह बना हुआ है। न इसकी चिंता सदर अस्पताल प्रशासन की है और न ही फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट इसकी चिंता कर रहा है। दाेनों अगलगी की घटना का इंतेजार कर रहे हैं। प्रशासन को दमकल पर भरोसा है और फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट को आग बुझाने पर।

ऐसे में मरीजों की जान उपरवाले की हाथ में है। सदर अस्पताल में लगाए गए फायर सेफ्टी सिलेंडर को 31 मई 2019 को रिफिल किया गया। इसका एक्सपायरी 30 मई 2020 को ही था। जबकि 2021 में मई बीत चुका है। करीब 14 माह एक्सपायर हुए हो गया। फिर भी इसपर नजर किसी को नहीं पड़ी। जबकि सदर अस्पताल में सैकड़ों मरीजों का हर रोज इलाज कराने आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सबसे बड़े अधिकारी सिविल सर्जन का भी सदर अस्पताल स्थित कैंपस में ही ऑफिस है।

बड़ा सवाल : क्या आग लगने का इंतजार करता है अग्निशमन विभाग?
शहर के नगर थाना में स्थित अग्निशमन विभाग का कार्यालय है। आग लगने पर अग्निशमन विभाग के अधिकारी व कर्मी तुरंत दमकल लेकर मौके पर पहुंचते हैं और आग पर काबू पाते हैं, लेकिन इसी विभाग को हर सरकारी, प्राइवेट संस्थानों में फायर सेफ्टी चेक करना और उन्हें एनओसी देना काम है। प्राइवेट संस्थानों की छोड़ दे सरकारी विभाग में भी अग्निशमन विभाग के अधिकारी इसका निरीक्षण नहीं करते।

इसका जीता जागता प्रमाण सदर अस्पताल है। हाल ही में कारगिल चौक के पास एक बड़े मार्केट में आग लगी थी। उक्त दुकान में फायर सेफ्टी सिलेंडर नहीं थी। सूत्रों की माने तो मकान मालिक की मदद से फायर सेफ्टी सिलेंडर बाहर से तत्काल लाया गया था, लेकिन तबतक काफी देर हो चुकी थी। पूरा दुकान जलकर राख हो गया था। कुछ दिन पहले इंडियन बैंक में आग लगी, लेकिन वहां ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। कुछ साल पहले अंदर

बाजार में एक बड़े दुकान के गोदाम में आग लगी थी। वहां भी फायर सेफ्टी सिलेंडर नहीं था। फिर सवाल उठता है कि अग्निशमन विभाग क्या करता है? क्या अधिकारी निरीक्षण नहीं करते। क्या आग लगने का इंतेजार करते हैं कि दमकल से बुझा लेंगे। जबकि जिलाधिकारी दो दिन पहले हीं फायर सेफ्टी हर संस्थान में लगाने का आदेश कर चुके हैं।

31 मई 2019 को हुई थी सिलेंडर रिफिलिंग, 14 माह से एक्सपायर्ड

जिले में लगातार हो रहीं अगलगी की घटनाएं, फिर भी फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट नहीं कर रहा अस्पताल का निरीक्षण

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