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  • 87 year old U Nyaninda Of Myanmar, The Senior Buddhist Monk Of Bodh Gaya, Was The Chief Religious Leader Of The Burmese Monastery, Was Associated With Many Institutions

वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु का निधन:बोधगया के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु म्यांमार के 87 वर्षीय यू न्यानिंदा नहीं रहे, बर्मीज विहार के थे चीफ धर्मगुरु, कई संस्थाओं से थे जुड़े हुए

बोधगया17 दिन पहले
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बोधगया बर्मीज विहार व बोधगया के वरिष्ठतम बौद्ध भिक्षु म्यांमार के 87 वर्षीय यू न्यानिंदा महाथेर नहीं रहें। गुरुवार को म्यांमार के बोधगया म्यांमार मंदिर यंगून में उनका निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। पिछले लाॅक डाउन के दौरान वे म्यांमार चले गए थे। वे बर्मीज विहार के चीफ पुजारी व धर्मगुरु थे और इंटरनेशनल त्रिपिटक चैटिंग कौंसिल के अध्यक्ष भी थे। वे इससे पहले इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कौंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

वर्तमान बर्मीज़ मोनास्ट्री का निर्माण 1938 में किया गया था व यह बोधगया का सबसे पुराना बौद्ध मठ है। यू न्यांनिंदा का जन्म 1934 में म्यांमार में हुआ था। 1952 में श्रामणेर बने व 1956 में बौद्ध भिक्षु के रूप में दीक्षा मिली। उसी साल वे नौ बौद्ध भिक्षुओं के दल के साथ पहली बार बोधगया आए और बाद में अपना पूरा जीवन बौद्ध धर्म के लिए समर्पित कर दिया।

वे 1976 से लगातार बोधगया में रह रहें थे। उनके निधन पर महाबोधि मंदिर परिसर में विशेष पूजा हुई व दीप जलाए गए। उनके निधन पर बीटीएमसी के सचिव नांजे दोरजे व डॉ मनोज सहित अन्य बौद्ध भिक्षुओं ने शोक प्रकट किया है।

महाबोधि सोसायटी ने किया शोक प्रकट
महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव पी सीवली थेर ने यू न्यानिंदा महाथेर के निधन पर शोक प्रकट किया है। उनके निधन को बोधगया के अलावा बौद्ध जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उनके द्वारा जीवनपर्यंत देश-विदेश में बौद्ध धर्म के प्रसार-प्रचार के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा। उनके निधन पर डॉ कैलाश प्रसाद सहित अन्य ने शोक प्रकट किया है।

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