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हादसे का डर:अक्सर हो रहे हादसे, पर नहीं हटाए जा रहे सड़क के बीच खड़े बिजली के खंबे

डेहरी सदर20 दिन पहले
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  • सड़कों के चौड़ीकरण के बाद बिजली के जो खंबे व ट्रांसफार्मर किनारे थे वे बीच में आ गए

अभी पिछले ही दिन सड़क से गुजर रही एक वृद्ध महिला पर बिजली का पोल गिर पड़ा और उनकी मौत हो गई। शहर में यह कोई पहली घटना नहीं है। ऐसे हादसे होते रहते हैं जिसमें या तो गंभीर रूप से लोग जख्मी होते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है। घटनाएं सिर्फ उन्हीं को याद रहती है जिनके परिवार पीड़ित होते हैं बाकी शहर कुछ हंगामे के बाद शांत हो जाता है।

शहर के कई ऐसे इलाके हैं जहां सड़क पर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर गड़े हुए हैं और आए दिन नए-नए हादसों को जन्म देते रहते हैं। सिर्फ खंभे ही नहीं बिजली के नंगे तार आपस में टकरा कर रंग बिरंगी आसमानी चिंगारी बिखरती रहती हैं और लोग भयभीत होकर इधर उधर भाग खड़े होते हैं। पिछले कई वर्षों में समस्याओं से अवगत अधिकारी बदलते रहे साथ ही विधायक भी बदले जिन्होंने लोगों के कष्ट दूर करने की कसमें खाए थे। पिछले हादसे में मातमपुर्सी को एक पूर्व और वर्तमान विधायक दोनों एक साथ न्याय दिलाने को दिखे तो कोई आश्चर्य नहीं हुआ। क्योंकि समस्याएं तो पब्लिक की हैं और राजनीति अपनी अपनी जगह।

विरोध करने पर कर दिया जाता है मुकदमा

कुछ वर्ष पहले शहर के दो पूर्व विधायकों ने डेहरी बाजार में सड़क पर बिजली पोल गाड़े जाने का विरोध किया। उस वक्त विद्युत तारों की केबलिंग हो रही थी। पूर्व विधायकों के विरोध के बाद विद्युत विभाग के अधिकारी ने एक महिला और एक पुरुष दो पूर्व विधायकों पर जमीन में गड़े 400 किलो के सीमेंटेड बिजली पोल को उखाड़ फेंकने और सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा जड़ दिया।

तब पूर्व विधायक ने तत्कालीन कनीय अभियंता, सहायक अभियंता और कार्यपालक अभियंता के समक्ष अजीबोगरीब प्रस्ताव रखा कि अगर तीनों मिलकर खंबे उठा लें तो एक लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। दोनों ओर से मुकदमे दर्ज हुए। कार्यपालक अभियंता ने विद्युत विभाग पर एनओसी नहीं लेने का आरोप लगाते कार्य से ही अनभिज्ञता जाहिर कर दी।

विभागों के बीच है तालमेल का अभाव
शहर के विकास कार्य में विभागों के बीच आपसी तालमेल नहीं होने के कारण लोग समस्याएं झेल रहे हैं। सड़क चौड़ी हुई लेकिन बिजली के पोल ट्रांसफार्मर, टेलीफोन के खंभे, विस्तार के बाद सड़क के बीच में आ गए वन विभाग के पेड़ जस के तस हैं। उसे हटवाने के प्रति और नागरिकों की सुविधा बहाली ढंग से हो सके इसके लिए नगर परिषद ने भी ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी रात को होती है जब यह खंबे दिखाई नहीं पड़ते और अचानक सामने खंबा देख ब्रेक नहीं लगती है। कहते हैं बिजली विभाग से स्टीमेट मिलने के बाद आने वाले खर्च को संबंधित द्वारा जमा किया जाता है। यह कितना आगे पहुंचा किसी को नहीं पता। सड़क विभाग यह कहते रहा है कि बिजली पोल गाड़ने से पहले एनओसी लिया गया है कि नहीं।

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