तैयारी / हीट स्ट्रोक को ठंडा करेगा प्रशासन, मरीजों के लिए बर्फ से लेकर एसी तक की सुविधा

Administration to cool heat stroke, facilities for patients from ice to AC
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Administration to cool heat stroke, facilities for patients from ice to AC

  • सदर अस्पताल में मरम्मत कराई जा रही है एसी, एंबुलेंस में भी रहेगी ये सुविधा, अधिकारियों को दिए कई निर्देश
  • पिछले साल हीट स्ट्रोक में 50 से ज्यादा लोगों की गई थी जान, इस बार प्रशासन सतर्क

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 05:00 AM IST

औरंगाबाद. हीट स्ट्रोक के वार से निपटने की तैयारी जिला प्रशासन ने पहले ही कर दिया है। हीट स्ट्रोक की स्थिति में मरीजों के पास 15 मिनट के भीतर बर्फ की सिल्ली सदर अस्पताल से लेकर किसी भी सरकारी अस्पताल में जाएगा। वहीं सदर अस्पताल में लगाए गए सभी एसी को दुरुस्त कराया जा रहा है। ताकि पिछले साल जैसी हालात में आसानी से निपटा जा सके और किसी भी मरीजों को परेशानी न हो।

गुरुवार को समाहारणालय में तैयारियों को लेकर डीएम सौरभ जोरवाल ने एक प्रेस वार्ता किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल जैसे हालात इस बार नहीं रहेंगे। इस बार तापमान मीडियम हीट वेब के रूप में रहेगा। लेकिन जलस्तर सामान्य होगा। लेकिन पिछले साल के रिकॉर्ड को देखते हुए हीट स्ट्रोक से निपटने की सारी तैयारी पूरी की जा रही है। ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। प्रेस वार्ता में डीडीसी अंशुल कुमार, अपर समाहार्ता फतेह फेयाज सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 
एसी सुविधा से लैस रहेगा एंबुलेंस
हीट स्ट्रोक की आपात स्थिति में मरीजों को लाने ले जाने के लिए एसी सुविधा से लैस एंबुलेंस की व्यवस्था रहेगी। इसकी तैयारी को लेकर सिविल सर्जन मो. अकरम अली व डीपीएम डॉ. कुमार मनोज को डीएम ने निर्देश दिया है। इसके साथ-साथ हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए सभी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि इस साल हीट स्ट्रोक जैसी समस्या आने की अनुमान बहुत कम है।

लेकिन फिर भी जिला प्रशासन इसकी पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम गठन करने का भी निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन के स्तर पर सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को हीट स्ट्रोक के ट्रिटमेंट व प्रोटोकॉल के बारे में बताया गया है। साथ ही निर्देशित किया गया है कि निर्धारित स्टैंडर्डड ऑपरेटिंग प्रोसिजर का प्रशिक्षण संस्थान में कार्यरत चिकित्सकों व कर्मियों को दिलाना सुनिश्चित किया जाए।

ये हैं लू के लक्षण, आने पर तत्काल अस्पताल पहुंचे
सूबे के कुछ जिलों में गर्मी के मौसम में अत्यधिक गर्मी पड़ने के कारण कुछ दिनों के लिए हीट वेब की चपेट में आ जाते हैं। जिसके कारण लू लगने से कुछ लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है। इससे बचा जा सकता है। लेकिन लू लगने के लक्षणों को पहचानने व उसके तत्काल उपचार की जाए। लेकिन इसमें देर होने पर बचाना मुश्किल हो जाता है। लू के लक्षण निम्नवत हैं।

  • गर्मी में 105 डिग्री से ज्यादा बुखार आना
  • मानसिक अवस्था में परिवर्तन होना
  • अधिक सिरदर्द, चक्कर आना
  • उल्टी व दस्त की शिकायत होना
  • मांसपेशियों में दर्द, शरीर में ऐंठन
  • कमजोरी महसूस करना, पेशाब की मात्रा में कमी होना
  • शरीर का पसीना नहीं निकलना, दिल को तेज धड़कना, हल्का सांस का चलना

लू के प्राथमिक उपचार ये, सतर्क रहे तो बच जाएगी जान
लू से बचा जा सकता है। लेकिन समय पर इसका प्राथमिक उपचार हो। इसके बाद तत्काल मरीज को किसी डॉक्टर के पास ले जाया जा सके। ऐसा करने पर मरीज को हीट स्ट्रोक व लू से बचाया जा सकता है। इसमें जरा सा लापरवाही होने पर मरीज को बचना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि हीट स्ट्रोक में शरीर में ग्लूकोज की मात्रा काफी कम हो जाता है। वहीं ब्रेन हैमरेज या फिर हार्ड अटैक की चांसेस होती है। हीट स्ट्रोक के शिकार हाेने पर या लू लगने पर प्राथमिक उपचार निम्नवत हैं। 

  • हीट स्ट्रोक के शिकार होने या लू लगने पर मरीज को यथाशीघ्र छायादार स्थान पर ले जाएं
  • मरीज का सभी कपड़ा हटा दिया जाए और उसे पीठ के बल लिटा दिया जाए
  • बिछावन को पैर के तरफ से उंचा रखा जाए
  • ठंडे पानी या संभव हो तो बर्फ से पूरे शरीर को पोछा जाए
  • ध्यान रखा जाए कि शरीर का तापमान 105 डिग्री से उपर न जाए, इसलिए बुखार मापे
  • ठंडा पानी अथवा ओआरएस का घोल मरीज को पिलाया जाए
  • अगर संभव हो तो मरीज को वातानुकूलित यानी एसी कमरा में रखा जाए
  • उपरोक्त उपचार के पश्चात मरीज के स्थिति में सुधार होने पर अविलंब मरीज को इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर के पास पहुंचाया जाए
  • मरीज को ऐसे संस्थान में भेजा जाए जहां सभी तरह के जांच की सुविधा उपलब्ध हो

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