'ध्यान' फाउंडेशन ध्यान दो, आपकी गौशाला बन गई है कब्रगाह:देवकुंड गौशाला में बीमार होकर प्रतिदिन मर रहे 3-4 जानवर, आधा पेट खाकर कीचड़ में पड़े रहते हैं बेजुबान

गोह/औरंगाबाद5 महीने पहले
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औरंगाबाद की देवकुंड गौशाला में कीचड़ में पड़े जानवर और बीमारी से मरे पड़े मवेशी। - Dainik Bhaskar
औरंगाबाद की देवकुंड गौशाला में कीचड़ में पड़े जानवर और बीमारी से मरे पड़े मवेशी।

देवकुंड बाबा दुधेश्वरनाथ की नगरी में ध्यान फाउंडेशन की ओर से संचालित गौशाला में बेजुबानों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। यह गौशाला छुट्टा जानवरों की कब्रगाह बन कर रह गई है। गौशाला में शासन के तमाम प्रयासों के बावजूद उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंभीर बीमारी से ग्रस्तज होकर हर रोज जानवर मर रहे हैं।

अब तक हजारों बुजाबान हो चुके हैं यहां दफन

औरंगाबाद जिले की यह सबसे बड़ी गौशाला है। इसके निर्माण पर लाखों रुपए का खर्च किया गया है। हर दिन रख-रखाव के लिए हजारों रुपए का खर्च आता है। फिर भी यहां जानवरों को सूखे भूसे के अलावा कुछ भी नहीं दिया जाता है। जानवरों के खाने का भूसा गौशाला के बाहर सड़क किनारे खुले में कूड़े के ढेर की तरह पड़ा हुआ है। गौशाला में जानवरों को रखने के लिए बनाया गया टीन शेड आधा अधूरा पड़ा हुआ है, जबकि आज भी सैकड़ों जानवर खुले आसमान के नीचे रहने को बाध्य हैं। गौशाला में जमीन पर ईटों का खड़ंजा भी जहां-तहां लगाया गया है, जिससे जगह-जगह जल भराव के चलते कीचड़ और गंदगी फैली हुई है। गौशाला सह ऐतिहासिक मेला क्षेत्र में अब तक हजारों जानवरों को JCB से गढ्ढा खोदकर दफन किया जा चुका है।

हर रोज इसी तरह गड्‌ढा खोदकर दफन कर दिया जाता है जानवरों को।
हर रोज इसी तरह गड्‌ढा खोदकर दफन कर दिया जाता है जानवरों को।

क्रूरता छिपाने के लिए बता देते हैं नेचुरल डेथ

गौशाला निर्माण को लेकर प्रारंभ से ही काफी भ्रष्टाचार की शिकायतें ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। फिर भी वहां व्यवस्था में किसी प्रकार का सुधार दिखाई नहीं पड़ता है। गौशाला में लाइट की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। रात के अंधेरे में जानवर आपस में लड़कर गड्ढे में गिर जाते हैं और गंभीर रूप से घायल भी हो जाते हैं। शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद गौशाला संरक्षकों द्वारा उचित प्रबंधन नहीं किए जाने के कारण यहां एकत्रित जानवर प्रतिदिन बीमार होकर मरते रहते हैं। वहीं जिम्मेदार अधिकारी जानवरों की मौत को नेचुरल डेथ बताकर मामले की लीपापोती करने में जुटे रहते हैं।

इस तरह कीचड़ में पड़े रहते हैं बेजुबान।
इस तरह कीचड़ में पड़े रहते हैं बेजुबान।

तीन साल पहले देवकुंड महंत ने की थी पहल

देवकुंड महंत कन्हैयानंदपुरी ने तीन साल पहले देव व बारूण में गौशाला पर हुए हमले से द्रवित होकर यहां गौशाला में जानवरों को रहने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन कौन जानता था कि गौशाला में बेजुबानों की ऐसी दुर्गति होने वाली है। विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता व समाजसेवी संस्थाओं द्वारा इस मुद्दे को जिला पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी व स्थानीय CO के संज्ञान में दिया गया।

दो दिन पहले गोह CO मुकेश कुमार ने देवकुंड स्थित गौशाला की जांच की। उन्होंने गौशाला की व्यवस्था व जानवरों के रखरखाव में अनियमितता को देखते हुए अपनी जांच रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी है। गुरुवार को स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर राजद विधायक भीम कुमार देवकुंड गौशाला की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गौवंश पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। व्यवस्था में सुधार करना होगा।

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