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ऑनलाइन मीटिंग:अधिक उर्वरकों के प्रयोग से कम हो रही खेतों की उर्वरा शक्ति

औरंगाबाद शहरएक महीने पहले
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  • कृषि वैज्ञानिकों ने जूम एप के माध्यम से किसानों को दी रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र सिरीस के कृषि वैज्ञानिकों ने जूम एप के तहत ऑनलाइन मीटिंग कर किसानों को खेतों में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से बारे में जानकारी दिया। प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ नित्यानंद ने बताया कि वर्तमान समय में किसान बेहिचक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहें हैं। जिससे उत्पादन के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है।उन्होंने कहा कि किसान अपने खेत की मिट्टी का अवश्य जांच करायें।इससे पोषक तत्व के बारे में जानकारी मिल जाती है और मृदा के स्वास्थ्य के अनुरूप उर्वरक प्रयोग करने में सहुलियत होती है।

उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक के प्रयोग करने से कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिलता है। वहीं खेत की उर्वरा शक्ति बरकरार रहता है।मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने रासायनिक उर्वरक के असंतुलित प्रयोग से होने वाले हानि के बारे में किसानों को जानकारी दी।उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार सही समय पर उर्वरक का प्रयोग करने से फसल को भरपूर लाभ मिलता है।

संकर धान व अधिक उत्पादन देने वाले प्रजाति के लिए रोपाई के समय डीएपी 130 किलोग्राम, यूरिया 80 किलोग्राम तथा पोटाश 67 किलोग्राम या एनपीके 12:32:16 डालना चाहिए।इसके बाद 66 किलोग्राम यूरिया बालियां निकलते समय एवं 66 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर गाभा में बाली बनते समय प्रयोग करना जरूरी है।वहीं ऊपरी जमीन पर अगात प्रजाति एवं सुगंधित बौनी प्रजातियों के लिए रोपाई के समय डीएपी 88 किलोग्राम, यूरिया 53 किलोग्राम तथा पोटाश 33 किलोग्राम या एनपीके 12:32:16 डालना चाहिए।

जैविक खादों के प्रयोग से बढ़ती है मिट्टी की उर्वरा शक्ति
शस्य वैज्ञानिक पंकज कुमार सिंहा ने जैविक खाद के उपयोग के बारे में जानकारी दी।उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता की फसल विकसित करने के लिए जैविक खाद जरूरी है।उन्होंने बताया कि जैविक खाद दलहन फसल के लिए राइजोबियम 400 से 600 ग्राम और पीएसबी एक से दो किलोग्राम तथा धान, गेंहु, मक्का, ज्वार, बाजरा के लिए एजोटोबैक्टर एक से दो किलोग्राम और पीएसबी दो से तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयोग किये जाने

का सुझाव दिया। उन्होंने उपचारित बीजों का प्रयोग करने एवं इनसे होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दिया। उन्होंने कहा कि अपने खेतों में हरी खाद, जैविक खाद, कार्बनिक खाद का अपने खेतों प्रयोग करके किसान फसल उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकते है।उन्होंने बताया कि मिट्टी की उर्वराशक्ति में वृद्धि एवं मृदा के स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों के जगह पर हरी खाद का प्रयोग करना जरूरी है।

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