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पर्व-त्योहार:संस्कृति और परंपरा का लोक पर्व में भाइयों की दीर्घायु होने की कामना को लेकर बहना करेंगी उपवास

औरंगाबाद6 दिन पहले
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प्रतिकात्मक तस्वीर । - Dainik Bhaskar
प्रतिकात्मक तस्वीर ।
  • 17 को मनेगा भाई-बहन के प्रेम व समर्पण का पर्व करमा

संस्कृति और परंपरा का लोक पर्व कर्मा-धर्मा का पर्व 17 सितंबर यानि शुक्रवार को मनाया जाएगा। बहनें अपनी भाई की सुख समृद्धि की कामना व दीर्घायू को लेकर उपवास रखते हुए पूजा अर्चना करेंगी। यह त्यौहार हर वर्ष भाद्र मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है।

जो इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा के दिन 17 सितंबर को पड़ रहा है। बताया जाता है कि भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए बहने अपने घर के बाहर तालाब बनाती हैं। उसे अच्छी तरह फल-फूल से प्राकृतिक सौंदर्य देने के लिए सजती हैं। इसके उपरांत संध्या में नए नए परिधानों में सज धज कर देवाधिदेव महादेव माता पार्वती और प्रथम पूजनीय सिद्धिविनायक की पूजा अर्चना करती हैं।

इसके बाद तालाब के चारों ओर घूम घूम कर कर्मा धर्मा का गीत गाती हैं। इस लोक पर्व का इंतजार लोग वर्ष भर करते हैं और काफी उत्साह के साथ संस्कृति की इस लोक परंपरा का निर्वहन करते हैं।

करमा को प्रकृति का भी त्योहार कहा जाता है
पावन मौके पर व्रतियों को कर्मा धर्मा की कथा भी सुनाई जाती है। इस लोक पर्व में कुमारी कन्या व महिलाएं और बच्चे भी उत्साह पूर्वक भाग लेते हैं। इस त्योहार को प्रकृति पर्व भी कहा जाता है। लोग इस पर्व के माध्यम से अच्छी पैदावार की भी कामना करते हैं। इस त्योहार में भाई भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और बहनों की सुरक्षा के प्रति अपना समर्पण भी प्रदर्शित करते हैं। पूजा स्थल पर बने तालाब को भाई अपने बहन का हाथ पकड़ कर उसे पार कराने की भी परंपरा है।

पर्व को लेकर गांव में उत्साह चरम पर
पारंपरिक लोक पर्व करमा धरमा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह चरम पर है। इस त्यौहार को पूरे उत्साह के साथ और पारंपरिक तरीके से मनाने को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है।संध्या में व्रती यह त्यौहार विधि विधान के साथ काफी उत्साह से मनाती है।

देर रात तक नृत्य संगीत का भी आयोजन होता है। बड़े बूढ़े और बच्चों की सहभागिता से काफी मनोरंजक और आनंददायक हो जाता है। बताया जाता है कि पर्व का उपवास रात में बनाए गए चावल, साग, सब्जी व दही खाकर किया जाता है।

जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त
घर के आंगन में जहां साफ-सफाई कर वहां विधिपूर्वक करम डाली को गाड़ा जाता है। बहनें सजा हुआ टोकरी या थाली लेकर पूजा करने हेतु आंगन या अखड़ा में चारों तरफ करम राजा की पूजा करने बैठ जाती हैं। करम राजा से प्रार्थना करती है कि हे करम राजा! मेरे भाई को सुख समृद्धि देना। उसको कभी भी गलत रास्ते में नहीं जाने देना। यहां पर बहन निर्मल विचार और त्याग की भावना को उजागर करती है।

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