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जैसी करनी, वैसी भरनी:विधवा बहू व उसकी बेटी की हत्या के 5 दोषियों को आजीवन कारावास

औरंगाबाद3 महीने पहले
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  • मृतका की बड़ी बेटी बोली- मुझे न्यायायल पर था पूरा भरोसा

महज देढ़ लाख की संपत्ति हड़पने के लिए विधवा बहू और उसकी नाबालिग बेटी को धारदार हथियार से काटकर हत्या करने वाले सास-ससुर समेत पांच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। शनिवार को शहर के सिविल कोर्ट में एडीजे-12 दिनेश कुमार प्रधान के अदालत में यह सजा सुनाई गई।

सोमवार को सभी पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। जबकि एक अन्य आरोपी जय कुमार साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया था। जिन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, उनमें कामेश्वर सिंह, उसके पुत्र ब्रजेश कुमार सिंह, अनुज कुमार सिंह, दो बहू बेबी देवी व सरमिता देवी शामिल है।

अभियोजन पक्ष से सरकारी वकील नरेश प्रसाद पीड़ित पक्ष की ओर से वरीष्ट्र अधिवक्ता कुमार योगेंद्र नारायण सिंह और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भानु प्रसाद सिंह और योगेंद्र प्रसाद योगी ने अपनी-अपनी दलीलें रखी। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपियों को कम से कम सजा दी जाए। वहीं पीड़िता पक्ष के वकील कुमार योगेंद्र सिंह ने अदालत से कहा कि दोषियों ने निर्मम तरीके से मां-बेटी की हत्या की थी। इन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

रोते हुए दोषी बेबी ससुर से बोली- रख लीजिए बेइमानी का धन
एडीजे-12 दिनेश कुमार प्रधान जैसे ही दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई, वैसे ही आरोपी रोने लगे। फफकर दोषी गोतनी बेबी ससुर कामेश्वर सिंह पर भड़क गई। वकिलों से भरे कोर्ट में चिल्ला-चिल्लाकर रोते हुए ससुर को बोली बेइमानी का धन अब रख लीजिए। धन का भूख था। जिसकी सजा आज पूरा परिवार भुगत रहा है। उसकी एक और गोतनी सरमिता मुंह में साड़ी डालकर रोते-रोते बेहाल थी।

दोनों के पतियों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। कभी व जज को देख रहे थे तो कभी वकीलों को। कभी जमीन को देख रहे तो कभी कार्ट के छत को निहार रहे थे। उनके आंखें भरी हुई थी। इधर कोर्ट में उनके परिवार के अन्य लोगों और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें लग रहा था कि अब मेरा पूरा परिवार उजड़ गया। बच्चों की रूलाई से अन्य लोगों की आंखें भी भर आई, लेकिन दोषियों का अपराध इतना जघन्य था कि लोग यही बोले कि बुरा का अंत बुरा ही होता है।
संपत्ति के लिए की हत्या, मृतिका की बेटी खुशबू बोली-ये अपने नहीं मां के कातिल
मृतका संगीता कुंवर की बड़ी बेटी खुशबू कुमारी सजा सुनने के बाद काफी खुश हुई। जबकि हत्यारों में कोई पराया नहीं था। जिन्हें सजा दिलाने में वह कोई कसर नहीं छोड़ी। खुशबू पेशे से आईटी इंजीनियर है। फिलहाल चेन्नई में एक बड़ी कंपनी में कार्यरत है। दोषियों में उसके दादा, दो चाच और दो चाची शामिल है।

चाचा ब्रजेश सिंह और चाची बेबी देवी रिश्ते में उसके अपने मौसा-मौसी हैं, लेकिन खुशबू ने उन्हें सजा दिलाने में जीजान से लगी रही। उसने दैनिक भास्कर को बताया कि ये दोषी उसके परिवार नहीं हो सकते। ये उसके मां और बहन के कातिल हैं। अगर परिवार होते महज डेढ़ लाख रुपए के लिए मेरी मां और बहन की हत्या नहीं करते।

जानिए क्या था मामला, विधवा और उसकी बेटी को क्यों मारे थे दोषी?

20 जुलाई 2012 की रात आठ बजे नवीनगर थाना के रजबरिया कला गांव में 40 वर्षीय संगीता कुंवर और 14 वर्षीय उसकी बेटी प्रिया की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या महज देढ़ लाख रुपए की जमीन और संपत्ति हड़पने के लिए कर दी गई थी। संगीता के पति का निधन 2001 में ही हुई थी।

बड़ी बेटी खुशबू पटना में अभ्यानंद सुपर-30 में इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही थी। बेटी के पढ़ाई के खर्च जुटाने के लिए वह अपने हिस्से के जमीन या देढ़ लाख रुपए मांग रही थी। जिसे उसके ससुर कामेश्वर सिंह, उनका बेटा ब्रजेश सिंह, अनुज सिंह और दोनों की पत्नियां विरोध की और उसके साथ मारपीट की। उसके बाद कुदाल से काटकर मार डाला था।

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