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ग्राउंड रिपोर्ट कुटुम्बा:कुटुम्बा में बड़ी समस्या सिंचाई और लड़के-लड़कियों की पढ़ाई का, विधानसभा का अधिकांश इलाका सूखाग्रस्त

औरंगाबाद2 महीने पहले
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  • 2010 के परिसीमन में यह बना सुरक्षित सीट, राजद के सुरेश पासवान काे हराकर जदयू के ललन राम बने थे पहले विधायक

कुटुम्बा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में रोचक मुकाबला है। यहां के विधायक राजेश कुमार को अपने विकास पर भरोसा है। हम प्रत्याशी श्रवण भुईंया काे लोगाें के सामने झूंककर आर्शीवाद लेने में। निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व विधायक ललन राम इस बार जदयू छोड़कर बागी होकर मैदान में उतरे हैं। ललन भी प्रणाम करने में और घर-घर जाकर आर्शीवाद लेने में माहिर माने जाते हैं।

लिहाजा यहां लड़ाई राेचक होगा। कुटुम्बा विधानसभा में कुल वोटर दो लाख 66 हजार 382 हैं। जिसमें पुरुष वोटर एक लाख 42 हजार 740 हैं। जबकि महिला वोटर एक लाख 23 हजार 636 हैं। जबकि 6 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। इस सीट पर राजपुत, रविदास और कुशवाहा वोटर अहम हैं। जिसके तरफ इनका झुकाव होता है। उसका रास्ता आसान हो जाता है।

लिहाजा किसी भी पार्टी का उम्मीदवार हो, इन वोटरों को लुभाने की हर कोशिश करते हैं। राजेश कुमार इस बार अपने पांच साल के किए विकास कार्य को अपने मतदाता के सामने बताकर वोट मांग रहे हैं तो एनडीए के हम प्रत्याशी श्रवण भुईंया सभी के सामने झुंककर बेटा श्रवण बनने की कोशिश कर रहे हैं।

इस विधानसभा के पहले विधायक रहे जदयू से बागी हुए ललन राम काे भी घर-घर जाकर प्रणाम करने और विश्वास हासिल करने पर पूरा भरोसा है और इसमें वे माहिर खिलाड़ी भी हैं। इसीलिए 2020 के महाभारत यहां रोचक होने वाला है।
यह विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
2010 के परिसीमन में देव विधानसभा से कटकर कुटुम्बा अलग विधानसभा बना था। यह विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2010 में इस सीट पर राजद से पूर्व पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश पासवान और जदयू से ललन राम उम्मीदवार बने थे। इस दंगल में सुरेश को पराजित कर ललन राम कुटुम्बा के पहले विधायक बनने का गौरव हासिल किया था।

इसके बाद यह सीट 2015 में महागठबंधन में शामिल जदयू को अपना सीट छोड़ना पड़ा था और यह कांग्रेस के खाते में चला गया था। इधर एनडीए ने हम प्रमुख जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन को उतारा था। इस लड़ाई में संतोष को हार का मुंह देखना पड़ा था। जबकि राजेश विजयी हुए थे, लेकिन इस बार हम और कांग्रेस में सीधी टक्कर होने वाली है।

वहीं निर्दलीय पूर्व विधायक ललन मुकाबले को रोचक बनाने में लगे हुए हैं। राजेश को अपने मास वोटरों पर अटूट भरोसा है। इसके साथ ही स्वर्ण वोटरों को भी साधने में जुटे हुए हैं। इधर हम प्रत्याशी श्रवण को भी एनडीए के मास वोटरों पर अटूट भरोसा है।

वहीं लोगों के सामने झुंककर बेटा श्रवण बनने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ताकि ललन जैसा जीत हासिल करने में सफल हो सकें। वहीं पूर्व विधायक ललन राम इन दोनों के मास वोटरों में घुंसकर अपने पुराने कार्यकाल को याद दिला रहे हैं। ललन को दोनों के कैडर वोटरों में सेंधमारी पर पूरा भरोसा है। इसीलिए तीनाें उम्मीदवार पूरे उत्साह में हैं। इसलिए यहां मुकाबला रोचक होगा।

कुटुम्बा में सिंचाई और पढ़ाई सबसे बड़ी समस्या, कब होगा हल?
कुटुम्बा विधानसभा में बड़ी समस्या सिंचाई और लड़कों-लड़कियों की पढ़ाई की है। पूरे विधानसभा के अधिकांश हिस्सा सुखा क्षेत्र है। अच्छी बारिश होने पर किसान के चेहरे खिलते हैं, वरना कलेजे पर हाथ रखकर अफसोस करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं। वहीं कुटुम्बा विधानसभा क्षेत्र में लड़कों व लड़कियों के लिए कोई सरकारी कॉलेज नहीं है।

अंबा में स्थित दो वित रहित कॉलेजों के रहमाें करम पर पूरे विधानसभा क्षेत्र के लड़के व लड़कियां आश्रित हैं। इसी कॉलेज में लड़कियां इंटर से लेकर डिग्री तक हासिल करती हैं, लेकिन उन्हें सरकारी कॉलेज में पढ़ने का मन हो तो उन्हें सीधे औरंगाबाद रूख करना पड़ता है। जो लड़कियों के लिए नामुमकीन तो नहीं, लेकिन मुश्किल भरा है, लेकिन सुदुरवर्ती गांवों के लड़कियों के लिए आसान नहीं।

कई लड़कियां 30 से 40 किलोमीटर दूरी से औरंगाबाद सिन्हा कॉलेज व किशोरी सिन्हा महिला कॉलेज में पढ़ने आती हैं। सुबह घर से निकलती हैं और रात में निकलती हैं। इस दौरान माता और पिता के दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। सिमरा गांव के उपेन्द्र सिंह बताते हैं कि अगर घर की बेटियां पढ़ने के लिए निकलती हैं और फिर समय से नहीं लौटती तो जमाने के अनुसार दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं।

अगर अंबा में ही सरकारी कॉलेज होता तो ये समस्या से निजात मिल जाता। ये सिर्फ एक बानगी है। ऐसा ही राय कई गांवों के लोगों का है। आरती गांव के मोहन सिंह व संतोष सिंह बताते हैं कि सिंचाई भी प्रमुख समस्या है। कई गरीब परिवार सिंचाई सुविधा नहीं रहने के कारण रोजगार व नाैकरी के लिए गांव छोड़कर पलायन कर गए।

आंकड़ों में जानिए कुटुम्बा विस की प्रमुख बातें

  • कुटुम्बा विधानसभा में नवीनगर प्रखंड के 10 पंचायतें शामिल
  • देव प्रखंड के चार पंचायत भी कुटुम्बा में शामिल
  • 2010 में नवीनगर व देव विधानसभा से कटकर बना यह कुटुम्बा विधानसभा
  • कुटुम्बा विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
  • 2010 में पहले विधायक जदयू से ललन राम बने
  • 2015 में कांग्रेस से राजेश कुमार

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