सज गया माता का दरबार, आज से शक्ति आराधना:डोली पर हाे रहा माता का आगमन, सुबह 6:30 से 10:30 बजे तक कलश स्थापन का है शुभ मुहूर्त

औरंगाबाद20 दिन पहले
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शहर के धर्मशाला चौक स्थित मां दुर्गा मंदिर का सजा दरबार, यहां शक्ति की आराधना की तैयारी हो गई है पूरी। - Dainik Bhaskar
शहर के धर्मशाला चौक स्थित मां दुर्गा मंदिर का सजा दरबार, यहां शक्ति की आराधना की तैयारी हो गई है पूरी।
  • पूजा-पंडालों में मां दुर्गा के साथ-साथ कोरोना, सोशल डिस्टेंसिंग और सामाजिक संदेश की झांकियां नजर आएंगी

कलश स्थापना के साथ भक्ति, शक्ति और श्रद्धा का महापर्व शारदीय नवरात्र गुरुवार यानी 7 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। काेराेना की वजह से इसबार भव्य पंडाल और शहर में आकर्षक लाइटिंग थोड़ी कम नजर आएंगी। कम जगहों पर मूर्ति स्थापित किए जा रहे हैं। इसके जगह पर घर-घर में देवी पूजा की तैयारी की गई है।

मंदिरों में शंख और घंटे की ध्वनि से पूरा माहौल पूरे नवरात्र तक भक्तिमय रहेगा। हालांकि पिछले वर्षों की तरह भक्तों को भव्य पूजा पंडाल, दिव्य प्रतिमा, आकर्षक विद्युत सज्जा, तोरणद्वार देखने को बहुत कम मिलेगा। कहीं-कहीं पूजा समितियों ने कलश स्थापना कर ही मां की पूजा करने का निर्णय लिया है।

बुधवार काे देर शाम तक भक्तों ने मां की पूजा से जुड़ी सामग्री की खरीदारी की। बाजारों में भारी भीड़ दिखा। पंडित डॉ हेरंब मिश्र व उज्जवल रंजन ने बताया कि 7 अक्टूबर को सुबह 6:30 से 10:30 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। अलग-अलग काल के शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक
कलश स्थापना के सबसे शुभ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक है। ये सबसे फलदायी मुहूर्त माना जाता है। नवरात्र के नौ दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा हाेती है। पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होगी। मां अंबे क्लब जसोइया के अध्यक्ष सोनू कुमार सिंह व सचिव अभिमन्यु ने बताया कि बंगाल के 15-20 कारीगर पंडाल निर्माण कर रहे हैं।

उनलोगों ने बताया कि गांव का दुर्गा पूजा और कोविड के हालात व मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग से बचाव की नजारे भी नजर आएंगे। नवरात्र के शुरू होने पर प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि सफलता के बुलंदियों को छूने में भी महिला की अहम योगदान जरूरी है। इसलिए समाज में बेटियों की पढ़ाई में भेदभाव न करें। उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाएं। बेटियां आज किसी क्षेत्र में बेटों से कमतर नहीं हैं।

महाराणा प्रताप चौक पर तैयार हो रहा पंडाल।
महाराणा प्रताप चौक पर तैयार हो रहा पंडाल।

साधक इस तरह करेंगे उपवास और व्रत
वैसे तो दुर्गा पूजा में साधक अपने-अपने तरीके से उपवास और पारण करते हैं। चूंकि माता के नौ रूपों में एक भी दिन किसी एक रूप की आराधना पर्याप्त होती है। कलश स्थापना के साथ ही कई साधक फलाहार, कोई नमक विहीन अन्न और कोई निराहार उपवास तक करते हैं। नवमी को हवन के बाद भी कई साधक उपवास खत्म करते हैं।

हालांकि नवरात्र का उपवास करने वालों के लिए कलश विसर्जन अर्थात दशहरा के दिन अन्न ग्रहण करना उत्तम है। इस बार 15 अक्टूबर को दशहरा है। वैसे अष्टमी का व्रत रखने वाले साधक 12 अक्टूबर को नहाय-खाय, 13 को महाअष्टमी का उपवास और 14 को नवमी के दिन पारण करेंगे।

धर्मशाला दुर्गा मंदिर सजधज कर तैयार
धर्मशाला दुर्गा मंदिर सजधज कर तैयार है। बुधवार को सारी तैयारी पूरी कर ली गई। आज से भक्त मां के दरबार में दिनभर साधना कर सकते हैं। सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। समिति के लोगों ने श्रद्धालुओं से कोविड गाइडलाइन पालन करने का अपील किया है। शहर में भव्य पूजा पंडालों में बेहतर आने वाला बाइपास पर पंडाल नहीं बनेगा।

क्योंकि मां पंचदेव मंदिर में ही स्थापित हैं। मंदिर को ही भव्य तरीके से सजाया गया है, लेकिन इस बार रोक की वजह से सड़कों पर लाइटिंग आैर अन्य सजावट नहीं होगा। अध्यक्ष रेडक्रॉस चेयरमैन सतीश कुमार सिंह ने बताया कि इस बार कोविड की वजह से निर्णय लिया गया है।

अगले वर्ष पूर्व की तरह भव्य पूजा होगी। जसोइया मोड़ स्थित महाराणा प्रताप चौक पर भव्य पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। जहां बाढ़ में दुर्गा पूजा का नजारा नजर आएगा। गांव के दुर्गा पूजा के झलक भी इस पंडाल में दिखेगी।

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