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रंजिश:कुख्यात नक्सली जितेन्द्र टाइगर की चलती कार में गोली मारकर हत्या

औरंगाबाद2 दिन पहले
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गोली लगने के बाद क्षतिग्रस्त कार।
  • वारदात थाना क्षेत्र के सिंदुरिया समीप एक पेट्रोल पंप के समीप एनएच दो की
  • हाईवे पर पहले ईंट-पत्थर से हमला किया, फिर स्पीड धीमा होते ही मारी गोली
  • भूमि विवाद में हत्या होने की आशंका, पत्नी ने कुछ लोगों के नाम भी बताये
  • जितेन्द्र टाइगर पर 15 से ज्यादा मामले, 2005 से ही नक्सली संगठन में था शामिल

कुख्यात नक्सली व अपराधी जितेन्द्र टाइगर की चलती कार में अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अज्ञात अपराधियों ने उसके सिर और सीने में गोली दागी है। जिसके कारण घटनास्थल पर ही जितेन्द्र दम तोड़ दिया। घटना बारूण थाना क्षेत्र के सिंदुरिया समीप एक पेट्रोल पंप के पास एनएच दो की है। मृतक जितेन्द्र टाईगर ओबरा थाना क्षेत्र के चपरी गांव का रहने वाला था। घटना के पीछे भूमि और अापराधिक रंजिश को कारण माना जा रहा है। इस घटना में कार में बैठे एक रिटायर्ड शिक्षक को भी गोली लगी है। जबकि अल्टो कार में पीछे बैठे गांव के दो अन्य व्यक्ति बाल-बाल बचे। जख्मी रिटायर्ड शिक्षक देवनंदन सिंह चपरी गांव के ही रहने वाले हैं।

अपराधियों को थी आने की सटीक सूचना
घटना का अंदाज बताता है कि जिस तरीके से अपराधियों ने हाईवे पर कुख्यात जितेन्द्र टाईगर की हत्या की है। उससे साफ पता चलता है कि अपराधियों को उसके आने की सटीक सूचना थी। इस घटना की प्लानिंग अपराधियों ने आने से पूर्व कर लिया था। अपराधियों ने टारगेट कर उसके बदन में कई गोलियां दागी है। ताकि बचने का कोई चांस न हो। पुलिस भी इस तमाम बिंदुओं पर तहकीकात कर रही है। एसपी सुधीर कुमार पोरिका ने बताया कि पुलिस कई बिंदुओं पर तहकीकात की जा रही है।

कार में सवार थे चार लोग, सिर में मारी गोली

नक्सली और अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में माहिर जितेन्द्र को अपराधियों के सामने संभलने का भी मौका नहीं मिला। एके-47 के शौकिन जितेन्द्र टाईगर को अपराधियों ने देशी कट्‌टा से ताबड़तोड़ गोली चलाकर मार डाला। जितेन्द्र अपने गांव के रिटायर्ड शिक्षक देवनंदन सिंह के बेटी के यहां रोहतास जिले में एक श्राद्ध कर्म में शामिल होने गया था। शनिवार की शाम वह लौट रहा था। कार वह खुद चला रहा था। बगल के सीट पर रिटायर्ड शिक्षक बैठे थे। जबकि पीछे की सीट पर गांव के ही श्रीनिवास सिंह व अशोक सिंह बैठे थे। सिंदुरिया गांव के पास जैसे ही कार पहुंची कि पहले से खंडहरनुमा एक घर के पास बैगनआर खड़ी थी।

जितेन्द्र पर था 15 से ज्यादा मामले दर्ज
पुलिस सूत्रों के अनुसार जितेन्द्र टाईगर 2005 में ही नक्सली संगठन में शामिल हो गया। वह कुख्यात नक्सली रहा। 2009 में वह पहली बार पकड़ा गया। तीन साल तक जेल में रहा। इसके बाद वह बाहर आया। कुछ साल पहले अपने गांव के ही एक किसान को कुदाल से काटकर उसने हत्या कर दी थी। ओबरा में एके-47 से हत्या हुई थी। उस मामले में भी जितेन्द्र वांछित था। इसके बाद वह फरार रह रहा था। कोलकता में छिपा हुआ था। जहां पुलिस ने आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया था।

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