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गाइडलाइन:सरकारी कर्मी बनेंगे पोलिंग एजेंट तो जाएंगे जेल, एजेंट के रूप में यथासंभव प्रौढ़ एवं अनुशासित व्यक्तियों की नियुक्ति

औरंगाबाद सदरएक महीने पहले
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बिहार पंचायत चुनाव-2021 के मतगणना के दौरान कोई सरकारी व्यक्ति मतगणना अभिकर्ता (एजेंट) नहीं बन सकेगा। यदि सरकारी व्यक्ति इस प्रकार का कार्य करता है तो उसे तीन माह की कारावास, जुर्माना या दोनों का दंड हो सकता है। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा जारी मतगणना हस्तपुस्तिका में निर्देश जारी की है।

इसके अनुसार राज्य में पहली बार ईवीएम के माध्यम से होने वाले पंचायत चुनाव में मतगणना से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी होगा। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार मतगणना एजेंट के लिए कोई विशेष योग्यता चिन्हित नहीं की गयी है, लेकिन उम्मीदवारों को यह सलाह दी गई है कि वे अपने एजेंट के रूप में यथासंभव प्रौढ़ एवं अनुशासित व्यक्तियों को नियुक्त करें, जिससे उनके हितों की समुचित देखभाल हो सके।

चुनाव की घोषणा के लिए अभी करना होगा इंतजार
बिहार पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे प्रत्याशियों को अभी तारीख की घोषणा को लेकर इंतजार करना होगा। अधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव की घोषणा ईवीएम पर चुनाव आयोग के एनओसी के बिना नहीं होने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों से मिली जानकारी के बाद यह तस्वीर अब साफ होती दिख रही है। आयोग को अब हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई का इंतजार है। सुनवाई संभवतः 6 अप्रैल को होनी है। यानी अप्रैल के पहले सप्ताह तक पंचायत चुनाव की घोषणा नहीं होगी। घोषणा तभी संभव है, जब चुनाव आयोग सुनवाई के पहले ही ईवीएम की आपूर्ति पर एनओसी देगा।

सुरक्षाबलों को काउंटिंग हॉल में अनुमति नहीं
आयोग के अनुसार सुरक्षाकर्मियों के मतगणना हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। केंद्र या राज्य के मंत्रियों या सांसद व विधायकों को निर्वाचन एजेंट या मतगणना एजेंट के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं होगी। आयोग के अनुसार उम्मीदवार या उसके द्वारा नियुक्त निर्वाचन एजेंट अपने चुनाव क्षेत्र के लिए एक ही मतगणना एजेंट की नियुक्त कर सकेंगे। चाहे उस वार्ड में मतदान केंद्रों या मतगणना मेजों की संख्या एक या एक से अधिक हो। ज्ञात हो कि बिहार में पहली बार ईवीएम से पंचायत चुनाव का निर्णय लिया गया है।

ऑडिट रिपोर्ट भेजने के लिए एक दिन और बचे हैं शेष
पंचायत चुनाव में जनप्रतिनिधियों को दोबारा चुनाव लड़ने की योग्यता की शर्त पूरी करने में महज एक दिन शेष बच गये हैं। ग्राम पंचायतों के मुखिया और वार्ड सदस्यों के लिए 31 मार्च की समय सीमा महत्वपूर्ण है। पंचायती राज विभाग ने साफ कहा है कि जिन पंचायतों के मुखिया या वार्ड सदस्यों द्वारा 31 मार्च 2020 तक ग्राम पंचायतों को दी गयी राशि का ऑडिट रिपोर्ट नहीं सौंपेंगे तो उनको अगले पंचायत चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा। इसी प्रकार का निर्देश ग्रामीण नल जल योजना और पक्की -गली नाली योजना को पूरा नहीं करनेवाले वार्ड सदस्यों व पंचों को लेकर दिया गया है।

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