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डिजिटल तरीके से पढ़ाई:आठ घंटे की कड़ी मेहनत से प्रेरणा रानी व करूणा निधी ने बीपीएससी में पाई सफलता

औरंगाबाद8 दिन पहले
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  • फार्मासिस्ट की बेटी ने पहले प्रयास में मारी बाजी, डिजिटल तरीके से की पढ़ाई

कोरोनाकाल जैसे चुनौतीपूर्ण समय में आठ घंटे तक डिजिटल तरीके से पढ़ाई कर करूणा निधी ने बीपीएससी में सफलता हासिल किया है। करूणा निधी जिले के सफल व्यवसायी व कुटुम्बा के धनीबार गांव निवासी शंभूनाथ पांडेय का बेटा है। उक्त छात्र को जिला अभियोजन पदाधिकारी विभाग मिला है। करूणा निधी ने बताया कि उसकी प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा औरंगाबाद डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई है।

फिर महाराष्ट्र में कंप्यूटर साइंस से बीटेक की डिग्री ली। दिल्ली में यूपीएससी और बीपीएससी दोनों की तैयारी कर रहा था। कोरोनाकाल में घर लौट गया। यहां डिजिटल तरीके से पढ़ाई की। तीन-तीन घंटे के दो फेज बांटकर छह घंटे पढ़ाई करता था और फिर दो घंटे अलग से। आठ घंटे की पढ़ाई से यह सफलता पायी है। उसने बताया कि वह आगे सिविल सेवा में जाकर आईएएस बनना चाहता है। ​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​

दाउदनगर के रहने वाली प्रेरणा रानी पहली प्रयास में ही बीपीएससी में सफलता की झंडा गाड़ी। प्रेरणा के पिता श्रीनिवास एक बेरोजगार फार्मासिस्ट हैं। जबकि माता गृहणी। प्रेरणा रानी की प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा दाउदनगर में हुई। जबकि ग्रेजूएशन पटना यूनिवर्सिटी से की है। प्रेरणा रानी गणित में गोल्ड मेडलिस्ट है। वह बताती है सात से आठ घंटे रोजाना पढ़ाई करती थी। मैगजीन, न्यूज पेपर व डिजिटल तरीके से वह पढ़ाई की। आत्मविश्वास उसका मजबूत था। वह जानती थी कि पहली प्रयास में ही सफलता पाएगी। आगे सिविल सेवा में जाकर आईएएस बनना चाहती है। प्रेरणा रानी को एससी-एसटी वेलफेयर आॅफिसर का पोस्ट मिला है।

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