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जागरुकता:पर्यावरण का कमाल; यहां 80 साल के बुजुर्गों का भी बच्चों जैसा दिल, युवाओं जैसी हैै सेहत

औरंगाबाद9 दिन पहले
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बुजुर्ग के ऑक्सीजन लेवल नापते डॉ जन्मजय कुमार। - Dainik Bhaskar
बुजुर्ग के ऑक्सीजन लेवल नापते डॉ जन्मजय कुमार।
  • स्वास्थ्य जांच में बुजुर्गों का पल्स, बीपी और हार्ट ठीक, ऑक्सीजन लेवल 98 से 100 तक

पर्यावरण है तो जिंदगी है। वरना मुश्किल है। मदनपुर प्रखंड के भीतर दोखरी गांव में पर्यावरण और प्रकृति का कमाल है की 80 साल के बुजुर्गो का भी बच्चों जैसा दिल है और युवाओं जैसा सेहत। ये हम दावा नहीं कर रहे बल्कि शहर के बड़े सर्जन डॉ जन्मेजय कुमार ने मदनपुर के भीतर दोखरी गांव में शनिवार को हेल्थ कैंप लगाया।

ये दैनिक भास्कर अखबार में खबर पढ़कर वहां पहुंचे थे। कैंप में गांव के छोटे बड़े महिला-पुरूष 54 लोगों की जांच की गई। डॉ. तब हैरान रह गए। जब 80 साल के बुजुर्गों का भी पल्स, बीपी और हार्ट बच्चों जैसा समान्य दिखा। वहीं ऑक्सीजन लेवल भी बुजुर्गों का 98 पार था। किसी-किसी बुजुर्गों का ऑक्सीजन लेवल 100 था। यह देखकर डॉक्टर हैरान रह गए।

डॉक्टर जन्मेजय कुमार ने बताया कि पर्यावरण व प्रकृति के इस कमाल को समझकर मैं काफी उत्साहित हूं और लोगों से अपील करता हूं की हर लोग अपने घर के आसपास पांच पौधा जरूर लगाएं। क्योंकि पर्यावरण है तो जिंदगी है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि भीतर दोखरी गांव गरीबों की बस्ती है। न वहां पॉष्टिक आहार है और न भौतिक सुख, सुविधा, लेकिन लोगों की सेहत बिल्कुल फिट है और यह सिर्फ पर्यावरण का कमाल है।

जंगल में गांव, फिर भी पेड़ लगाने का जुनून

मदनपुर प्रखंड के भीतर दोखरी गांव जंगल में स्थित है। पहाड़ के नीचे और जंगल के बीच में है। फिर भी उसी गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग बृज भुईयां को अभी भी पौधा लगाने का जुनून है। उक्त बुजुर्ग कई सालों में 1500 से अधिक पौधा लगा चुके हैं। जो अब बड़े विशाल पेड़ हैं। बृज भुईयां ने बताया कि वह बचपन से ही पौधा लगाना शुरू किया था। वह पढ़े-लिखे नहीं है, लेकिन उनका मानन है कि पेड़ में भगवान होते हैं और भगवान के बिना जीवन संभव नहीं। सबसे ज्यादा पिपल, आम के पौधे लगाए।

सैंकड़ो महुआ का पौधा भी लगाया। मनरेगा के तहत भी इधर कुछ सालों में 100 से ज्यादा पौधा लगाया। बृज भुईयां का ऑक्सीजन लेवल 99 मिला। दिल, पल्स व बीपी बिल्कुल सामन्य। डॉ. जन्मेजय कुमार वृज भुईयां के स्फूर्ति देख चकित रह गए। क्योंकि इतने उम्र के बुजुर्ग जब उनके पास इलाज कराने आते हैं तो वे काफी कमजोर होते हैं और डरे सहमें, लेकिन बृज भुईयां अभी भी युवाओं जैसा फिट हैं।

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