पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

बरबीघा:ईद-उल-अजहा की नमाज घरों में की अदा

बरबीघा10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 के बढते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए शनिवार को सरकार के निर्देशानुसार सादगी के साथ बकरीद का त्योहार मनाया गया। इस बार मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों एवं ईदगाहों में ना जाकर अपने-अपने घरों में नमाज अदा की एवं अपने परिवार और देशवासियों के लिए कोरोना जैसे भयंकर महामारी से बचने के लिए दुआ मांगी। कोविड-19 को लेकर सभी अभिभावक अपने-अपने बच्चों को कोरोना से बचने के लिए एहतियात बरतने की नसीहत दी थी जिसके कारण इस त्योहार के दिन भी बच्चेंं अपने को घर में रहना ही सुरक्षित समझकर घर से बाहर नहीं निकले।

कोरोना के कारण हर साल बकरीद के त्यौहार पर मुस्लिम बहुल क्षेत्र में जहॉं इस त्यो‍हर के दिन उत्सव का महौल रहता था वहां बिल्कुल सादगी दिखी। महामारी के कारण बडे बुजुर्ग लोग भी अपने घर में अपने परिवार के साथ सेवेईया आदि खाकर एक दूसरे को ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी। स्थानीय निवासी मो.शब्बीर हुसैन ने बताया कि बकरीद के दिन सभी घरों में बकरे की बलि दी जाती है। उन्होंने बताया कि हजरत इब्राहिम 80 साल की उम्र में पिता बने थे। उनके बेटे का नाम इस्माइल था। हजरत इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल को बहुत प्यार करते थे।

एक दिन हजरत इब्राहिम को ख्वाब आया कि अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कीजिए। इस्लामिक जानकार बताते हैं कि ये अल्लाह का हुक्म था और हजरत इब्राहिम ने अपने प्यारे बेटे को कुर्बान करने का फैसला लिया। हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और बेटे इस्माइल की गर्दन पर छुरी रख दी। लेकिन इस्माइल की जगह एक दुंबा(बकरे) वहां प्रकट हो गया। जब हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों से पट्टी हटाई तो उनके बेटे इस्माइल सही-सलामत बगल में खड़े हुए थे। कहा जाता है कि ये महज एक इम्तेहान था और उसमें हजरत इब्राहिम कामयाब हो गए इस तरह जानवरों की कुर्बानी की यह परंपरा शुरू हुई।

0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- धार्मिक संस्थाओं में सेवा संबंधी कार्यों में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। कहीं से मन मुताबिक पेमेंट आने से राहत महसूस होगी। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और कई प्रकार की गतिविधियों में आज व्यस्तता बनी...

और पढ़ें