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विरोध:4 घंटे की हड़ताल पर रहे डॉक्टर, बिन दिखाए लौटे मरीज

बेगूसरायएक महीने पहले
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  • आईएमए द्वारा देश स्तर पर योगाचार्य बाबा रामदेव के बयान के खिलाफ जिले में भी हड़ताल पर रहे डॉक्टर

आईएमए द्वारा देश स्तर पर योगाचार्य बाबा रामदेव के बयान के खिलाफ 4 घंटे की सांकेतिक हड़ताल का असर शुक्रवार को बेगूसराय के सदर अस्पताल में भी देखने को मिला। सुबह 8.30 बजे से लेकर 12:30 बजे तक सदर अस्पताल में एक भी मरीज को ओपीडी में नहीं देखा गया। इसके साथ ही पर्चा काउंटर के सामने बैनर पोस्टर के साथ चिकित्सकों के जमा हो जाने की वजह से एक भी लोगों का पुर्जा नहीं काटा गया। इसकी वजह से लोगों को परेशानी हुई है। इस दौरान दूरदराज इलाके से आए मरीजों को 12:30 बजे के बाद ही चिकित्सक देख पाए इलाज के लिए स्ट्रेचर पर सोई हुई रेखा देवी कलर का राहुल सिंह ने बताया कि वे बदलपुरा से मां का इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल लाए हैं। उनकी मां गिर गई है जिसके कारण गंभीर रूप से चोट आई है।

इस दौरान असुरारी से सास के साथ इलाज कराने आई गर्भवती महिला प्रीति देवी ने कहा कि शुक्रवार की सुबह वह घर में गिर गई हैं। इससे उन्हें कमर में काफी चोट आई है, जिसका इलाज कराने के लिए हुए सदर अस्पताल में भटक रही हैं। सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर चिकित्सकों को संबोधित करते हुए आईएमए के सचिव रंजन चौधरी ने कहा कि उन्हें योग या इलाज की अन्य पद्धतियों से कोई दुश्मनी नहीं है। लेकिन बाबा रामदेव द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान एवं चिकित्सकों के खिलाफ अनर्गल बयान से मर्म आहत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दायर होना चाहिए और सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। मौके पर बिहार चिकित्सा संघ के प्रदेश प्रवक्ता रामरेखा ने कहा कि बाबा रामदेव के बयान से देश में कोरोना टीकाकरण पर गलत प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बाबा रामदेव को बचाने का काम कर रही है। कहीं ना कहीं उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि गलत बयान बाजी के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार ने कहा कि कोरोना काल के दौरान लोगों का इलाज करते हुए देश में 4000 चिकित्सक एवं बिहार में डेढ़ सौ चिकित्सकों की मौत हो चुकी है। ऐसे में इन शहीद चिकित्सकों के

खिलाफ बाबा रामदेव का बयान निंदनीय है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और चिकित्सीय संस्थानों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय सुरक्षा कानून बनाया जाए। साथ ही हिंसा करने वाले को दस वर्ष की कड़ी सजा एवं कानून को आईपीसी और सीआरपीसी में अंतर्निहित किया जाए। पतंजलि के मालिक श्री रामदेव और उनके जैसे तमाम दोषियों के खिलाफ आई पी सी के महामारी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई किया जाए। इस अवसर पर आईएमए निर्वतमान सचिव डॉ निशांत रंजन, वरीय चिकित्सक डॉ रामाश्रय सिंह, डॉ प्रमोद कुमार सिंह, डॉ राजू, डॉ बीके शर्मा, डॉ अखिलेश कुमार, डॉ संजय, डॉ एके सिंह, डॉ विधान चंद्र, डॉ ब्रजेश कुमार, डॉ रविशंकर , डॉ आरसी चौधरी, डॉ कृष्ण कुमार, डॉ संजय कुमार, डॉ शशिभूषण, डॉ अभिषेक, डॉ अदिति , डॉ भारती, डॉ पूनम, डॉ आलोक कुमार आदि उपस्थित थे।

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