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छेड़खानी की प्राथमिकी करने में देरी:डीएसपी के आदेश के बाद दर्ज हो सकी एफआईआर, पीड़िता ने कहा- नगर थानाध्यक्ष ने की देरी

बेगूसराय7 दिन पहले
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यह नगर थाना के करतूत और मनमानी की अचंभित कर देने वाली कहानी है। जहां सरकार और कोर्ट छेड़खानी और दुष्कर्म की वारदात को रोकने और आरोपी को सजा दिलाने में अत्यंत संवेदनशील रहती है । वहीं इस मामले में पुलिस ने सारी हदें ही पार कर दी।‌ बीएससी की छात्रा के साथ में छेड़खानी और गाली गलौज की वारदात को दर्ज करने में नगर थाना पुलिस को 4 माह से अधिक का वक्त लगा।

19 मई को नगर थाना में किए गए शिकायत की जांच में पुलिस ने 80 दिन समय लगा दिया । 8 अगस्त को जांच अधिकारी दरोगा मनीष कुमार सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट नगर थाना अध्यक्ष को सौंप दिया‌ जिसमें पीड़िता के आवेदन में वर्णित सारे आरोप को सही करार दिया।

इसके बाद भी नगर थानाध्यक्ष‌ ने एफ आई आर लिखना मुनासिब नहीं समझा। अंत में पीड़ित छात्रा हेडक्वार्टर डीएसपी निश्चित प्रिया के पास पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई।‌ हेडक्वार्टर डीएसपी नीशीत प्रिया के आदेश के बाद ही शनिवार को नगर थानाध्यक्ष ने एफआईआर लिखी।

क्या है मामला
पीड़िता शहर के वीआईपी मोहल्ला विश्वनाथ नगर में मदन मोहन प्रसाद के मकान में रहती थी। 2 मई को मकान मालिक की मौत हो गई। 18 मई को मकान मालिक के दामाद राजपाल ने छात्रा के साथ गाली-गलौज और छेड़खानी की । साथ ही उसके कमरे का सामान फेंक दिया और कमरे में ताला लगा दिया ।

छात्रा के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता ने 19 मई को लिखित शिकायत की, लेकिन पुलिस पुलिस ने मुकदमा लिखने के बदले आरोपियों के बचाव में खड़ी हो गई। पीड़िता का कहना है कि हेडक्वार्टर डीएसपी के आदेश के बाद नगर थानाध्यक्ष ने पीड़िता एवं उसके परिजनों को फिर से नए तारीख में आवेदन लिखकर देने को कहा। लेकिन पीड़िता इसके लिए तैयार नहीं हुई।‌

छात्रा का एक साल हो गया बर्बाद
पीड़िता श्री कृष्ण महिला कॉलेज की छात्रा है। इसी साल उसने बीएससी पार्ट वन की परीक्षा पास की थी।‌ बीएससी पार्ट 2 में उसे नाम लिखाना था। लेकिन राजपाल द्वारा कमरे में ताला लगा दिए जाने और फिर नई दिल्ली चले जाने के कारण उसका सटिफिकेट कमरे में ही रह गया।

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