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हिंदी दिवस:हिंदी तकनीकी रूप से सबसे सक्षम भाषा है : प्रो. सत्यपाल

बेगूसराय9 दिन पहले
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  • हिंदी पखवारा 2021 के तहत ऑनलाइन हिन्दी व्याख्यान का आयोजन बरौनी रिफाइनरी ने किया

हिंदी पखवाड़ा 2021 के तहत ऑनलाइन हिन्दी व्याख्यान का आयोजन बरौनी रिफाइनरी के कर्मचारियों और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बरौनी के सदस्य कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए किया गया। इसमें वक्ता के रूप में वाराणसी से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. सत्यपाल शर्मा को आमंत्रित किया गया था।

हिन्दी पखवाड़ा 2021 के तहत कई कार्यक्रमों का आयोजन जारी है। इसी कड़ी में आजादी के 75 वर्ष और राजभाषा हिन्दी विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री तरुण कुमार बिसई, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) के उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुआ।

अपने सम्बोधन में श्री बिसई ने कहा कि “पूरे देश में आयोजित हो रहे अमृत महोत्सव और हिन्दी पखवाड़े के दौरान उपरोक्त विषय पर व्याख्यान बहुत ही औचित्यपूर्ण है। आज़ादी और हिन्दी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। आज़ादी की लड़ाई में हिन्दी और हिन्दी के राजभाषा बनने में आज़ादी की निर्विवाद भूमिका रही है। आज का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण और समीचीन है।”

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रो. सत्यपाल शर्मा ने अपने सम्बोधन में राजभाषा ऐतिहासिक, संवैधानिक और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अपनी बात रखते हुए कहा कि “ हिंदी हजारों वर्षों से जन भाषा, संपर्क भाषा और साहित्य की भाषा है। राजभाषा के रूप में हिंदी के विकास में हिंदीतर भाषी राज्यों ने अपनी महती भूमिका अदा की है।

हिंदी भरोसे और विश्वास की भाषा है जिसने पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया है। हिन्दी में तकनीकी विकास ने भरोसे और विश्वास के धागे को और मजबूत किया है। हिन्दी वर्तमान में तकनीकी रूप बहुत ही सबल और सशक्त भाषा है।” व्याख्यान के बाद जिज्ञासा सत्र में भी सभी लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम काफी संवादपूर्ण रहा। व्याख्यान सभी के लिए मार्गदर्शक और उपयोगी रहा। इसमें कुल 127 लोग शामिल हुए।

हिंदीः कल, आज और कल पर परिचर्चा
बेगूसराय| हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर सोमवार को गणेशदत्त महाविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदीः कल, आज और कल विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो विपिन कुमार चौधरी ने कहा कि हिंदी भारतीय जनमानस की भाषा है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिए बिना पूरा नही हो सकता है।

मौके पर डॉ श्रवसुमि ने कहा कि भारत के लोगों को अंग्रेज़ी की औपनिवेशिक मानसिकता के दबाब से मुक्त होना होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो कमलेश कुमार ने कहा कि हिंदी को जनभाषा के साथ साथ सरकार की भाषा और न्यायालय की भाषा बनना जरूरी है।

परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए मुख़्य वक्ता कवि डॉ अरमान आनंद ने कहा कि हिंदी की जन स्वीकार्यता तभी बढ़ेगी, जब यह अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करेगी। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन नंदलाल कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अंजू कुमारी ने किया।

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