श्रीकृष्ण महिला कालेज में दो दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय सेमिनार शुरू:बहु विषयक सेमिनार में एलएनएमयू के एचओडी ने कहा महाविद्यालयों में सब कुछ है, लेकिन पढ़ाई नहीं

बेगूसराय19 दिन पहले
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21वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य और दुनिया में भविष्य की चुनौतियों को लेकर वक्ताओं ने रखे विचार - Dainik Bhaskar
21वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य और दुनिया में भविष्य की चुनौतियों को लेकर वक्ताओं ने रखे विचार

21वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य और दुनिया में भविष्य की चुनौतियों को लेकर श्रीकृष्ण महिला कॉलेज में शुक्रवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन नगर विधायक कुंदन कुमार ने किया। सेमिनार में पर्यावरण, जल संरक्षण, जनसंख्या, पढ़ाई के बदलते स्वरूप, पूजीवांद, नीजीकरण, औधोगिकरण और उसके बढ़ते दुष्परिणाम सहित अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई। सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने हुए विधायक ने कहा कि आज विश्व कई गंभीर समस्याओ से जूझ रहा है। बढ़ती जनसंख्या और विश्व शांति सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होनें कहा कि विश्व शांति के लिए भारत एक मार्गदर्शक की भूमिका में है। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विश्व शांति के लिए निरंतर विश्व के देशों को एक करने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।

महाविद्यालय में अब नामांकन और परीक्षा के बाद कुछ नहीं होता
वहीं मुख्य वक्ता एलएनएमयू के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने शिक्षा, कृषि, बाजरवाद, पूंजींवाद को अपने भाषा में परिभाषित किया। उन्होनें कहा कि बिहार के महाविद्यालय में अब नामांकन और परीक्षा के बाद कुछ नही होता है। उन्होनें कहा कि महाविद्यालय में सब कुछ है लेकिन पढ़ाई नही है। कॅालेज में आयोजित सेमिनार को लेकर उन्होनें कहा कि ऐसे आयोजनों से खुशी होती है, लेकिन अब ऐसे आयोजन होते ही नहीं हैं। श्री सिंह ने कहा कि 21वीं सदी उत्पादन के बिना मुनाफा का जमाना है। अब राजनीत से सुचिता विलुप्त हो चुकी है।

पहले यह जागरण का पर्याय था अब डेमोक्रेसी नहीं डॉलरोंक्रेसी का जमाना आ चुका है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय विज्ञान का केंद्र नहीं बल्कि विश्ववादी आर्थिकी का केंद्र है। अब शिक्षण की प्रक्रिया पर जोर नहीं दिया जा रहा है बल्कि अब विसंस्थानीकारण पर जोर दिया जा रहा है। उन्होनें कहा कि पहले शिक्षण संस्थानों में शिष्य और गुरु के बीच का संबंध देखेने को मिलता था अब वह संबंध छात्र और विक्रेता का हो गया है। अब संस्थान नहीं एजेंसी परीक्षा ले रही है। शिक्षक ठेके पर आ रहे है। कॉलेज में स्थाई की जगह गेस्ट शिक्षक आ रहे है। यह उत्तर पूंजीवाद का परिचायक है, जिसे रोकना बहुत ही आवश्यक है।

बड़ी समस्याओं का निदान करें
सेमिनार की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. विमल कुमार ने की। इस अवसर पर उन्होनें कहा कि बहु-विषयक सेमिनार का मकसद है कि हम वर्तमान की समस्याओं को देखकर सजग हों। उन्होनें कहा कि केवल आसपास की छोटी-छोटी समस्याओं से घबराने की बजाय पहले बड़ी समस्याओं का निदान करें। साथ ही समस्या ही ना हो इसके लिए भी प्रयास करें। विषय प्रवेश महाविद्यालय के डा. वृजेंद्र त्रिपाठी ने कराया। जबकि संचालन डा. शिखा चौधरी एवं प्रो. अनुपम अनुजा ने किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन डा. ललन प्रसाद ने किया। इससे पहले सेमिनार की शरूआत स्वागत गीत से किया गया।

जिसमें महाविद्यालय की छात्रा दामिनी कुमारी, प्रति कुमारी, नेहा कुमारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जीडी कालेज के प्राचार्य डा. राम अवधेश कुमार, आरसीएस कालेज मंझौल के प्राचार्य डा. अवधेश कुमार सिंह, जीडी कालेज के डा. अंजनी कुमार, डा. देवनीति प्रसाद ने टेक्निकल सेशन को संचालित किया।

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