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  • Kanhaiya, Who Raised The Slogan Of Freedom From Capitalism And Feudalism, Walked In His Lap Today; Ideological Differences Intensified After Kanhaiya Joined Congress, Opponents Said This Is Opportunistic Politics

नाराज खेमे का आरोप:पूंजीवादी व सामंतवाद से आजादी का नारा लगाने वाले कन्हैया आज उसी की गोद में चल गए; कन्हैया के कांग्रेस में जाने के बाद वैचारिक मतभेद तेज, विरोधियों ने कहा- ये अवसरवादी राजनीति है

बेगूसराय2 महीने पहले
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कन्हैया के घर की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
कन्हैया के घर की फाइल फोटो।
  • किसी ने किया स्वागत ताे किसी ने जताया ऐतराज

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई के युवा नेता रहे कन्हैया कुमार के कांग्रेस में चले जाने के बाद उनकी जन्मभूमि बीहट में विचारों का घमासान जारी है। कहीं खुशी, कहीं गम का माहौल बना हुआ है और लोग रह-रह कर अपनी प्रतिक्रिया कन्हैया कुमार के कांग्रेस में चले जाने के बाद दे रहे हैं। इस मसले पर तेघड़ा विधायक राम रतन सिंह कहते हैं कि कन्हैया कुमार पूंजीवाद की गोद में जाकर बैठ गए हैं। अब वे कारपोरेट समाजवाद लाने की बात करेंगे। कहा कि कन्हैया कुमार का यह बचकाना निर्णय है, हालांकि उन्हें खुद तय करना है कि वह किस रूप में समाजवाद को लाना चाह रहे हैं।

तेघड़ा विधायक ने कहा कि कन्हैया कुमार को सम्मान देने के लिए पार्टी में पहली बार ऐसा निर्णय हुआ कि पार्टी की स्थापना से लेकर अब तक किसी भी सदस्य को सीधे राष्ट्रीय परिषद का सदस्य या फिर केंद्रीय सचिव मंडल में जगह नहीं दी गई थी। जदयू के महासचिव सह पूर्व विधान पार्षद भूमिपाल राय कहते हैं कि कन्हैया का निर्णय स्वागत योग्य है।

वामपंथ का कोई वजूद ही नहीं बचा है। जो पार्टी विपक्ष में भी रहने लायक नहीं है, उसके साथ ज्यादा दिनों तक काम नहीं किया जा सकता है। माकपा के पूर्व विधायक राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि राजनैतिक कमिटमेंट मजबूत नहीं था इस कारण डायवर्ट हो गया। एआईवाईएफ के राज्याध्यक्ष अमीन हमजा ने कहा कि कन्हैया कुमार सिद्धांत से समझौता कर कांग्रेस में गए हैं। ऐसे पदलोलुप लोगों के जाने से एआईएसएफ और एआईवाईएफ कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि वामपंथ के प्रति जो प्रतिबंध कार्य करता है वह अब भी संघर्ष के लिए अडिग है और आगे भी अधिक रहेंगे।

4.28 लाख से गिरिराज सिंह से हारे थे कन्हैया
बेगूसराय वामपंथ का मजबूत किला रहा है, लोकसभा में 6 बार यहां से सीपीआई उम्मीदवार ने परचम लहराया। लेकिन कन्हैया कुमार 2019 के लोकसभा चुनाव में गिरिराज सिंह से 4.28 लाख वोट से पराजित हो गए थे। चुनावी इतिहास पर नजर डाले तो 2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू के मोनाजिर हसन को 2.68 लाख तो दूसरे स्थान पर रहे सीपीआई उम्मीदवार शत्रुघ्न प्रसाद सिंह को करीब 1.65 लाख वोट मिला था। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के डॉ भोला सिंह 4.28 और तीसरे स्थान पर रहे राजेन्द्र सिंह को 1.92 लाख वोट मिला था। वहीं 2019 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा के गिरिराज सिंह को 6.92 लाख मत तो भाकपा उम्मीदवार कन्हैया कुमार को 2.69 लाख वोट मिला।

पूंजीवादी व सामंतवाद से आजादी का नारा लगाने वाले कन्हैया आज उसी के गोद में चल गए- राम नरेश पांडे
कन्हैया कुमार के कांग्रेस में जाने के सवाल पर भाकपा राज्य सचिव राम नरेश पांडे ने कहा कि ये उनकी अपनी आजादी है स्वतंत्रता है। जब पार्टी में थे तब कहा करते थे आजादी, आजादी, पूंजीवाद से आजादी, सामंतवाद से आजादी, और उसी के गोद में चले गए। एक सवाल के जबाव में राम नरेश पांडे ने कहा कि देश और राज्य के वरिष्ठ नेता तो उन्हें गोदी में रखे हुए थे।

भाकपा राष्ट्रीय पार्टी है। युवा शक्ति में ऐसा कौन नौजवान होगा जो छात्र यूनियन का चुनाव लड़ा और तुरंत उसको जिस बेगूसराय लोकसभा से हम 6 बार सांसद हुए हैं वहां का उम्मीदवार बनाया। इससे बड़ा युवा शक्ति को माथे पर कौन बैठाकर उँचाई पर ले जाएगा।

उन्होंने कहा कि कन्हैया स्वंय सीपीआई से गए, कम्युनिस्ट पार्टी में जब कोई मेंबर बनता है तो उम्मीदवार सदस्य के रूप में उससे प्रतिज्ञा कराया जाता है। मैं पार्टी के उद्देश्य को स्वीकार करता हूं, कार्यक्रमों को स्वीकार करता हूं, मैं अपने स्वार्थ से उपर पार्टी और सामाजिक स्वार्थ को देखूंगा। पार्टी के फैसले का अक्षरशः पालन करूंगा। लेकिन उन्होंने पालन नहीं किया। वे जेएनयू छात्र शाखा के यूनिट के मेंबर थे बिहार में वे मेंबर भी नहीं थे।

वंशवाद और पूंजीवाद की गोद में जाकर बैठ गए कन्हैया
बीहट इप्टा के कार्यकारी अध्यक्ष अमरनाथ सिंह ने कहा कि कन्हैया आजादी का नारा लगा रहे थे, वंशवाद से आजादी, पूंजीवाद से आजादी। आज वह उसी वंशवाद और पूंजीवाद की गोद में जाकर बैठ गए हैं। पूर्व मुखिया रामाधार सिंह कहते हैं कन्हैया कुमार ने भगत सिंह के सपनों को दिग्भ्रमित करने का काम किया है। भगत सिंह के आदर्श पर चलना आसान नहीं है। भारतीय सब लोग पार्टी के जिला अध्यक्ष सिंटू कुमार सिंह कहते हैं कि यह कन्हैया का व्यक्तिगत निर्णय है और हर किसी को अपना लाभ हानि देख कर निर्णय लेने का अधिकार है।

हम पार्टी के जिलाध्यक्ष पीयूष कुमार कहते हैं कि कन्हैया अपना भविष्य कांग्रेस में देख रहे हैं, इसलिए उन्होंने पार्टी बदल ली। शिक्षक दिलीप कुमार कहते हैं कि कन्हैया तालाब से समुद्र में गए हैं, वो कितना तैर पाएंगे, यह कहना अभी मुश्किल है। छात्र नेता रामकृष्ण कहते हैं कि कन्हैया ने समय के साथ सही निर्णय लिया है। श्री बाबू के बाद बेगूसराय के विकास में कोई राह नहीं मिल पाया और कम्युनिस्ट रहते संभव भी नहीं था। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 9 फरवरी 2016 को अफजल गुरू के बरसी पर लगाए गए कथित देश विरोधी नारे के मामले में गिरफ्तारी के बाद देश भर में चर्चा में आए कन्हैया कुमार ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। बिहार के लेमनग्राद में वामपंथ की उर्वर भूमि बीहट से ताल्लुक रखने वाले कन्हैया कुमार जेएनयू एआईएसएफ इकाई के नेता थे और 2015 में हुए जेएनयूएसयू के चुनाव में आइसा के मजबूत उम्मीदवार को पराजित कर छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर पहली बार चर्चा में आए।

फिर 9 फरवरी 2016 को जेएनयू कैंपस में लगे कथित देश विरोधी नारे के बाद 12 फरवरी 2016 को दिल्ली पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद 16 फरवरी को जेल से आने के बाद कन्हैया कुमार भाषण के जरिए भाजपा, आरएसएस व पीएम नरेन्द्र मोदी पर जोरदार हमला कर देशभर में चर्चित हो गए।

निजी हित के लिए मार्क्सवाद को तिलांजली देने वाला पहला कामरेड है कन्हैया : अवधेश
सीपीआई नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के सीपीआई छोड़ कांग्रेस में शामिल हो होने पर सीपीआई जिला सचिव सह पूर्व विधायक अवधेश राय ने कहा कि कन्हैया कुमार के जाने से पार्टी को दुख जरूर है लेकिन सीपीआई में कई बड़े-बड़े लोग आए गए लेकिन पार्टी जस की तस है ।

कन्हैया कुमार मार्क्सवाद को छोड़कर समाजवाद को छोड़कर पूंजीवाद में गए हैं यह अवसरवादिता है। अवधेश राय ने कहा कि कन्हैया कुमार से पार्टी को बहुत उम्मीद थी, लेकिन कन्हैया कुमार में क्या भटकाव आया कि वह मार्क्सवाद को तिलांजलि देकर निजी हित के लिए सीपीआई छोड़कर कांग्रेस में चले गए। उसके जाने से सीपीआई को कोई क्षति नहीं है पार्टी आगे भी संघर्ष करती रहेगी।

आंधी में आया और चला गया कन्हैया राजेन्द्र सिंह
भाकपा के पूर्व राज्य सचिव पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह ने कहा कि कन्हैया कुमार का मन हुआ कांग्रेस में चला गया। उन्होंने कहा कि कन्हैया खुद को कम्युनिस्ट पार्टी में एडजस्ट नहीं कर पाया। कम्युनिस्ट पार्टी के माहौल में पैदा हुआ। लेकिन पढ़ाई-लिखाई के बाहर रहा। आंधी में आया और बड़ा नेता बन चला गया।

कन्हैया का कांग्रेस में जाना अवसरवादिता है
भाकपा माले के पूर्व जिला सचिव चन्द्रदेव वर्मा ने कहा कि कन्हैया का कांग्रेस में जाना अवसरवादिता है, अपने महत्वाकांक्षा को चरम पर पहुंचाने के लिए कांग्रेस में गए। कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें बहुत तरजीह दिया। उनकी महत्वाकांक्षाएं पूरी नहीं हुई तो और उपर जाने के लिए कांग्रेस जैसी पार्टी का दामन थामा।

कम्यूनिष्ट पार्टी का नहीं रहा है अब कोई भविष्य सही है निर्णय
कन्हैया के ग्रामीण ने कहा कम्युनिस्ट पार्टी का अब कोई भविष्य नहीं रह गया है अभी का जो माहौल है उसमें माहौल देखकर कन्हैया ने पार्टी चेंज किए हैं, हम गांव के लोग खुशी हैं नाराज नहीं है। कांग्रेस में भी कन्हैया का बढ़िया भविष्य है। कन्हैया के कम्युनिस्ट पार्टी से टिकट लेने के बाद हम लोग उसके समर्थक हुए।

अब हमारा भाई है तो उस का साथ देना ही पड़ेगा, लेकिन उसके निर्णय से निराशा हुई है। गांव के बुजुर्ग ने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। इंतजार करना चाहिए था उसे इस निर्णय से क्या फायदा मिला है या वही जानता है। कन्हैया कम उम्र का बच्चा है उसका 2 साल का राजनीतिक जीवन है। सीपीआई में जितना सम्मान मिला, कांग्रेस में अव्वल दर्जे पर पहुंचने के लिए उसे लंबा उम्र बिताना पड़ेगा। न

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