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लोहड़ी:मकर संक्रांति आज; तिल व खिचड़ी का भोग दो बजे बाद

बेगूसराय14 दिन पहले
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  • शास्त्रों के अनुसार इस संक्रांति को सौम्यायन संक्रांति कही गई है, गुरुवार को भी खाएंगे खिचड़ी व तिल चावल

मकर संक्रांति का स्नान पूजन सबेरे से ही आरंभ है किंतु तिल गुड़ खिचड़ी भोग दोपहर दो बजकर पांच मिनट के बाद ही उत्तम होगा। इस वर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में 14 जनवरी गुरुवार को प्रवेश 18 दंड 21 पला अर्थात दिन के 2ः05 में प्रवेश करेंगे जिसके अनुसार संक्रांति का पुण्य काल दिन के 2ः05 के बाद बीतेगा।

शास्त्रों के अनुसार इस संक्रांति को सौम्यायन संक्रांति कही गई है। मालूम हो कि 12 राशियों में सूर्य भ्रमण करते हुए एक सौर वर्ष पूर्ण करते हैं। सूर्य का राशि परिवर्तन अर्थात जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो वह संक्रांति कहा जाता है। सूर्य का धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के दिन को ही मकर संक्रांति कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार मकर राशि में प्रवेश करने के पश्चात सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और यह समय शुभ मांगलिक कार्य एवं संस्कार के लिए उत्तम होता है।

क्या है पौराणिक कथा
महाभारत कथा के अनुसार भीष्म पितामह वाण की शय्या पर तब तक सोए रहे जब तक कि सूर्य उत्तरायण नहीं हुआ था। साथ ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर भीष्म पितामह अपनी इच्छा मृत्यु के अनुसार मृत्यु को वरण किया। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार बृहस्पतिवार के दिन सूर्य की संक्रांति होने पर शिक्षा,अध्ययन अध्यापन,सचिव,लेखन,नीति, निर्धारक आदि क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्तियों के लिए तथा मंदिर धर्माचरण,कर्मकांड आदि कर्मों को संपादित कराने वाले लोगों के लिए लाभकारी रहेगा।

तिला संक्रांति के बाद भी नहीं होगा विवाह का मुहूर्त
लंबे समय से कोरोना संक्रमण लॉकडाउन के साथ-साथ शादी विवाह के मुहूर्त का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक और दुखद समाचार है। ज्योतिषाचार्य अविनाश शास्त्री के अनुसार सूर्य संक्रांति उत्तरायण होने के बावजूद कोई यज्ञ आदि शुभ कार्य विवाह का शुभमुहूर्त नही होगा। इसका मुख्य कारण यह है कि संक्रांति दिन के 2ः05 में होगी और रात्रि के 10ः19 के बाद बृहस्पति क्षीण हो रहे हैं अर्थात पुनः अशुद्ध आरंभ हो जाएगा।

जिस कारण सौर संक्रांति के हिसाब से पौष माह समाप्त होने और माघ मास के शुरू होने के बावजूद भी बृहस्पति क्षीण होने के कारण विवाह आदि का मुहूर्त नहीं है। ज्योतिषाचार्य अविनाश शास्त्री ने बताया कि संक्रांति पर्व में मकर संक्रांति का महत्व होता है, दिन का नहीं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर संक्रांति के दिन नदी स्नान सर्वोत्तम“ लेकिन, नदी के अभाव में तालाब, कूंआ या नलकूप या फिर घर में ही जहां भी सुविधा हो स्नान करते समय माता गंगा जी का ध्यान करना लाभदायक होता है।

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