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गड़बड़झाला की आशंका:प्लस टू में उत्क्रमित होने के बाद मिले थे ~39.5 लाख, लेकिन खर्च का ब्योरा नहीं

बेगूसराय4 दिन पहले
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विद्यालय के प्रधानाध्यापक से रिपोर्ट लेते जिला शिक्षा पदाधिकारी। - Dainik Bhaskar
विद्यालय के प्रधानाध्यापक से रिपोर्ट लेते जिला शिक्षा पदाधिकारी।
  • 11 साल बाद भी किसी को पता नहीं कि इस मद की राशि का क्या उपयोग हुआ
  • कहीं रोकड़ पंजी गायब, तो कहीं पूर्व प्रधान ने हिसाब नहीं दिया

साल 2009-10 में जिले के 55 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्लस टू में उत्क्रमित होने के बाद विद्यालयों के भवन, खेल का मैदान, पुस्तकालय और प्रयोगशाला कार्य के लिए 39 लाख 50 हजार का आवंटन किया गया था। अब करीब ग्यारह साल बाद उक्त राशि का हिसाब मांगी जा रही है तो, किसी विद्यालय में रोकड़ पंजी गायब है तो किसी विद्यालय के प्रधान को पूर्व प्रधान ने कथित तौर पर हिसाब का लेखा जोखा ही हस्तगत नहीं कराया है। जिसके बाद डीईओ ने हिसाब नहीं देने वालों प्रधानों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। मंगलवार को उक्त मामले को लेकर बीपी स्कूल में डीईओ ने सभी एचएम के साथ बैठक की। जिसमें संबंधित विद्यालय के एचएम को साक्ष्य के साथ बुलाया गया था तो कुछ एचएम को छोड़कर अन्य ने तरह-तरह के कारण बताए। डीईओ के समक्ष एचएम ने खुद कबूल किया कि प्रयोगशाला का सामान जैसे आया था, आजतक उसी तरह बंद है। किसी ने कहा प्रयोगशाला का सामान अब बेकार हो चुका है, पुस्तकालय संचालित नहीं होता है, खेल का सामान भी बंद है, भवन तो बना लेकिन अब वह भी टूटने लगा है। कुछ एचएम ने कहा सर पूर्व के एचएम ने रोकड़ पंजी ही नहीं दिया है। जिस पर डीईओ ने कहा कि अगर पूर्व एचएम ने रोकड़ पंजी नहीं दी है तो उनपर एफआईआर कराएं, नहीं तो आप पर एफआईआर होगी।

खेल के विकास के लिए मिले थे 40 लाख, पुस्तकालय मद में दो लाख

ज्ञात हो कि जिले वित्तीय वर्ष 2009-10 में जब विद्यालयों को राशि का आवंटन किया गया था। उस समय खेल विकास मद में 40 लाख, पुस्तकालय मद में 02 लाख, जिम मद में 1.60 लाख, उपस्कर मद में 6.50 लाख और भवन निर्माण मद में 26 लाख का आवंटन मिला था। हकीकत है कि आज जिले में एक भी खेल का मैदान ठीक नहीं है, प्रयोगशाला के नाम पर केवल भवन बच गया है, कुछ स्कूलों को छोड़कर कहीं भी पुस्तकालय नहीं है, स्कूल में जिम होता है इसके बारे में शायद ही बच्चों को पता होगा। भवन निमार्ण में भी काफी गड़बड़ी है। लेकिन आजतक इसकी धरातल पर कभी जांच नहीं की गई है। अगर कायदे से शिक्षा विभाग के अधिकारी अगर इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश करें, तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। साथ ही साथ इसमें घोटाला होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बीते 11 वर्षों से इस पूरे मामले में जांच नहीं होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। इधर जानकारों ने भी बताया कि सरकार से रुपये लेने के बाद भी सरकारी स्कूलों में व्यापक स्तर पर विकास देखने को नहीं मिल रहा है। आज भी सरकारी स्कूलों की वैसी ही स्थिति है, जैसी की करीब दस साल पहले थी। विद्यालय के प्रधानाचार्यों के द्वारा भी स्कूलों के विकास में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। जिस कारण आज इन सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग को इस पूरे मामले की गहनता से जांच करनी चाहिए।

डीईओ ने बीपी स्कूल में बुलाई है विशेष बैठक

ज्ञात हो कि पांच अप्रैल को डीईओ रजनीकांत प्रवीण ने पत्र जारी कर विद्यालय को आवंटित 39 लाख 50 हजार रुपए मद में व्यय हुई राशि को लेकर बीपी स्कूल में बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्होंनें सभी एचएम को राशि खर्च हुआ या नहीं इसकी गठित त्रिस्तरीय जांच कमिटी के समक्ष उपस्थित होकर साक्ष्य सहित रिपोर्ट देने को कहा था। जिसमें राशि के विरूद्ध खर्च से संबंधित सभी अभिलेख रोकड़ पंजी जो 2005-06 से अद्यतन होना चाहिए, उपलब्ध राशि के विरूद्ध खर्च की गई राशि से संबंधिन प्रपत्र जमा करने को कहा था। अधिकतर के पास इससे संबंधित कोई हिसाब ही नहीं है। मालूम हो कि यह मामला लोकायुक्त पटना में संचालित वाद से है। लोकायुक्त में मामला जाने के बाद ही इस मामले की पड़ताल शुरू हुई। जिला शिक्षा पदाधिकार रजनीकांत प्रवीण ने कहा है कि जिस स्कूल के एचएम द्वारा सभी साक्ष्य और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया जाएगा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जाएगी और कोशिश किया जाएगाा कि सभी को कोर्ट से भी सख्त से सख्त सजा मिले।

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