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नृशंस:जेल एंबुलेंस के चालक का हाथ-पैर बांध कर पहले एसिड पिलाया, फिर दोनों हाथों की कलाई काटकर हत्या कर दी

बेगूसराय13 दिन पहले
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घटना के बाद सदर अस्पताल में लगी लोगों की भीड़ व (इनसेट) एंबुलेंस चालक का फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
घटना के बाद सदर अस्पताल में लगी लोगों की भीड़ व (इनसेट) एंबुलेंस चालक का फाइल फोटो।
  • जेल अधीक्षक किए गए नामजद, परिजनों ने कहा- किसी मामले में बयान बदलने का दे रहे थे दबाव
  • कैदी को पीएमसीएच में भर्ती करवा लौट रहे थे धर्मेंद्र, घटनास्थल के पास के ही है हत्यारे

बदमाशों ने सोमवार की देर रात मंडलकारा के एम्बुलेंस चालक धर्मेंद्र रजक (45 साल) की नृशंस हत्या कर दी। वारदात उस वक्त हुई जब धर्मेंद्र रजक कैदी को पीएमसीएच में भर्ती करवाकर बेगूसराय लौट रहे थे। धर्मेंद्र महमदपुर वार्ड-38 के निवासी थे। बदमाशों ने धर्मेंद्र रजक को एसिड पिला कर और दोनों कलाई को ब्लेड से काट दिया था। एसपी अवकाश कुमार ने बताया कि मृतक के पुत्र संदीप कुमार ने जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार मेहता को नामजद किया है। आरोप है कि जेल अधीक्षक धर्मेंद्र रजक पर किसी मामले को लेकर अपना बयान बदलने का दबाव बना रहे थे। उनकी बात नहीं मानने के कारण ही साजिशन हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया है। बदमाशों ने ज्ञान भारती स्कूल के पास धर्मेंद्र रजक को मरा जान रात डेढ़ बजे बीच सड़क पर फेंक दिया। जहां नगर थाना की टाइगर जवानों ने बीच सड़क से उन्हें उठा कर पास के ही नर्सिंग होम में भर्ती कराया। वारदात स्थल के पास ही सड़क के किनारे मंडलकारा की एंबुलेंस भी खड़ी थी। अस्पताल में भर्ती कराये जाने के बाद पुलिसवालों ने इसकी जानकारी जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार मेहता को दी। इसी बीच जख्मी धर्मेंद्र के परिजनों को भी उनके हालात के बारे में जानकारी मिली, तो सभी भागते हुए अस्पताल पहुंचे। करीब सवा तीन बजे धर्मेंद्र रजक की हालात गंभीर हो गई। तो चिकित्सक ने उन्हें रेफर कर दिया जिसके बाद रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। 23 मार्च को घर से धर्मेद्र रजक की स्कार्पियों चोरी हो गई थी। मृतक के पुत्र संदीप ने बताया कि उन्होंने फाइनेंसर से खींची हुई गाड़ी खरीदी थी। उन्हें शक है कि फाइनेंस कम्पनी या फिर स्कार्पियों का पहले मालिक ने साजिश रच कर हत्या की है।

एम्बुलेंस से मिली रस्सी और एसिड, दोनों पैर पर थे रस्सी से बांधने का निशान
पुलिस को एम्बुलेंस से रस्सी और एसिड की बोतल मिली है। मृतक धर्मेंद्र के दोनों पैर पर रस्सी से बांधने का निशान मौजूद था। वहीं बदमाशों ने धर्मेंद्र रजक के दोनों हथेली को भी ब्लेड से काट दिया था। नगर थाना की पुलिस ने एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है। देर शाम फारेंसिक की टीम भी पहुंच कर मामले की तहकीकात में जुट गई है।

पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने शव को लेकर डीएम आॅफिस पर किया प्रदर्शन
पोस्टमार्टम के दौरान 5 घंटे तक जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और जेल प्रशासन के कोई अधिकारी सदर अस्पताल नहीं पहुंचे। इससे नाराज परिजनों ने पोस्टमार्टम के शव डीएम आफिस के गेट पर रख कर प्रदर्शन किया। डीएम ने परिजनों से बातचीत कर पुत्र को सरकारी नौकरी देने, हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया।

ज्ञान भारती स्कूल के पास ही मिलेगा हत्या का सबूत, यहां कुछ लोगों से थी निकटता
पुलिस को ज्ञान भारती स्कूल के धर्मेंद्र रजक मरणासन्न हालात में मिले थे। इसी जगह हत्या का राज छुपा है और हत्यारे भी इसी जगह के आस-पास के ही है। पुलिस को भी ऐसा ही शक है। जिस जगह से धर्मेंद्र रजक मरणासन्न मिले हैं, उस जगह पर धर्मेंद्र रजक की बैठकी थी। इस जगह पर 4-5 लोगों से उनकी काफी घनिष्ठता की बात सामने आ रही है। ज्ञान भारती स्कूल के पास ही वे अक्सर मंडल कारा की एंबुलेंस की मरम्मती भी करवाते थे। ज्ञान भारती के पास ही स्थित ढाबा में वे अक्सर खाया-पिया भी करते थे।

हत्यारें हैं धर्मेंद्र रजक के जान-पहचान वाले
पीएमसीएच से धर्मेद्र रजक करीब साढ़े 7 बजे एंबुलेंस लेकर निकले हैं। रात नौ बजे उनकी बेटे संदीप से बात हुई है। तकरीबन 11-12 बजे वे ज्ञान भारती स्कूल के पास पहुंच गए होगे। यहीं पर उनकी किसी खासमखास दोस्त से भेंट हुई और साजिशन उनकी हत्या कर दी गई।

शातिर हैं हत्यारे, सुसाइड व हादसा साबित करने की रची साजिश
हत्यारों ने धर्मेंद्र रजक की हत्या इस तरीके से कि है कि प्रथमदृष्ट्या यह सुसाइड साबित हो जाए। हत्यारों ने मृतक की दोनों कलाई ब्लेड से काटी है। सुसाइड करने वाले दोनों हाथ की कलाई नहीं काटते हैं। हत्यारों ने धर्मेंद्र को तेजाब पिला दिया। उनका तेजाब से जीभ भी जल गया है। तेजाब पिला कर भी सुसाइड ही साबित करना चाहते थे।

रात में घर नहीं लौटने की जानकारी देकर अपने बेटे को गए थे धर्मेंद्र

संदीप कुमार ने बताया कि रात को नौ बजे उनकी अपने पिता से बात हुई थी। तब पिता ने कहा था कि रात को घर नहीं आ सकुंगा। एक कैदी को पटना पहुंचाना है। इधर जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार मेहता ने बताया कि रात को किसी कैदी को पटना नहीं भेजा जाता है। सुबह नौ बजे के बाद ही किसी कैदी को इलाज के लिए पटना भेजा जाता है।

पुलिस सभी बिंदुओं की जांच कर रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी हुई है। मामले के किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। -अवकाश कुमार, एसपी।

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