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रक्षाबंधन कल:कल सुबह 8:35 के बाद है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

बेगूसराय9 दिन पहले
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  • वैदिक राखी बांध कर कर सकते हैं अपनों की रक्षा, रात के 8:25 बजे तक है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

3 अगस्त को सावन माह की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इस तिथि पर रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ काम जल्दी सिद्धि होते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. अविनाश शास्त्री के अनुसार सोमवार को सुबह 8.35 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही रक्षासूत्र बांधना चाहिए। रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुलिंदा है।

यही सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है। यह रक्षासूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में भी उसका बड़ा महत्व है। ज्योतिषाचार्य अविनाश शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमासी तिथि को रक्षा बंधन का शास्त्रिक प्रमाण है लेकिन उस दिन भद्रा का विचार परम् आवश्यक रूप से करना चाहिए। इस वर्ष श्रावण की पूर्णिमाशी सोमवार 3 को है। पूर्णिमासी प्रातः सूर्योदय के बाद रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। लेकिन प्रातः 8 बजकर 35 मिनट के बाद बाद भद्रा से बर्जित शुभ मुहूर्त रहेगा अतः रक्षा बंधन प्रातः 8 बजकर 35 मिनट के बाद रात्रि रात्रि 8 बजकर 25 मिनट तक शुभ मुहूर्त है।वृक्ष रक्षा सूत्र - यदि कन्या को कोई भाई ना हो तो उसे वट, पीपल, गूलर के वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधना चाहिए पुराणों में इसका विशेष उल्लेख है।

रक्षा सूत्रों के विभिन्न प्रकार
विप्र रक्षा सूत्र- तीर्थ अथवा जलाशय में जाकर वैदिक अनुष्ठान करने के बाद सिद्ध रक्षा सूत्र को विद्वान पुरोहित ब्राह्मण द्वारा स्वस्तिवाचन करते हुए यजमान के दाहिने हाथ मे बांधना शास्त्रों में सर्वोच्च रक्षा सूत्र माना गया है।
गुरु रक्षा सूत्र- सर्वसामर्थ्यवान गुरु अपने शिष्य के कल्याण के लिए इसे बांधते है।
मातृ-पितृ रक्षा सूत्र- अपनी संतान की रक्षा के लिए माता पिता द्वारा बांधा गया रक्षा सूत्र।
भातृ रक्षा सूत्र- अपने से बड़े या छोटे भैया को समस्त विघ्नों से रक्षा के लिए बांधी जाती है।
स्वसृ-रक्षासूत्र- पुरोहित अथवा वेदपाठी ब्राह्मण द्वारा रक्षा सूत्र बांधने के बाद बहिन का पूरी श्रद्धा से भाई की दाहिनी कलाई पर समस्त कष्ट से रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधती है।
गौ रक्षा सूत्र- अगस्त संहिता अनुसार गौ माता को राखी बांधने से भाई के रोग शोक डोर होते है।

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