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सर्वेक्षण:दूध, अंडा व ऊन उत्पादन के िलए जिले के 8 गांव चिह्नित हाेंगे

भभुआ21 दिन पहले
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  • चिह्नित किए जाने वाले गांवों के घर-घर में दूध, अंडा व मानसून के मौसम में उत्पादन से संबंधित जानकारियां एकत्र की जाएगी

कैमूर जिले में दूध, अंडा, मांस व ऊन उत्पादन का सर्वेक्षण होगा। यह औचक तौर पर होगा। सर्वेक्षण के लिए पशुपालन विभाग के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दी जा चुकी है। अब अगले चरण में औचक तौर पर चिन्हित 8 गांव की सूची उपलब्ध कराई जाएगी। सर्वेक्षण के लिए पशुपालन निदेशक बी कार्तिकेय ने दिशा निर्देश जारी किया है। चिन्हित इन गांवों के घर-घर में दूध, अंडा व मानसून उत्पादन से संबंधित जानकारियां एकत्र की जाएगी। खास बात यह है कि इन उत्पादों के लिए उत्पादन करने वाली प्रजातियों की भी सर्वेक्षण की जाएगी। जिसके जरिए यह तय होगा कि दूध अंडा मांस व ऊन उत्पादन के परिपेक्ष्य में जिले में क्या संभावनाएं हैं? पशुपालन विभाग के आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह सर्वेक्षण हर साल किया जाता है।

जिसमें इनके उत्पादन की जानकारी एकत्र की जाती है। इस साल भी यह सर्वेक्षण किए जाएंगे। इस सर्वेक्षण में औचक तौर पर चिन्हित कर आठ गांवों की सूची पशुपालन विभाग को निदेशालय उपलब्ध कराएगा। जानकार बताते हैं कि जिले में दूध अंडा मांस व ऊन के उत्पादन में उपयुक्त जानकारी के लिए यह सर्वेक्षण किया जाता है। चिन्हित गांव में विभाग के कर्मी घर-घर जाएंगे। वहां दुग्ध उत्पादन से संबंधित मवेशियों, अंडा उत्पादन से संबंधित मुर्गी फार्म व बत्तख फार्म, मांस के लिए बकरी भेड़ मुर्गा पालको व ऊन की उत्पादन की जानकारी के लिए भेड़ पालकों से आंकड़े लिए जाएंगे।

वधशाला से भी आंकड़े जुटाए जाएंगे
मांस की खपत की जानकारी के लिए वधशाला से भी आंकड़े लिए जाएंगे। सर्वेक्षण कर्ता पशुपालकों के साथ फोटोग्राफी करेगा ताकि दिए गए आंकड़े की सत्यता पुष्ट हो सके। पशु चिकित्सा पदाधिकारी 5% आंकड़ों की सत्यापन घर-घर जाकर करेंगे। गृहस्वामी व पशुपालकों से आंकड़े की भी मिलान की जाएगी। बताया गया है कि सर्वेक्षण के बाद इस आंकड़े की एंट्री डीएलएसएमएसमें किया जाएगा। ताकि खपत व उत्पादन की आंकड़े रखे जा सके।

जैविक मीट व अंडा उत्पादन को बढ़ावा
दरअसल जिले में जैविक मीट और जैविक अंडा उत्पादन और उसके कारोबार को बढ़ावा दिए जाने की योजना है। इससे निश्चित ही किसानों की आमदनी में किसानों की दशा सुधारने और उनकी आमदनी में इजाफा करने में पशुपालन का बहुत ही अहम योगदान होगा। लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसका किसानों को फायदा भी हो रहा है। इसी क्रम में पशुपालकों के लाभार्थ केंद्र सरकार पशु नस्ल सुधार पर बड़े स्तर पर योजना शुरू करने जा रही है।

हो चुका है प्रशिक्षण, शीघ्र सर्वेक्षण
सर्वेक्षण किया जाना है। सर्वेक्षण के लिए विभाग के पदाधिकारी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उच्चाधिकारियों के द्वारा सर्वेक्षण ग्राम की सूची उपलब्ध कराए जाने के बाद सर्वे कराई जाएगी। इसकी सूची डिजिटल लाइव स्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम में अपलोड कराई जाएगी।
डॉ. अरविंद कुमार सिन्हा,जिला पशुपालन पदाधिकारी

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