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नवरात्र शुरू:नवरात्र का कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:23 से

भभुआ15 दिन पहले
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  • आज से शुरू होगा शारदीय नवरात्र, कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद माता के भक्तों में दिख रहा उत्साह

आज से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहा है। इसे लेकर माता के भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद भक्तों की आस्था कम नहीं हुई है। नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त शनिवार को सुबह 6 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट नक हैं । आज हजारों लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करेंगे। नवरात्र के पूर्व कलश स्थापना के लिए लोगों ने बाजार में कलश और पूजा अर्चना के लिए पूजा सामग्री की खरीदारी किया। शहर के प्रजातंत्र चौक समेत अन्य स्थानों पर अस्थाई दुकानें सजाकर मिट्टी के कलशों की बिक्री की गई। इसके अलावा लोगों ने कुम्हारों के घर जाकर भी कलश की खरीदारी की। कलश स्थापना को लेकर श्रद्धालु घर व मंदिर की साफ-सफाई में जुट गए। आज लोग नदी और कुएं से पवित्र जल लाएंगे और कलश स्थापन करेंगे। इसके साथ ही 9 दिवसीय नवरात्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हो जाएगा।

बन रही छोटी प्रतिमाएं
कोरोना को देखते हुए सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए इस वर्ष छोटी-छोटी प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। पांच फीट से कम ऊंचाई वाली प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। प्रतिमा स्थापित होने वाले स्थानों पर पंडाल, लाइट आदि की ज्यादा व्यवस्था नहीं की जा रही है। प्रशासन का साफ निर्देश है कि इस बार दशहरा के अवसर पर मेले का आयोजन नहीं होना है। रावण दहन का भी कार्यक्रम नहीं होना है। प्रतिमा विसर्जन जुलूस नहीं निकालना है। इसके लिए पूजा समितियों के साथ लगातार बैठकों का दौर जारी है। पूजा समिति भी प्रशासनिक दिशा-निर्देश के अनुसार काम कर रही है।

कलश स्थापना कैसे करें
नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें। मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं और कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं। अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्सेे में मौली बांधें। अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें। इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं। अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें। अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें, जिसमें आपने जौ बोएं हैं।

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