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कोरोना अपडेट:सदर अस्पताल में कोरोना के इलाज की पूरी व्यवस्था नहीं, इस कारण ज्यादा मौतें

भभुआएक महीने पहले
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सदर अस्पताल - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल
  • न तो प्रशिक्षित हैंड्स हैं न जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन की सप्लाई ताकि यूं ही सालों से पड़े वेंटिलेटर की सुविधा दे सकें, 33 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर से थोड़ी राहत वाले कोरोना मरीजों को दी जा रही सांस

जिला में सदर अस्पताल है। हैंड्स की कमी हैं। ऑक्सीजन की भी सप्लाई उतनी नहीं कि वर्षों से धूल फांक रहे वेंटिलेटर को चला सकें। गंभीर से थोड़ी राहत वाले कोरोना मरीजो को ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर से सांस दे रहे हैं। ताकि काम आपूर्ति में भी ऑक्सीजन का काम चल सके। सदर अस्पताल का हकीकत तो यही है। अस्पताल सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। बताया गया है कि मरीजों की संख्या बढ़ाने लगी तो आनन-फानन में 58 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की खरीद हुई। 33 फंक्शनल है। जरूरत पड़ी तो शेष बची कंसेंट्रेटर को फंक्शनल किया जा सकता है। अलबत्ता दावे भी तमाम है। मसलन जिस हिसाब से कोरोना मरीजों की मौत हो रही है,उस हिसाब से तैयारियां नही हैं। अब जानकर तीसरी लहर की भी संभावना जता चुके हैं।

70 बेड के अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सदर अस्पताल में 70 बेड का कोविड सेंटर संचालित है। सभी बेड फूल है। 36 बीएड वाले मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल का भी यही हाल है। सभी जगह सिर्फ ऑक्सीजन के जरिए ही जिंदगी की सांस पहुंचाई जाने के दावे है। कहा यह भी जा रहा है कि वेंटिलेटर को चलाने के लिए अधिक(करीब 2 गुना) ऑक्सीजन की जरूरत होती है। उतनी मात्रा उपलब्ध नही हो पा रही है। इसलिए भी इसे शुरू नही किया जा पा रहा है।

एनेस्थेटिक की बहाली पर फोकस, शीघ्र साक्षात्कार
^इस संदर्भ में प्रभारी सीएस डॉक्टर मीना कुमारी ने पूछे जाने पर कहा कि वेंटिलेटर संचालन के लिए चिकित्सक की कमी है। शीघ्र ही साक्षात्कार होना है। इसमें आवश्यकता के अनुसार चिकित्सक की बहाली पर फोकस किया जा रहा है। बेड भी बढ़ाए जाएंगे। इसके अनुकूल तैयारियां भी तेजी से कि जा रही है।

अभी 60 सिलिंडर ऑक्सीजन की रोज खपत, वेंटिलेटर में दो गुना होगी
बताया गया है कि 75 बीएड वाले सदर अस्पताल के कोवीड केयर सेंटर में 60 सिलिंडर ऑक्सीजन की रोज खपत है। वह भी तब जब 33 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर संचालित है। इतनी मात्रा में ऑक्सीजन किसी तरह मिल पा रहा है। यदि वेंटिलेटर शुरू हुआ तो दुगनी ऑक्सीजन की जरूरत होगी। कहा जा रहा है कि हर दिन 60-65 सिलिंडर की सप्लाई हो रही है। किसी कारण से ऑक्सीजन की सप्लाई एक दिन नही हो पाई तो कितनी जिंदगी खतरे में आ जाएगी।

हैंड्स की कमी भी बड़ा रोड़ा
जानकर बताते हैं कि वेंटिलेटर का संचालन मूलतः एनेस्थेटिक डॉक्टर का दायित्व होता है। जिला अस्पताल में महज एक ही ऐसे चिकित्सक रजनीकांत हैं। अस्पताल के आधिकारिकजन का कहना है रिलीफ फंड से मिली वेंटिलेटर खराब पड़ी है। स्थानीय टेक्नीशियन से दिखाया गया।

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