कोरोनावायरस / कोराेना की कड़वाहट रिश्तों में घोल रहा मिठास, सात समन्दर पार अपनों का पूछ रहे हाल, खत्म हो रही दूरी

The sweetness dissolving in the bitter relationships of Korena, asking the lives of loved ones across the sea, closing distance
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The sweetness dissolving in the bitter relationships of Korena, asking the lives of loved ones across the sea, closing distance

  • कोरोना लॉक डाउन में रोज के खाने के मेन्यू से लेकर बाजार और देश दुनिया के हालात पर चर्चा रूटीन में शुमार

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

भभुआ. (जितेंद्र कुमार) लॉकडाउन 4.0 चल रहा है। अब तो घरों में ही रहने की लोगों को आदत सी हो गई है। ऐसे में आमजन घरों में समय कैसे काट रहे हैं, इस मसले पर भास्कर ने कुछ घरों में जाकर पड़ताल की। सामने आया की “बहुत जरूरी, दो गज दूरी” वाला कोरोना सात समंदर पार बैठे अपनों को पहले से और करीब ला रहा है। कल तक काम में व्यस्त थे तो खास मौके पर ही बात होती थी। कोरोना ने घरों में कैद किया तो दोस्तों, रिश्तेदारों का कुशल, क्षेम जानना पहली प्राथमिकता है।

डिजिटल प्लेटफार्म पर पल पल की खबरें भी अपनों का हाल जानने की बेचैनी बढ़ा रही हैं। कुछ दिन पहले भभुआ में एक युवक के कोरोना पॉजिटिव की खबर फ्लैश हुई। चंद मिनट बाद ही वार्ड 18 की सुषमा तिवारी के मोबाइल की घंटी घनघनाते लगी। कॉल अमेरिका के वर्जीनिया से बिन्नी राज की थी। बिन्नी ने पूछा, मौसी भभुआ में कोराना पेशेंट मिलने की खबर चल रही है, क्या हालचाल है। सुषमा जी ने बताया कि वार्ड 18 में ही मिला है। ये कंटोनमेंट जोन बन गया है। अब ये काल हर दिन आ रही है।

सिंगापुर से भतीजा अमित भी आजकल रोज सुषमा जी का हालचाल लेे ही लेता है। वहां भी कोरोना प्रकोप से अमित अभी वर्क ग्राम होम में है।ये तो एक उदाहरण है। कोरोना लाक डाउन में हर घर की यही कहानी है। अपनों से बातचीत का सिलसिला लंबा चल रहा है। रोज के खाने के मेन्यू से लेकर बाजार और देश दुनिया के हालात पर चर्चा रूटीन में शुमार हो गया है।
होली में घर आई दो बहनें लॉक डाउन में कत्थक की कर रही प्रैक्टिस
न्याशा और सताक्षी श्रीवास्तव दोनों सगी बहनें हैं। जो लॉक डाउन में समय काटने के लिए अपने घर में ही कत्थक नृत्य की प्रैक्टिस कर रही हैं। दरअसल इनके पिता सुशील कुमार श्रीवास्तव और माता मूल रूप से बक्सर टाउन के रहने वाले हैं, जो बीते दो दशक से भभुआ शहर में किराए का फ्लैट लेकर रहते हैं। पिता सुशील कुमार श्रीवास्तव व्यवहार न्यायालय भभुआ में कार्यरत हैं।

भास्कर से बातचीत में दोनों बहनों में शामिल बड़ी बहन न्याशा श्रीवास्तव ने बताया कि वह आईएससी की पढ़ाई पूरी कर पटना में रहकर क्लैट के साथ कत्थक नृत्य की तैयारी करती है जबकि छोटी बहन सताक्षी श्रीवास्तव ने कहा कि वह वनस्थली यूनिवर्सिटी राजस्थान से पढ़ाई के साथ कत्थक को अपने सिलेबस में शामिल की है। दोनों बहनें होली की छुट्टी में घर आई थीं। वे बताती हैं कि रिहल्सल की चेन टूटे न इसलिए वे नित दिन कत्थक कर रही हैं।

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