जनजागरण यात्रा:एक के हाथ में कभी नहीं रहती सत्ता: पूर्व विधायक

भगवानपुर हाट16 दिन पहले
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  • पदयात्रा में शामिल किसानों का भगवानपुर हाट में किया गया स्वागत, यात्रा की महत्ता बतायी
  • लोकनीति सत्याग्रह किसान जनजागरण पदयात्रा के माध्यम से किसान कानून काे वापस करने की उठी मांग

महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह से प्रेरणा लेकर देशभर के किसानों ने मोतिहारी के पूर्वी चंपारण बापू धाम से 2 अक्टूबर से लोकनीति सत्याग्रह किसान जनजागरण पदयात्रा करते हुए सैकड़ाें किसानों का जत्था बुधवार की शाम में भगवानपुर हाट प्रखंड मुख्यालय स्थित भागवानपुर महाविद्यालय में पहुंचा। संयुक्त किसान मोर्चा के तहत आयोजित इस पदयात्रा में किसानों द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगे रहे थे तथा तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे थे। भगवानपुरहाट में इस पदयात्रा का पूर्व विधायक मानिकचंद्र राय,राजद के प्रदेश महासचिव रविन्द्र राय,मुखिया मनोज साहनी,उपेंद्र सिंह,ललित मोहन,आलमगीर खां, लडन खां, बलिराम राय,दिनेश शर्मा के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। प्राे. रविंद्र राय के द्वारा किसानों के रात्रि विश्राम व भोजन का प्रबंध किया था। किसान पदयात्रा में प्रखंड के किसान शामिल हुए।

700 किसान हाे गए शहीद: किसान नेता अक्षय कुमार ने बताया कि किसान बीते ग्यारह महीने से दिल्ली में जमे हुए है। जिसमे सात सौ से अधिक किसान शहीद हो गए है।लेकिन प्रधानमंत्री को फुर्सत नहीं मिल रहा है किसानों मिलने का। उन्होंने ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसानों की नहीं है यह लड़ाई बेईमानो से देश को बचाने की लडाई है।उन्होंने ने कहा कि किसान 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री से 10 सवालों को लेकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणासी तक पदयात्रा करेगी। पदयात्रा में उड़ीसा, केरला,मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार सहित 20 प्रदेशों के एक हजार से अधिक किसान प्रतिनिधि शामिल हैं।

कृषि कानूनों काे वापस लेने के लिए हाे रहा आंदोलन
तीनों कृषि कानून के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए पदयात्रा पर निकले किसानों काे पूर्व विधायक मानिकचंद्र राय ने संबोधित किया। उन्होंने ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश में किसान तीनों कृषि कानूनों वापस लेने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ ग्यारह महीने से आंदोलन कर रहे है। लेकिन देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान नहीं जा रहा है। सत्याग्रह के 104 साल व आजादी के 75 साल के बाद एक बार फिर सारे देश में भारत के किसानों पर अनुबंध पर कारपोरेट का हवाले करने के लिए काला कानून केंद्र सरकार लाई है। इससे देश की खेती चौपट होगी। किसान तबाह हो जाएंगे।

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