पापा ने बेटी को कहा 'बाय', फिर वापस नहीं आए:दोनों हाथों से दिव्यांग है संजीत की बेटी, पापा ही थे उसके सहारा

आरा5 महीने पहले
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संजीत की फाइल फोटो। साथ में उनकी पत्नी और बड़ी बेटी सृष्टि। - Dainik Bhaskar
संजीत की फाइल फोटो। साथ में उनकी पत्नी और बड़ी बेटी सृष्टि।

भोजपुर के दियारा बालू घाट का इलाका वर्चस्व की लड़ाई में एक बार फिर खून से लाल हो गया है। कोईलवर थाना क्षेत्र के राजापुर-कमालुचक बालू घाट पर कल हुई गोलीबारी की घटना में एक ऐसी बेटी ने अपना पिता खो दिया, जो दोनों हाथों से दिव्यांग है। उसके पिता ही उसका सहारा थे।

बालू घाट पर पूजा में शामिल होने गए, आया शव

गोलीबारी में मारे गए 40 साल के संजीत कुमार पटना के नौबतपुर थाना क्षेत्र के बसौड़ा गांव निवासी थे। वर्तमान में उनका पूरा परिवार आरा के नवादा के रामनगर हाउसिंग में रहते थे। साथ में पत्नी श्वेता कुमारी, बड़ी बेटी सृष्टि (11), एक छोटा बेटा शौर्य प्रकाश (6) रहता था। दोनों की शादी साल 2008 में हिन्दू रीति-रिवाज से हुई थी।

संजीत के बेटे-बेटी।
संजीत के बेटे-बेटी।

संजीत सासाराम में डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर थे। आधार-पैन कार्ड बनाने का काम करते थे दो दिन पूर्व ही आरा आए थे। शुक्रवार को बालू घाट पर हो रही पूजा में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन इस बार प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। घटना की जानकारी मिलने के बाद बेटी और पत्नी बदहवास अवस्था में भागे-भागे आरा सदर अस्पताल पहुंच गए।

शव को देखते ही बेटी रो-रोकर बोलने लगी- पापा मैं आ गई, उठ जाओ पापा। पत्नी ने कहा- बोले कि पूजा में जा रहे हैं। किसकी पूजा में जा रहे हैं, उन्होंने बताया नहीं। सिर्फ बोले कि पूजा में जा रहे हैं। जब समय पर वापस नहीं लौटे, तब जाकर हमलोगों ने 20 से ज्यादा बार मोबाइल पर फोन किया। लेकिन कोई नहीं उठाया। काफी देर के बाद कोईलवर थाना की पुलिस ने फोन उठाया और कहा कि आपके पति को गोली लग गई है। अब वो इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन मुझे विश्वास नहीं हो रहा था।

पत्नी ने तब पुलिस वालों से हुलिया पूछा कि वो क्या पहने हैं। बताया गया कि ब्लू कलर का स्वेटर पहने हैं और लंबे-चौड़े हैं। पुलिस द्वारा बताया गया कि घाट पर बहुत ज्यादा फायरिंग हुआ है। उसी में गोली लगा है।

घाट पर मारे गए दोनों लोगों के शव। ब्लू कलर के स्वेटर में संजीत।
घाट पर मारे गए दोनों लोगों के शव। ब्लू कलर के स्वेटर में संजीत।

बेटी सृष्टि ने कहा - पापा बोले कि जा रहे है बेटा 'बाय'। पापा से मैंने पूछा कि आप कहां जा रहे हैं। पापा ने बोला कि पूजा में जा रहे हैं। मेरा ट्यूशन का टाइम हो रहा था, तब मैं चली गई। जब घर आई तो मम्मी, पापा को फोन लगा रही थी, लेकिन पापा फोन नहीं उठा रहे थे। मम्मी बोली कि लगता है, पापा को कुछ हो गया है। मैंने बोला कि पापा को कुछ नहीं हुआ है। मम्मा मत रो। पापा को कुछ नहीं हुआ होगा कुछ देर बाद पुलिस अंकल ने फोन किया और कहा कि आपके पापा की डेथ हो गई है। मेरे पापा ही हम लोगों के लिए सहारा थे।