कोरोना संक्रमितों तक दवा पहुंचा रहे पोस्टमैन:आरा में अब तक 106 मरीजों तक पहुंचाई किट; बोले- डर लगता है, लेकिन जनता की सेवा भी कर्तव्य

भोजपुर4 महीने पहले

1977 में रिलीज हुआ एक गाना आपने सुना होगा 'डाकिया डाक लाया.. खुशी का पैगाम लाया.. इस गाने में डाकिया डाक लेकर घर-घर जाते हुए नजर आते हैं। लेकिन 21वीं सदी के डिजिटल युग में अब ऐसा नजारा शायद ही देखने को मिलता है। वहीं, अब बिहार में बढ़ते कोरोना केस को देखकर डाक विभाग को एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। हालांकि पिछले कोरोना काल मे भी डाक विभाग का सराहनीय कदम रहा था।

आमतौर पर डाक विभाग पार्सल और लेटर ले जाने या ले आने का कार्य करती है। लेकिन अब कोरोना काल में डाक विभाग ने जीवन रक्षक सेवा का रूप धारण कर लिया है। कोरोना संक्रमितों की जिंदगी बचाने वाली विशेष दवाइयां एवं उपकरण को इस महामारी के समय डाकिया (Postman) आपके घर तक पहुंचाने का काम रहें है ।

कोरोना काल में जन सुरक्षा और सेवा में स्वास्थ्य विभाग, सफाई कर्मी, पुलिसकर्मी और मीडिया कर्मी फ्रंटलाइन वॉरियर्स के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे है। ऐसे वैश्विक महामारी में लोगों के सुरक्षा में डाक विभाग भी अपना पूरा योगदान दे रहा है। डाक विभाग (डाकिया) लोगों को उनके घर तक डाक, पार्सल पहुंचाते थे। परन्तु इस संकट में डाकिया अपनी जिम्मेदारी के अलावा कोरोना संक्रमितों के घर तक दवाइयां (कोरोना कीट) पहुंचा रहे है। डाक विभाग, भोजपुर के द्वारा अभी तक 111 में 106 कोरोना संक्रमित लोगों के घर तक दवाइयां (कोरोना किट) पहुंचाने का काम किया है। क्या दिन,क्या रात हर समय तत्पर और निडर होकर डाक विभाग और उनके कर्मचारी (डाकिया) जी जान से लगे है ।

हेड पोस्ट ऑफिस, आरा।
हेड पोस्ट ऑफिस, आरा।

आरा हेड पोस्ट ऑफिस में पदस्थापित डाकिया (पोस्टमैन) अविनाश कुमार लगभग 8 सालों से डाक, पार्सल पहुंचाने का काम करते है। अविनाश ने बताया कि हम लोग जनता की सेवा में हमेशा तत्पर रहते है। ऐसे में कोरोना काल में हम लोग घर-घर जाकर जनता की सेवा करते है। रिस्क तो है.. ये समझते हुए भी है। लेकिन क्या करें जनता की सेवा करना भी कर्तव्य है।

शहर के साथ गांव में दूर-दूर जाकर हम लोग जनता की सेवा में लगे रहते है। कोरोना की दवा (कोरोना किट) उन लोग जो कोरोना संक्रमित है। उनके घर जाकर पहुंचाते है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मास्क, हाथ मे गल्पस और सैनिटाइजर का उपयोग करते है। इतनी सावधानी के बाद भी रिस्क है,जन सेवा करना है तो डर नहीं लगता।

भोजपुर डाक प्रमंडल के डाक अधीक्षक सिद्धेश्वर कुमार ने बताया कि हम लोग दिन हो रात जरूरतमंद लोगों को दवाइयां पहुंचाने का काम करते है। स्वास्थ्य विभाग, बिहार से भारतीय डाक विभाग, बिहार सर्कल एक समझौता किया। जो भी कोरोना संक्रमित हुए और घर पर आइसोलेट है। उनके घर तक मेडिकल किट पहुंचा रहे है। मेडिकल किट स्वास्थ्य विभाग, बिहार द्वारा जो बिहार मेडिकल सर्विस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के द्वारा पटना में उपलब्ध कराई जा रही है। उन कोरोना संक्रमित के लिस्ट, लिस्ट के हिसाब से मरीजों के घर तक हमारे डाकिया पहुंचाने का काम कर रहे है। हमारे डाकिया को भी संक्रमित होने का डर है, लेकिन सभी गाइडलाइन का पालन कराते हुए जन सेवा में लगे है।

अधीक्षक सिद्धेश्वर ने बताया कि पिछले कोरोना काल में भी हमारे डाकिया पैसे, दवा जैसे जरूरत चीजे के साथ-साथ भोजन भी पहुंचाई थी । मुझे उम्मीद है इस बार भी हमारे डाकिया निडर होकर काम करेंगे। पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी, बिहार सरकार को भी आभार व्यक्त करता हूँ कि वो मरीजों के घर तक दवाइयां पहुंचने की सोची है और डाक विभाग को जिम्मेदारी दी है की डाक विभाग ये काम कर सकता है। निश्चित ही डाक विभाग सरकार की उम्मीद पर खड़ा उतरेगा ।

कोरोना संक्रमित के परिजन ने कहा कि डाक विभाग के द्वारा ये सराहनीय कदम है,इस महामारी में लोग घर से नहीं निकलना चाहते और डाक विभाग घर तक दवाइयां पहुंचाने का काम कर रही है । इस मुहिम के लिए डाक विभाग को धन्यवाद देते है।