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कोरोना काल में हुई थी गलती:घरवालों ने जिसका कर दिया था श्राद्ध वह दो महीने बाद निकला जीवित

बिदुपुर2 महीने पहले
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  • आसाम के कोकराझार में परिवार के साथ रह रहा था अधेड़, कोविड होने के बाद अस्पताल ने परिवार को दे दी थी मौत की सूचना, कोविड नियमों के तहत वहीं जला भी दिया था

कोरोना से पति की हुई मौत के बाद पत्नी विधवा की जिंदगी जी रही थी। मृत पति का वह मुंह भी नहीं देख पाई थी। अस्पताल वालों ने शव जला दिया था। घरवालों ने भी अंतिम संस्काार के तहत पुतला जला श्राद्ध कर दिया था। अचानक दो माह बाद उस व्यक्ति ने घरवालों को फोन कर भौंचक कर दिया। जानिए, क्या हुई थी घटना: बिदुपुर थाना क्षेत्र के बिदुपुर गांव निवासी राधेश्याम झा का 45 वर्षीय पुत्र अजीत कुमार झा अपनी पत्नी और पुत्री के साथ आसाम के कोकराझार जिले में रहता था। अजीत सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था। बीते साल अक्टूबर अंतिम सप्ताह में उसमे कोरोना संक्रमित हो गया था। जांच में पुष्टि के बाद उसे एमजीआई अस्पताल कोकराझार में रेफर कर दिया गया। कोरोना संक्रमित होने के कारण अस्पताल में आम लोगों से भेट मुलाकात पर पाबंदी थी। परिजन बाहर से अजीत के कुशल क्षेम की जानकारी लिया करते थे।

अजीत को 08 नम्बर बेड अलॉट था। 16 नवम्बर को जब पत्नी अस्पताल में अजीत का हाल चाल जानने गई तो उसे बताया गया कि 08 नम्बर बेड के पेशेंट की मौत हो चुकी है। सरकारी व्यवस्था के अनुसार शव को मेडिकलकर्मियों की देखरेख में जला दिया गया। अस्पताल द्वारा शव को दाह-संस्कार के लिए ले जाने का वीडियो भी दिखाए। 17 नवम्बर को कोकराझार में रह रही पत्नी और बेटी के द्वारा बिदुपुर अजीत के पिता को घटना की सूचना मोबाइल से दी गई।

फोन पर निकल गई हर्ष मिश्रित चीख
दो माह पहले जिसकी मौत हो गई हो और उसके श्राद्ध भी कर दिया हो, अगर वहीं व्यक्ति दूसरी ओर फोन पर उपलब्ध हो तो कॉल रिसीव करने वाले परिजन की क्या हालत हुई होगी। दरअसल, अजीत ने ठीक होते ही अस्पताल से सबसे पहले अपनी पत्नी को फोन किया। फोन रिसिव करने के बाद उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह हकीकत है या फिर वह सपना देख रही है। कुछ देर बाद जब वह अस्पताल से लौटा तो खुद के सामने पति को जीता-जागता भी पाया तो वह तय नहीं कर पाई की दहाड़ें मारकर रोए या खुशी से चीख पड़े। उसकी आंखें सावन-भादो बनकर बरस पड़ीं। अजीत भी पत्नी को विधवा की हालत में देख सन्न था।

घरवालों ने भी कर दिया श्राद्ध|मृतक की पत्नी ने कोकराझार में श्राद्ध की आरंभिक क्रियाकर्म कर बिदुपुर लौट आई। समाज के लोग जुटे व रायशुमारी की। कहा गया घटना दुखद है। सवाल अकाल मृत्यु का है। भटकती आत्मा को सद्गति मिले इसलिए विधिवत श्राद्ध होना चाहिए। विधान के अनुसार शव न होने की स्थिति में मृतक अजीत का प्रतीकात्मक पुतला श्मशान ले जाकर जलाया गया। श्राद्धकर्म व श्राद्ध भोज पर एक लाख का खर्च भी आया।

8 नम्बर बेड ने खड़ा किया बखेरा
इसे अस्पताल की लापरवाही कहें या अजीत की पत्नी की गलतफहमी, जिससे इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया। इस बखेड़े की जड़ में 8 नम्बर बेड जरूर है। अजीत ने मोबाइल पर हुई बातचीत में जानकारी दी की यह सारी लापरवाही अस्पताल की थी। दरअसल, उसे कोरोना होने पर अस्पताल में 8 नम्बर बेड दिया गया था। उसकी हालत सीरियस होने पर वेंटिलेशन पर रखा गया था। बेड खाली होने पर दूसरे किसी पेशेंट को 8 नम्बर बेड दे दिया गया था और उस पेशेंट की मौत हो गई थी। इसी बीच पति का हाल-चाल लेने गई पत्नी और बेटी को गलत जानकारी दी गई। हो सकता है पत्नी ने 8 नम्बर बेड के पेशेंट के बारे में पूछा हो और उसकी मौत हो गई बताया गया हो। वहीं, वेंटिलेशन से निकलने के बाद उसे दूसरे बेड पर शिफ्ट किया गया। 8 जनवरी को जब वह अस्पताल से रिलीज होकर आवास कोकराझार पर पत्नी, बच्ची के पास पहुंचा तब उसे लोग देखकर हैरान हो गए।

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