विरोध:पीएम मोदी की हत्या के प्रयास की साजिश में कांग्रेसी हाथ के सबूत आये सामने : राजीव

बिहारशरीफ16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

पंजाब प्रकरण को लेकर कांग्रेस पर हमला करते हुए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि देश के पीएम की हत्या के प्रयास में किसी राजनीतिक दल का हाथ सामने आना उस दल के लिए डूब मरने वाली बात होनी चाहिए। लेकिन सारे लोक-लिहाज को तिलांजलि देकर कांग्रेस के नेता अभी भी बेशर्मी से पंजाब सरकार का बचाव करने में लगे हैं। यह दिखाता है कि पीएम मोदी की हत्या के प्रयास की साजिश की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं। कांग्रेस के रवैये से यह साफ है कि साजिशकर्ताओं को सीधे गांधी परिवार का वरदहस्त प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस घटना के दो दिन बाद जितनी भी बातें उभर कर सामने आयी हैं, उससे सीधे तौर पर पीएम की हत्या की इस साजिश में कांग्रेस की संलिप्तता उजागर होती है। पीएम को हेलिकॉप्टर से जाना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण उन्हें सड़क मार्ग से ले जाया गया। महज 20 मिनट में हुए इस बदलाव की खबर और पीएम के सड़क मार्ग की सटीक जानकारी प्रदर्शनकारियों तक पहुंच जाना, सरकार और प्रशासन की मिलीभगत के बिना मुमकिन ही नहीं है। मीडिया के मुताबिक कई प्रदर्शनकारियों ने यह माना है कि उन्हें इसकी जानकारी पुलिस से ही मिली। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राज्य के डीजीपी द्वारा रास्ता साफ़ होने की झूठी जानकारी देते हुए पीएम के काफ़िले को जमीन से तकरीबन 40 फिट ऊपर एक फ्लाईओवर पर रुकवाया गया, जहां वह आसानी से निशाने पर लिए जा सके। गौरतलब हो कि वह इलाका पाकिस्तान से महज चंद किलोमीटर दूर और पाकिस्तानी तोपों और ड्रोन के दायरे में था। इसके अतिरिक्त कुछ प्रदर्शनकारी पीएम के काफ़िले के 7-8 मीटर तक के दायरे तक भी पहुंच गये थे, जहां से उनपर हैण्डग्रेनेड या अन्य हथियार भी फेंके जा सकते थे। शुक्रिया अदा करना चाहिए एसपीजी के जवानों का जिनकी तत्परता ने साजिशकर्ताओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया, नहीं तो सेकेंड अटैक के तौर पर कुछ भी हो सकता था। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर पर फंसने के बाद पीएम के सुरक्षाकर्मियों द्वारा पंजाब के सीएम और सीएस दोनों को कई बार फोन लगाया गया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके अलावा सीएम, सीएस और डीजीपी तीनों का ही पीएम के काफ़िले से गायब रहना यह साबित करता है कि इन्हें आगे के घटनाक्रम का पहले से अंदाजा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मासूम किसानों के रूप में पहले ही बलि का बकरा भी तैयार करके रखा हुआ था। उनके अनुसार पीएम के काफ़िले को रोकने वाले किसान थे, जबकि किसानों के मामले पटाक्षेप पहले ही हो चुका है। जिससे किसान भी संतुष्ट हैं। कृषि कानून वापस हो चुके हैं और कमिटी भी बनाई जा चुकी है। यह भी साफ़ हो चुका है कि घटनास्थल पर प्रदर्शन करने वाले कोई किसान नहीं थे, बल्कि उनके भेष में कांग्रेसी कार्यकर्ता थे। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी अब निर्लज्जता की सारी सीमायें लांघ चुकी है और अब अपने फायदे के लिए इन्हें पीएम की हत्या करवाने से भी गुरेज नहीं है।

खबरें और भी हैं...