खेती में जुटे हैं किसान:20 दिनों में खरीफ फसल की रोपनी में हुई वृद्धि, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कम

बिहारशरीफ2 महीने पहले
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धान की रोपाई में जुटे किसान, जिले के नुरसराय्र राजगीर, बेन और हिलसा में रोपनी पूरी हो चुकी है। - Dainik Bhaskar
धान की रोपाई में जुटे किसान, जिले के नुरसराय्र राजगीर, बेन और हिलसा में रोपनी पूरी हो चुकी है।
  • 1-19 जुलाई तक 22.43 तो 20 जुलाई से 7 अगस्त तक 94.62 प्रतिशत हुआ आच्छादन
  • बढ़ेगी पैदावार नुरसराय हिलसा राजगीर और बेन में रोपनी हुई पूरी
  • 20 दिनों में धान की रोपनी में 72 प्रतिशत की हुई वृद्धि

इस बार विपरीत मौसम के बावजूद किसानों ने मेहनत कर रोपनी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। समय से पूर्व अधिक और समय पर कम वर्षापात होने के बावजूद खरीफ मौसम में सभी फसलों के आच्छादन में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में अभी भी आच्छादन का औसत दर कम है। हालांकि इस वर्ष समय से पूर्व बारिश होने के कारण जल स्तर में भी बढ़ोत्तरी हुई है। साथ ही बिजली की बेहतर उपलब्धता के कारण किसानों को धान आच्छादन के लिए बारिश पर कम निर्भर रहना पड़ा है। इसका असर भी रोपनी पर दिख रहा है। विभागीय आंकड़ों को देखा जाय तो खरीफ फसल आच्छादन की स्थिति काफी अच्छी है। धान आच्छादन की बात करें तो विगत 20 दिनों के दौरान आच्छादन में तेजी से वृद्धि हुई है। 1-19 जुलाई तक मात्र 22.43 प्रतिशत आच्छादन हुआ था। वहीं 20 जुलाई से 7 अगस्त तक 94.62 प्रतिशत आच्छादन हो चुका है। 20 दिनों के दौरान 72.19 प्रतिशत आच्छादन हुआ है। इसके अलावा सभी फसलों के आच्छादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है। चार प्रखंड नुरसराय, राजगीर, बेन आैर हिलसा में रोपनी का काम पूरा हो चुका है। 11 प्रखंडों में 90 प्रतिशत से अधिक धान का आच्छादन हो चुका है। शेष अन्य प्रखंडों में भी 80 प्रतिशत से ज्यादा आच्छादन हो चुका है। 1-19 जुलाई की रिपोर्ट को देखा जाय तो सिर्फ एकंगरसराय में 61 प्रतिशत धान की रोपनी हुई थी। इसके अलावे सभी प्रखंडों में 50 प्रतिशत से नीचे आच्छादन हुआ था।

पिछले वर्ष की तुलना में कम हुआ आच्छादन : 2020 में 4 अगस्त तक 98.68 प्रतिशत के साथ रोपनी की प्रक्रिया समाप्त हो गई थी। जबकि इस वर्ष 7 अगस्त तक 94.62 प्रतिशत आच्छादन हुआ है। डीएओ संजय कुमार ने बताया कि इस वर्ष भी मॉनसून काफी अच्छा साथ दे रहा है। आच्छादन की स्थिति भी अच्छी है। पिछले वर्ष 98.68 प्रतिशत पर ही रोपनी समाप्त हो गया था।

अभी भी कम वर्षापात
जुलाई माह में 252.8 एमएम बारिश होनी चाहिए थी लेकिन 182.16 एमएम ही बारिश हुई है। यानि 27.94 एमएम कम बारिश हुई है। अगस्त माह में 5 अगस्त तक 45.6 एमएम बारिश होनी चाहिए थी । लेकिन 33.8 एमएम बारिश हो पाई है। 25.81 एमएम कम बारिश हुई है। विगत दस सालों की तुलना में 2011 को छोड़ सभी सालों में 2020 में सबसे ज्यादा बारिश हुई है।

ऑनलाइन की जा रही रिपोर्टिंग : डीएओ ने बताया कि रिपोर्टिंग में भी पारदर्शिता बरती जा रही है। सभी प्रखंडों से ऑनलाइन रिपोर्टिंग की जा रही है। कृषि समन्वयकों को संबंधित पंचायतों में किसानों के खेतों पर जाकर आच्छादन का रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

दस सालों में वर्षापात की रिपोर्ट
वर्ष वर्षापात(mm)
2010 650.33
2011 1129.34
2012 701.76
2013 784.05
2014 1038.82
2015 671.825
2016 710.02
2017 703.41
2018 698.15
2019 938.57
2020 1150.69

किस प्रखंड में कितना आच्छादन
प्रखंड 1-19 जुलाई 20 जुलाई- 7अगस्त
बिहारशरीफ 7.32 99.64
अस्थावां 6.40 88.03
बिंद 3.17 93.86
हरनौत 41.37 93.76
सरमेरा 6.10 82.72
नुरसराय 10.96 103.39
रहुई 27.04 86.10
राजगीर 94.84 100.36
सिलाव 72.60 87.58
बेन 90.86 108.04
गिरियक 47.31 86.44
कतरीसराय 85.92 90.88
हिलसा 97.40 102.39
करायपरसुराय 91.19 93.83
चंडी 91.38 99.12
थरथरी 95.82 96.44
नगरनौसा 87.00 95.57
एकंगरसराय 87.40 90.06
परवलपुर 81.11 89.36
इसलामपुर 92.56 99.73

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