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नवरात्र:आज डोली पर मां दुर्गा का आगमन, नौ दिनों तक शक्ति की भक्ति में डूबे रहेंगे लोग

बिहारशरीफ15 दिन पहले
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भक्ति, शक्ति, आस्था और वसुधा का नौ दिवसीय महापर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहा है। अगले 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाएगी। दसवें दिन दशहरा मनाया जाएगा। कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक ही जिले के सभी देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में मां की आराधना के लिए तैयारियां पूरी कर ली गयी है।

ज्योतिषाचार्य पंडित मोहन दत्त मिश्र ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा डोली पर आ रही हैं और भैंसे पर वापस जाएंगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार दोनों ही समाज हित में उत्तम नहीं है। शास्त्रों के अनुसार जब माता डोली पर आती हैं तो यह देश में तनाव का संकेत होता है और जब भैंसे पर विदा होती हैं तो यह रोग और शोक का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि 17 को प्रतिपदा अर्थात घट स्थापना की जाएगी। प्रतिपदा से लेकर दशमी तक मां की आराधना की जाएगी। सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की भक्ति का दस दिवसीय अनुष्ठान शुरू होगा। आज घरों, मंदिरों और पूजा-पंडालों में कलश स्थापना की जायेगी। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा होगी। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्रि में धन लक्ष्मी योग, द्वि पुष्कर योग, अमृत योग के साथ सर्वार्थसिद्धि और सिद्धियोग का संयोग भी बन रहा है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा अर्थात 17 अक्टूबर को कलश स्थापना व ध्वजारोपण के लिए शुभ समय सुबह 6.30 बजे से शाम तक एवं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11.36 से 12.24 बजे तक है। पं. मिश्र ने बताया कि चित्रा व वैद्धति का योग प्रात: काल में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को बन रहा है। अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ होगा।
कलश स्थापना: पूजा स्थल पर लकड़ी के पटरे पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश का नमन कर अक्षत रख दें। कलश की जगह पर करीब 1 फीट की गोलाई में मिट्‌टी बिछाकर उसमें जौ बो दें और मिट्‌टी के बीच में कलश रख दें। फिर रोली से स्वास्तिक व ऊं बनाकर रक्षासूत्र बांधें। कलश में सुपारी, अक्षत, फूल, पंचरत्न और सिक्का डालकर आम पत्र रख मुख को ढकनी से ढंक दें।

अखंड दीप जरूर जलायें : दुर्गा सप्तशती के अनुसार नवरात्र की अवधि में अखंड दीप जलाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जिस घर में अखंड दीप जलता है वहां माता की विशेष कृपा होती है। हालांकि इसके कुछ विशेष नियम भी निर्धारित हैं। अखंड दीप जलाने वाले व्यक्ति को जमीन पर ही बिस्तर लगाकर सोना पड़ता है। किसी भी हाल में अखंड दीप नहीं बुझना चाहिए।

पूजा में करें उपयोग: मिट्‌टी के पात्र और जौ के दाने, शुद्ध साफ मिट्‌टी, शुद्ध जल, सोना, चांदी तांवा या मिट्‌टी का कलश, लाल सूत्र मौली, आम पत्र, ढंकनी, अच्छत, पानी वाला नारियल, कलश में डालने के लिए सिक्के, चुनरी या लाल कपड़ा, मिटाई, फल, लाल उड़हुल का फूल आदि। कोरोना को देखते हुए इस वर्ष दुर्गापूजा कमेटी ने दशमी तिथि को ही सभी प्रतिमा का विसर्जन करने का निर्णय लिया है।

किस दिन लगायें क्या भोग
वैसे तो मां दुर्गा का सभी रूप भक्तों को आर्शीवाद और कल्याणदायक है फिर भी ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मां के विभिन्न रूपों के लिए कुछ खास भोग लगाये जाने चाहिए।

  • पहला दिन- मां शैलपुत्री की कृपा के लिए गौ को भोग लगाने से आरोग्य मिलता है।
  • दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  • तीसरा दिन- मांता चन्द्रघंटा को दूध और खीर का भोग लगाने से दुख का निवारण होता है।
  • चौथा दिन- कुष्मांडा माता को मालपुआ का भोग लगाने से निर्णय और तर्कशक्ति का विकास होता है।
  • पांचवां दिन- मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाने से बौद्धिक विकास होता है।
  • छठा दिन- कात्यायनी माता को शहद का भोग लगाने से सुन्दर शरीर की कामना पूरी होती है।
  • सातवां दिन- माता कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने से विपत्ति से मुक्ति मिलती है।
  • आठवां दिन- मां महागौरी को नारियल का भोग लगाने से सभी तरह के पीड़ा का नाश होता है।
  • नौवां दिन- माता सिद्धिदात्री को धान का भोग लगाने से आत्मबल में वृद्धि होती है।

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