राष्ट्रीय हथकरघा दिवस:नालंदा के बावन बूटी साड़ी की मांग देशभर में

बिहारशरीफ3 महीने पहले
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  • नाबार्ड व ज़िला उद्योग केंद्र का बसवन बिगहा हथकरघा वर्कशॉप परिसर में कार्यक्रम

नाबार्ड व ज़िला उद्योग केंद्र द्वारा बसवन बिगहा हथकरघा वर्कशॉप परिसर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हथकरघा क्लस्टर से जुड़े बुनकर अपने उत्पादों के साथ शामिल हुए। इस मौके पर ज़िला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सत्येंद्र चौधरी ने बताया कि हथकरघा के क्षेत्र में नालंदा की सूबे में एक अलग पहचान है। यहां की बावन बूटी साड़ी की मांग न केवल राज्य बल्कि पूरे देश भर में है। उन्होने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा देश भर में हथकरघा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं चलायी जा रही हैं। जिसके तहत उन्हे हथकरघा से संबंधित कार्यों के लिए 25 से 35 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होने सभी बुनकरों के साथ प्रधानमंत्री के माय हैंडलूम माय प्राइड नारे को साझा किया। जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से हथकरघा उत्पादों को इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया है। कोविड के कारण बुनकरों को अपने उत्पाद विक्रय में दिक्कत आ रही है और इसके समाधान के लिए बुनकर क्लस्टर से बात की जा रही है।

हथकरघा से आत्मनिर्भरता का नारा लगा
उन्होने बताया कि हथकरघा उद्योग को एक नया आयाम देने के लिए नाबार्ड ने इस वर्ष “हथकरघा से आत्मनिर्भरता” का नारा दिया है। इसके तहत नाबार्ड बुनकरों को एकजुट कर उन्हें उत्पादक संगठन के तौर पर काम करने के लिए सहायता देगा। यदि जिले में बुनकर आगे बढ़कर एक उत्पादक संगठन का गठन का करते हैं तो यह योजना उनके लिए एक वरदान साबित होगी। उन्होने सभी बुनकरों से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बैंक से ऋण लेने का आग्रह किया और ऋण को समय पर चुकता करने का भी सुझाव दिया। कार्यक्रम में बसवन बिगहा बुनकर क्लस्टर अध्यक्ष लाखो देवी, बुनकर कपिल प्रसाद आदि शामिल थे।

सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है हथकरघा। नाबार्ड के ज़िला विकास प्रबंधक अमृत बरनवाल ने कहा कि हथकरघा सेक्टर देश की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। नालंदा बुनकर उत्पादों के क्षेत्र में देश में अपना एक अलग स्थान रखता है । उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से इसे देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करवाना है। उन्होने बताया कि नाबार्ड द्वारा हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विभिन्न योजनाएं चलाई जाती रही हैं। जिसमें बुनकरों के लिए तकनीकी सहायता, हथकरघा क्षेत्र के लिए पुर्नवृत्ति शामिल है।

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