248वीं जयंती / राजाराम मोहन राय नवजागरण व समाज सुधार के प्रणेता थे

Rajaram Mohan Roy was the founder of revival and social reform.
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Rajaram Mohan Roy was the founder of revival and social reform.

  • भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत की साहित्यिक मंडली शंखनाद के तत्वावधान में मनायी गयी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

बिहारशरीफ. शहर के बबुरबन्ना मोहल्ले में शुक्रवार को सोशल डिस्टेंस का पालन कर भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन राय की 248वीं जयंती शुक्रवार को साहित्यिक मंडली शंखनाद के तत्वावधान में मनायी गयी। कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद के सचिव राकेश बिहारी शर्मा, समाजसेविका सबिता बिहारी, समाजसेवी धीरज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर सचिव श्री शर्मा ने कहा कि राजा राम मोहन राय नवजागरण व समाज सुधार के प्रणेता थे।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजा राम मोहन राय बंगला, फारसी, अरबी, संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, ग्रीक, फ्रैन्च, लेटिन आदि भाषाओं जानकार थे। उन्होंने कहा कि राजाराम सती प्रथा के खिलाफ थे। वे सती प्रथा जैसी कुरीति के उन्मूलन एवं विधवा पुनर्विवाह का मार्ग प्रशस्त किया था। राजाराम मोहान राय मूर्ति पूजा, कट्टरपंथी, धार्मिक कर्मकांडों, धर्मान्धता और अंधविश्वास के खिलाफ थे। राजा राम मोहन राय को महिलाओं के प्रति दर्द उस वक्त एहसास हुआ, जब उनकी अपनी भाभी को सती होना पड़ा।
सती प्रथा के खिलाफ 1829 में कानून बनवाया
श्री शर्मा ने कहा कि राजा राम मोहन राय किसी काम के लिए विदेश गए थे। इसी बीच उनके भाई की मृत्यु हो गई। उसके बाद समाज के ठेकेदारों ने सती प्रथा के नाम पर उनकी भाभी को जिंदा जला दिया। इसके बाद मोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन को तेज कर दिया। इसका असर देशभर में दिखा। उन्होंने समाज की कुरीतियों के खिलाफ गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक की मदद से साल 1829 में सती प्रथा के खिलाफ कानून बनवाया। उनका नाम सदैव आदर से लिया जाएगा।
रूढ़िवादी अनुष्ठानों और मूर्ति पूजा को बचपन से ही त्यागा 
शायर नवनीत कृष्ण ने कहा कि राज राम मोहन राय ने रूढ़िवादी हिंदू अनुष्ठानों और मूर्ति पूजा को बचपन से ही त्याग दिया था। जबकि उनके पिता रामकंटो रॉय एक कट्टर हिंदू ब्राह्मण थे। सविता बिहारी ने कहा कि राजा राममोहन राय की दूरदर्शिता और वैचारिकता के सैकड़ों उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं। राजा राम मोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत और आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। इस मौके पर समाजसेवी धीरज कुमार, श्वाति कुमारी आदि उपस्थित थे।

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