पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना इफेक्ट:परंपरागत कृषि योजना हुई प्रभावित, साल बीतने के बाद भी किसानों को नहीं मिला सी-वन सर्टिफिकेट

बिहारशरीफएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अधिकारियों व बीज बिक्रेताओं के साथ बैठक करते एडीएचओ। - Dainik Bhaskar
अधिकारियों व बीज बिक्रेताओं के साथ बैठक करते एडीएचओ।
  • वर्मी पीट बनाने व इनपुट वितरण का कार्य अधर में, 25 जून तक करना हाेगा पूरा

जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है। सरकार की कोशिश है कि किसान रासायनिक खाद के प्रयोग को कम कर जैविक को अपना सके। कृषि विभाग द्वारा जैविक कॉरिडोर तो उद्यान द्वारा परम्परागत कृषि योजना के तहत जैविक खेती कराया जा रहा है। जैविक केरिडोर के तहत 28 समूह को सी वन का सर्टिफिकेट मिल चूका है । लेकिन कोरोना के कारण परम्परागत कृषि योजना धरातल पर नहीं उतर सका है। एक साल बीत जाने के बाद भी किसान के उत्पादों को सी वन का सर्टिफकेट नहीं मिल पाया है।

हालांकि अब कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बाद सी वन सर्टिफकेशन के लिए फिर से प्रयास शुरू कर दिया गया है। शनिवार को सहायक निदेशक उद्यान ज्ञानचंद शर्मा ने सभी बीएचओ, बीज विक्रेताओं व संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सभी लोगों को समय सीमा के अंदर सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का उन्होंने निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि चयनित कंपनी एवं बीज विक्रेताओं द्वारा ज्यादा अनदेखी की गई है। अभी तक कंपनी द्वारा स्पॉट विजिट व वर्मी पीट का काम पूरा नहीं किया गया है। जबकि बीज विक्रेताओं द्वारा कई किसानों को इनपुट तक नहीं दिया गया है। इन लोगों द्वारा कोरोना के कारण काम प्रभावित होना बताया जा रहा है।
1326 वर्मी पीट एवं 1347 किसानों को नहीं मिला इनपुट
सहायक निदेशक ने बताया कि इस योजना के तहत कई प्रक्रिया अपनाई जानी है। खासकर जैविक उर्वरक तैयार करने के साथ-साथ किसानों को इनपुट दिया जाना है। ताकि किसान जैविक उर्वरक का प्रयोग करते हुए अच्छी पैदावार हासिल कर सके। 102 क्लस्टर के तहत 4 हजार वर्मी पीट एवं 4 हजार किसानों को इनपुट दिया जाना है। लेकिन अभी तक इन दोनो कार्यों में कई प्रखंड पीछे हैं। अभी भी 1326 वर्मी पीट बनाना बाकी है। साथ ही 1347 किसानों को बीज विक्रेता द्वारा इनपुट नहीं दिया गया है।
कंपनी की तरफ से बरती जा रही लापरवाही
सहायक निदेशक ने बताया कि परम्परागत कृषि योजना के तहत 102 क्लस्टर में जैविक खेती किया जाना है। जिसमें 72 शील वायोटेक, 18 सत्येन्द्र ऑर्गेनिक एवं 12 आदिति बिहार को योजना क्रियान्वित करने जिम्मेवारी दी गई है। लेकिन शील बायोटेक को छोड़ अन्य दोनो कंपनी द्वारा सही से काम नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सत्येन्द्र ऑर्गेनिक द्वारा अभी तक किसानों को एक्सपोजर विजिट नहीं कराया गया है। वहीं आदिति बिहार द्वारा अभी तक मिट्‌टी जांच भी नहीं कराया गया है।
25 जून तक अल्टीमेटम
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत जो भी प्रक्रिया पूरी की जानी है उसके लिए 25 जून तक अंतिम समय दिया गया है। सहायक निदेशक उद्यान ने बताया कि प्रति दिन किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश संबंधित अधिकारियो व कंपनी के प्रतिनिधियों को दिया गया है। बैठक में बीएचओ रहुई, निशांत कुमार सिंह, बीएचओ चंडी रोहित राय, बीएचओ बिहारशरीफ पूजा कुमारी, बीएचओ कतरीसराय अनिल कुमार, सीआई शम्भू कुमार अादि उपस्थित थे।

खबरें और भी हैं...