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जेजेबी के फैसलों की देशभर में चर्चा:अनोखे फैसलों ने बदली भटके बच्चों की राह

बिहारशरीफ| सुजीत कुमार वर्मा2 महीने पहले
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  • बदल दी सोच| औसतन पांच केस रोजाना निष्पादित कर लगातार तीसरी बार सूबे में अव्वल रहा अपना नालंदा
  • लॉकडाउन नहीं बनी बाधा| मात्र 101वर्किंग डे में ही जेजेबी के 433 सहित 478 मामलों का किया गया निष्पादन

जिले में बीते साल बाल अपराध कम नहीं हुए। लॉकडाउन में भी नहीं। लेकिन अच्छी बात यह रही कि जेजेबी के कई अनोखे और चर्चित फैसलों ने भटके बच्चों की राह बदल दी। इन फैसलों से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे साल में बाल अपराध से सम्बंधित कुल 573 मामले थानों में दर्ज होकर किशोर न्याय परिषद तक पहुंचा। जिसमें लगभग 281 केस पूर्णता: लॉक डाउन या आंशिक अनलॉक की अवधि में ही हुए। यह 281 मामले अप्रैल से अक्टूबर अवधि के बीच के हैं। राहत की बात यह है कि किशोर न्याय परिषद ने इन मामलों का तेजी निष्पादन किया। दर्ज 573 मामलों की तुलना में जेजेबी ने दिसंबर तक कुल 433 मामलों का निष्पादन कर दिया। निष्पादित मामलों में पेटी, सीरियस और हिनियस श्रेणी के मामले हैं। इनमें से जेजेबी के कुछ फैसलों की तो पूरे देश मे चर्चा हुई। बता दें कि पिछले साल नवंबर माह तक कुल 752 मामले दर्ज हुए थे। जबकि 739 मामलों का निष्पादन किया गया था। यदि जेजेबी के निष्पादन की गति धीमी होती तो शायद विधि विरुद्ध किशोर और बालक को रखने के लिए भी पर्यवेक्षण गृह में स्थान कम पड़ जाता। जेजेबी के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा के अनुसार बाल अपराधों का बढ़ना अभिभावक और समाज के लिए भी चिंता का विषय है। इन्हें यह सोचना होगा कि आखिर उनसे कहां चूक हो रही है। प्रशासन को भी विधि विरुद्ध बाल अपराधियों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता से काम करना होगा।
1339 केस हैं लंबित
जेजेबी में कुल 1339मामले लंबित हैं। हालांकि इनमें 10 साल पुराना एक भी मामला लम्बित नही है। 5 साल पुराना 6 मामला ही लंबित है। सामान्य तौर पर मामले न्यायालय के स्तर पर लंबित नही है। कुछ मामले डायरी और चार्जशीट के अभाव में भी लंबित है। लंबित रहने का कारण उम्र जांच में देरी और उपस्थिति में टालमटोल भी है।

टॉप पर रहा अपना जिला
जेजेबी नालन्दा 433 मामलों का निष्पादन के साथ पूरे सूबे में अव्वल रहा। 393 मामलों का निष्पादन का पटना इस बार भी दूसरे नम्बर पर है। गया तीसरे स्थान पर है।

बिहार के टॉप-10 जिले
नालंदा-433
पटना- 393
गया- 190
सारण- 149
समस्तीपुर- 121
वैशाली- 112
लखीसराय- 96
रोहतास- 88
मुजफ्फरपुर- 81
सीतामढ़ी- 70
(उक्त आंकड़े नवम्बर माह तक के हैं)

1. राष्ट्रगान सुनकर किशोर को बेल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले किशोर को किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने राष्ट्रगान सुनने और माफीनामा के बाद जमानत दे दी।

2. पहली बार जेजे एक्ट 78 के तहत मामला
किशोर न्याय परिषद के निर्देश पर 29 अप्रैल को दीपनगर थाने में जेजेबी एक्ट 2015 की धारा 78 के तहत मामला दर्ज हुआ। पहली बार थाने में प्राथमिकी हुई।​​​​​​​

3. किशोर को छोड़ा और सरकारी मदद करवाई
लॉकडाउन के दौरान मां और भाई का पेट भरने के लिए चोरी करने के आरोपी किशोर को जेजेबी के न्यायिक दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने छोड़ा आैर सरकार की योजना का लाभ दिलवाया।​​​​​​​

4. पर्यवेक्षण गृह में हुई लाइब्रेरी की व्यवस्था
फिरौती लेने के लिए अपहरण करने के दोषी चार नाबालिग को जेजेबी के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी श्री मिश्रा ने पर्यवेक्षण गृह में अपने खर्च से पुस्तकालय की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।​​​​​​​

5. थानेदार पर अपने ही थाने में दर्ज होगी प्राथमिकी : पहली बार पुलिस पदाधि कारियों पर उन्हीं के थाने में प्राथमिकी दर्ज होगी। विधि विरुद्ध बाल अपराधियों को 48 घंटे और 60 घंटे विलम्ब से जेजेबी में प्रस्तुत करने को लेकर यह कार्रवाई होगी

औसतन एक दिन में निपटाए गए 5 केस : जेजेबी नालन्दा ने औसतन एक दिन में पांच केस निपटाए हैं। मात्र 101 वर्किंग डे में ही 433 मामलों का निष्पादन किया गया। जबकि 10 फरवरी तक जेजेबी हाफ डे ही था। पिछ्ली बार 223 वर्किंग डे मे 739 केस का निष्पादन हुआ था । इस बार कोविड की वजह से बच्चे या अभिभावक ने भी आने से परहेज किया। न्यायाधीश श्री मिश्रा ने 10 फरवरी तक सब जज के रुप मे भी कार्य किया। जिसमे 4 सिविल सहित 41 दांडिक मामलों का निस्तारण हुआ था। ​​​​​​​

मॉडल बना सुधार गृह​​​​​​​

जेजेबी ने अपने कार्यशैली से विधि विरूद्ध बाल आरोपियों की सोच भी बदल दी। पर्यवेक्षण गृह न सिर्फ मॉडल बना बल्कि सुधार गृह के रूप में काम कर रहा है। पर्यवेक्षण गृह में रहते हुए सात बाल बंदियों ने इंटर की परीक्षा दी थी। चार फर्स्ट और दो सेकेंड डिविजन से पास हुए। जज ने बाल बंदियों का इस तरह भरोसा जीता है कि पर्यवेक्षण गृह में रह रहे बाल बंदी बिना किसी सुरक्षा में मैट्रिक की परीक्षा देने गये।​​​​​​​

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