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अच्छी खबर:तेल्हाड़ा में ‌~28 करोड़ से म्यूजियम बनाने का रास्ता साफ

बिहारशरीफ10 दिन पहले
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  • डीएम बाेले- प्रस्तावित भवन निर्माण के लिए कला संस्कृति विभाग को 1.5 एकड़ भूमि हस्तांतरण कर दी गई

तेल्हाड़ा उच्च विद्यालय मैदान के 1.5 एकड़ हिस्से पर 28 करोड़ रुपए की लागत से संग्रहालय निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। 6 जनवरी को डीईओ ने विद्यालय जाकर स्थलीय जांच के बाद माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को संग्रहालय भवन निर्माण के लिए भूमि का अंतर्विभागीय निःशुल्क हस्तांतरण के लिए अनापत्ति पत्र उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था।

इसके पूर्व कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर सचिव सह निदेशक और डीएम ने तेल्हाड़ा में संग्रहालय के लिए प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया था। इसके बाद डीएम ने विशेष सचिव गिरिवर दयाल सिंह को भूमि अंतर्विभागीय निःशुल्क हस्तांतरण के लिए पत्र लिखा था। डीएम योगेंद्र सिंह ने बताया कि प्रस्तावित भवन निर्माण के लिए कला संस्कृति विभाग को भूमि हस्तांतरण कर दिया गया है। अब म्यूजियम का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। उन्होने बताया कि सरकार ने पूर्व में ही तेल्हाड़ा पुरातात्विक स्थल को सुरक्षित घोषित कर दिया है। अब यह बड़े पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित होगा। यहां मिले अवशेषों को संग्रहालय में रखा जाएगा।

जमीन को लेकर था विवाद
इससे पहले संग्रहालय के लिए जो जमीन चिन्हित की गई थी वह लिंक रोड पर थी। जिसके कारण संग्रहालय के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई। इसके बाद डीएम ने तेल्हाड़ा हाईस्कूल के मैदान की जमीन का चयन किया, जो संग्रहालय के लिए उपयुक्त पाया गया। इसके बाद अंतर्विभागीय निःशुल्क हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई।

इत्सिंग ने अपने यात्रा वृतांत में की है चर्चा
चीनी यात्री इत्सिंग ने अपने यात्रा वृतांत में तेल्याधक विश्वविद्यालय का जिक्र किया है। वे कहते हैं कि यहां तीन टेम्पल थे। मोनास्‍ट्री कॉपर से सजी थी। हवा चलती थी तो यहां टंगी घंटियां बजती थीं। अब तक हुई एक वर्ग किमी की खुदाई में तीनों हॉल, घंटियां सैकड़ों सील-सीलिंग, कांस्य मूर्तियां आदि मिल चुकी हैं। जो ईंटें मिली हैं वह 42 गुना, 32 गुना, 6 से.मी. की हैं।

बिहार का तीसरा प्राचीन विश्वविद्यालय
चौथी शताब्दी के नालंदा विश्वविद्यालय और सातवीं से आठवीं सदी के विक्रम शिला विश्वविद्यालय के बाद बिहार में मिला यह तीसरा प्राचीन विश्वविद्यालय है। करीब एक किमी में फैला है यह गुप्ताकालीन महाविहार है। इसकी स्थापना पांचवीं सदी में हुई थी। नोबल विजेता अमर्त्य सेन भी प्राप्त पुरावशेषों को देखकर हतप्रभ रह गए थे।

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