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बड़ी समस्या:पढ़ाई के साथ बच्चे अपना खाली समय बिताने के लिए मोबाइल का प्रयोग करने लगे हैं

बिक्रमगंज20 दिन पहले
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कोरोना काल मे ऑनलाइन का यह साइड इफेक्ट परेशान करने वाला है। स्कूल, कॉलेज संस्थान बंद होने के नतीजे हैं कि अधिकतर लोगों की आंखों में खुश्की की शिकायत आ रही है। सबसे ज्यादा इसका असर छोटे छोटे बच्चों पर देखने को मिल रहा है। पढ़ाई के साथ साथ वह अपना खाली समय बिताने के लिए अधिकतर समय मोबाइल पर बीता रहे है।

आई स्पेशलिस्ट के पास आँख दिखाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों की आंखें कमजोर हो रही हैं। बच्चों के चश्मे का नंबर बढ़ने लग गया है। आंख में दर्द और एलर्जी की शिकायत भी है। आंख में खुश्की हो रही है। जो पहले यह स्थिति बच्चों में नजर नहीं आती थी। मोबाइल, टीवी व लैपटॉप पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इस कारण लगातार अस्पतालों में आंखों की ओपीडी बढ़ रही है।

आंख में खुश्की पहले सिर्फ बड़ों में ही थी, आंखों की मांसपेशियां भी कमजोर

शहर के नेत्र चिकित्सक पंकज कुमार कहते है कि बच्चों की आंखों में खुश्की के केस बढ़ रहे हैं। पहले यह स्थिति बड़ों में ज्यादा नजर आती थी। आंखों में दर्द, पानी आना, सिर दर्द होना आदि। बच्चे फोन, गेमिंग और टीवी पर अधिकतर समय बिता रहे है। इस कारण केसों में तेजी आ रही है। बच्चों को जितना हो सके मोबाइल से दूर रखें, ऑनलाइन क्लास में ब्रेक जरूर दें। ऑनलाइन पढ़ाई के कारण आंखों को मांसपेशियों कमजोर होना शुरू हो गई है। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों के साथ माता-पिता बैठें, ताकि फोन आंखों से दूर रहे। स्कूल भी ऑनलाइन क्लास का समय घटाएं। जिनको चश्मा लगा है। वो 6 महीने और रूटीन में तीन महीने में बच्चों की आंखों की जांच कराते रहे।

बढ़ रहे बच्चों के चश्मे के नंबर, दिख रहा धुंधला
बच्चों की आंखों में लगातार कमजोरी के केस आ रहे हैं। अब कोरोना के कारण बच्चे घर के अंदर ही हैं। इसी कारण टीवी व मोबाइल पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इसी कारण बच्चों के चश्मे के नंबर बढ़ रहे हैं। जिन बच्चों को चश्मे नहीं लगे थे, उनको चश्मे लगने की नौबत आ रही है। कोरोना से पहले फोन की बिक्री दुकानों पर ज्यादा होती थी, लेकिन बीते 15 महीनों में फोन की बिक्री 12 से 18 फीसदी तक बढ़ गई। ऑनलाइन शॉपिंग से ज्यादा मोबाइल खरीदे जा रहे हैं।

आंख खराब होने से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

बच्चों को चश्मा पहनना पड़ता है। ऐसे बच्चों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। क्योंकि बच्चे अब घर के बाहर कम खेलते हैं। जिससे दूर तक देखने की क्षमता अच्छी तरह से विकसित नहीं हो पाती मोबाइल स्क्रीन चेहरे के पास रहने के कारण नजदीक देखने की क्षमता तेजी से विकसित होती है। बच्चों की आई बॉल देखने की आदत के अनुसार विकसित होती है। ऐसा नही है कि ऑनलाइन के साइड इफेक्ट्स सिर्फ बच्चों पर ही पड़ रहा है बल्कि लोगो पर भी असर दिखा रहा है जो ज्यादा मोबाइल चला रहे हैं।

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