गम का माहौल:कश्मीर के कुपवाड़ा में बिक्रमगंज का जवान धर्मेंद्र कुमार सिंह शहीद

बिक्रमगंज2 महीने पहले
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शहीद जवान, की सफाई कराते अलग अलग जगहों पर गांव के युवक - Dainik Bhaskar
शहीद जवान, की सफाई कराते अलग अलग जगहों पर गांव के युवक
  • शहीद के पार्थिव शरीर आने से पूर्व गांव के युवक सफाई में जुटे़

कश्मीर के कुपवाड़ा में बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के मैधरा गांव के रामप्रवेश सिंह के पुत्र आर्मी जवान धर्मेंद्र कुमार सिंह शहीद हो गया। घटना की खबर सुन गांव में शुभचिंतकों की भीड़ जुट रही है। गांव में मातम पसर गया है। वृद्ध पिता पूर्व से बीमार है। पत्नी रुबी को भी अभी तक बताया नहीं गया है कि उनके सिंदूर उजड़ गया है। जिसको जैसे जानकारी हो रहा है कि धर्मेंद्र शहीद हो गया दौड़ते हुए मैधरा गांव पहुंच रहा है। गांव के लोग शमशान में मिट्टी भराने के साथ साथ साफ सफाई में जुट गए है। सबका आंखे नम है। कोई किसी से बोलने की हिम्मत नहीं जुटा रहा है। गांव के लाल के अंतिम दर्शन के लिए युवक, वृद्ध, सब इंतजार कर रहे है।
शहीद जवान धर्मेंद्र की 2012 में हुई थी शादी
धर्मेंद्र के रिश्तेदार बसु सिंह, रुआंसी आवाज में कहते हैं कि बुधवार को दोपहर तक जवान के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचेगा। जहां आर्मी के जवान गॉड ऑफ ऑनर देंगे। जवान शहीद धर्मेंद्र की शादी 2012 में शिवसागर थाना क्षेत्र के बड्डी गांव के रुबी से हुआ था। जवान के दो पुत्र है। गांव के ग्रामीण सुनील सिंह, देवेंद्र सिंह, सतेंद्र बहादुर सिंह, श्यामबिहारी सिंह, अवध सिंह, अनु सिंह, डब्लू, मंटू, चिंटू सहित कई ग्रामीणों ने कहा कि जिला प्रशासन गांव के स्कूल को शहीद के नाम पर करे।

शहीद के नाम पर गेट निर्माण की मांग
साथ ही साथ शहीद के प्रतिमा अनावरण व गांव के बाहर शहीद के नाम पर गेट निर्माण कराए। समाचार भेजे जाने तक गांव में प्रशासन के कोई आलाधिकारी नही पहुंच सके है। शहीद जवान के पुत्र तेज प्रकाश और आर्यन भीड़ को देख एक नजर से देख रहे हैं। उन्हें भी एहसास नही है अब उनके पिता के साया उन पर नही रहा। विस्तर पर लेटे लेटे पिता कुछ रिश्तेदार को देख पूछ रहे है कोई बात है क्या। पत्नी रुबी और पिता रामप्रवेश को यह बताया गया है कि हादसे में जख्मी हो गए हैं अस्पताल में इलाज चल रहा है। लेकिन इन सब के बावजूद अनजान डर से दोनो सहमे हुए है हर तरफ मातम है। आर्मी के अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि कश्मीर के कुपवाड़ा में आर्मी के गाड़ी पलट जाने से जवान शहीद हो गए है।

घर के बूझ गया चिराग
शहीद धर्मेंद अपने पिता के इकलौता वारिस था। घर में वृद्ध बीमार पिता रहते थे। जिनके सेवा करने के लिए उनकी पत्नी भी गांव में रहती थी। इस बार वह कहकर गए थे कि 15 माह बाद वह हमेशा के लिए गांव आ जाएंगे, लेकिन वह तो नहीं आ सके। उनके पार्थिव शरीर आ रहा है। जिससे पूरा गांव में मातमपूर्सी है। गांव के वृद्ध अपने होनहार लाल धर्मेंद्र के कई किस्से सुनाते हुए भावुक हो जाते हैं।

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