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बिक्रमगंज:बिहारी कामगारों को बुलाने को बसें भेज रहीं कंपनियां, पगार बढ़ाने का भी लालच

बिक्रमगंज3 महीने पहले
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  • कामगारों की मजबूरी: यहां अच्छे पैसे नहीं मिल रहे, काम की भी कमी, दोबारा बाहर नहीं गए तो परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ भी होगा मुश्किल
  • कंपनियों की मुश्किल: बिहारी मजदूरों के चले जाने की वजह से फैक्ट्रियों में बंद है काम, शुरू करना है उत्पादन, स्थानीय स्तर पर बेहतर कामगारों की कमी

कोरोना काल में जब दिल्ली, बेंगलुरू, मुंबई, की फैक्ट्रियां में ताला बंद हुए तो वहां काम कर रहे बिहारी युवक बेरोजगार हो गए। खाने-पीने से लेकर रहने तक दिक्कत होने लगी तो अपना गांव याद आया। लॉकडाउन में सैकड़ों मील का पैदल सफर और तमाम मुश्किलों से जूझते हुए अपने गांव पहुंचे। पर अब फिर से वापसी का सफर दिल्ली व बेंगलुरू के लिए शुरू हो गया है।

वजह उन कंपनियों की जरूरतें हैं जो इन मजदूरों के लौट आने के बाद लगभग बंद पड़ी हैं। अब वहां की कई कंपनियों के द्वारा घर लौट चुके लोगों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। इन्हें वापस बुलाने के लिए वाहन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बिक्रमगंज के विभिन्न गांवों के दर्जनों युवक विभिन्न राज्यों की तरफ रुख करने लगे हैं, जहां वे पहले काम करते थे। चार दर्जन के करीब कामगार चले गए, तो वहीं सैकड़ों अभी जाने की तैयारी में हैं।

हरियाणा से लौटे मजदूरों को झारखंड की कंपनी ज्यादा सैलरी की लालच दे ले गई
मार्च में जब देश लॉकडाउन हुआ तो हम और हमारे गांव के साथी मुमताज अली, अजीत पासी, हरियाणा के जगधरा में रहते थे। वहां बर्तन बनाने की फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री बंद हुई तो घर लौट आए, लेकिन यहां कोई रोजगार नहीं मिला। फिर जुलाई की शुरुआत में झारखंड की बर्तन बनाने वाले कंपनी ने कॉल किया। सैलरी भी हरियाणा से ज्यादा देने को कहा तो हम लोग जाने को तैयार हुए। फिर वह अपना गाड़ी भेज हमें झारखण्ड के रांची बुला लिए जहां काम कर रहे हैं। -बिक्रमगंज प्रखंड के नोनहर गांव के श्रीराम पासी
दो महीनों तक काम नहीं मिला, फैक्ट्री चालू हो गई तो ठेकेदार ने कॉल कर के बुलाया

कोरोना शुरू हुआ तो लॉकडाउन लागू हुआ और फैक्ट्री बंद हो गई। कुछ दिनों तक ठीक-ठाक रहा। फिर माली हालत खराब हुई तो गांव लौट आया। लेकिन यहां आने के बाद दो महीनों तक कोई काम नहीं मिला। इस बीच फैक्ट्री भी चालू हो गई। ठेकेदार ने कॉल कर बुलाया। वहां से कंपनी के ठेकेदार द्वारा आने की बात कही गई। फिर गाड़ी भेजी तो वापस लौट आए। -बबलू कुमार, संझौली (बेंगलुरू पहुंचने के बाद)

6 अगस्त को फिर बलिया आएगी बस, ठेकेदार ने कामगारों से किया है संपर्क
संझौली प्रखंड में से फिर बैंगलौर जाने वाले युवकों के लिए 6 अगस्त को बस बलिया आने वाली है। वहां तक निजी वाहन से लोगों को कंपनी के ठेकेदार ले जाएंगे। इसके लिए ठेकेदार ने स्थानीय मजदूरों से संपर्क किया है और जाने के लिए तैयार रहने को कहा है। ये वैसे मजदूर हैं जो पहले भी वहां काम करते थे। इन मजदूरों का कहना है कि यहां काम के अच्छे पैसे नहीं मिल रहे। परिवार चलाना मुश्किल है।

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